लंदन। लैटिन अमेरिका में प्राचीन माया सभ्यता के एक पुराने कैलेंडर में 2012 में दुनिया के खत्म होने का कोई संकेत नहीं दिया गया है। ग्वाटेमाला के एक प्राचीन मकान में मिले अति प्राचीन कैलेंडर में 21 दिसंबर को प्रलय आने की कोई पूर्व प्रचारित भविष्यवाणी नहीं की गई है।

एक ताजा अनुसंधान के अनुसार वैज्ञानिकों ने पाया कि माया सभ्यता के एक प्राचीन खंडहर की दीवार पर खुदे कैलेंडर में अब से 600 साल बाद तक की तिथियां अंकित हैं। यानी इस कैलेंडर के हिसाब से वर्ष 2012 में दुनिया के खत्म होने की माया सभ्यता की बात अतार्किक है। चूंकि माया कैलेंडर में भौगोलिक व खगोलीय घटनाओं का वर्णन अब तक काफी सटीक पाया गया है, इसलिए इस पुरातन सभ्यता के पिछले कैलेंडर में 21 दिसंबर 2012 को दुनिया के खत्म होने की भविष्यवाणी को इतिहासकार और वैज्ञानिक बहुत गंभीरता से ले रहे थे, लेकिन अब इसी सभ्यता का एक उससे भी पुराना कैलेंडर मिला है, जिसमें वर्ष 2012 के बाद की भी तिथियां अंकित हैं। इसलिए यह माना जा रहा है कि पृथ्वी पर प्रलय या विनाश का फिलहाल कोई अंदेशा नहीं है। माया सभ्यता के इस पुराने कैलेंडर में माया सभ्यता के समय से कुल 6000 वर्ष की तिथियों का वृतांत है। इसका मतलब पृथ्वी पर जीवन अब से काफी आगे तक रहने की संभावना है।
साइंस पत्रिका की रिपोर्ट के अनुसार न्यूयार्क के हेमिल्टन स्थित कोलगेट यूनिवर्सिटी के एथोनी अवेनी का मत है कि अगर दुनिया खत्म होने वाली होती तो इतने आगे की अवधि की तिथियों को कैलेंडर में क्यों दर्ज किया जाता। पूर्वोत्तर ग्वाटेमाला के जुल्टन वर्षा वन में पाए गए माया सभ्यता के इस खंडहर की दीवारों पर उनके राजा के सिंहासन पर बैठने के चित्र अंकित हैं। इसके अलावा उस पर कई अन्य चित्र भी उकेरे गए हैं। एक अन्य दीवार पर चंद्रमा की गतियों पर आधारित 13 वर्षो को दर्शाने वाला एक कैलेंडर भी है। अनुसंधान कर्ताओं का मानना है कि माया सभ्यता के लोगों का मत रहा होगा कि उनकी देवी कभी-कभार चंद्रमा की गतियों को नजरअंदाज भी करती होंगी।
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