हिरण का सफेद रंग का शिशु मिला संरक्षण पूरे प्रयास

 हिरण के सफेद रंग के शिशु के साथ लाजवंती।

डबवाली -अबूबशहर सेंचुरी के अंतर्गत गांव जंडवाला बिश्नोईयां में एक हिरण का सफेद रंग का शिशु मिला है। शिशु की आयु करीब 3 माह की है और यह नर है। बहरहाल इसका पालन पोषण गांव के कृष्ण कुमार पुत्र मनफूल दास मेघवाल के परिवार द्वारा किया जा रहा है। इसे एक माह पूर्व गांव के खूंखार हो चुके आवारा कुत्तों के चंगुल से इसी परिवार ने घायल अवस्था में छुड़ाया था
हिरण के शिशु का पालन पोषण कर रही कृष्ण कुमार की पुत्री लाजवंती ने बताया कि उनकी ढाणी के पास कुत्तों का शोर सुन कर वे भाग कर नजदीक के खेत में गये तो उन्होंने देखा कि कुत्ते निरीह शिशु को घेर कर घायल कर चुके थे और उसे खाने की तैयारी में थे उसके परिजनों ने वहां पहुंच कर कुत्तों को लाठियों से भगाया और उसे घायल अवस्था में घर ले आये। जगह-जगह कुत्तों द्वारा काटे जाने के कारण उनके शरीर से खून रिस रहा था उन्होंने लगातार 15 दिन तक उसकी मलहम पट्टी कर उसके जख्म ठीक किये। तब उसकी आयु मात्र दो माह की थी और वह खा पी भी नहीं रहा था। उन्होंने बताया कि उन्होंने बच्चों के दूध पीने वाली बोतल से उसे दूध पिलाया जा है यहां तक की पानी भी बोतल से पिता है और अब यह थोड़ी बहुत घास भी खा लेता है। उन्होंने बताया कि कुत्ते अब भी उनके घर के आस पास मंडराते रहते है और कई बार उनके घर में घुसने का प्रयास कर चुके है। कुत्तों से बचाव के लिए उन्हें घर के ऊपरी मंजिल पर रखा गया है। इसे अभी खेतों के खुला छोडऩा खतरे से खाली नहीं है।
 लाजवंती ने बताया कि उसका इस शिशु से लगाव हो चुका है वह दिन में कई चक्कर लगा कर इसे संभालती है। यह भी उसे देख कर कुलाचे मारने लगता है उनके परिवार का एक सदस्य बन चुका है।
नया नहीं है ग्रामीणों का जीवों के प्रति मोह
सेंचुरी में स्थित गांव को निवासियों का निरीह जीवों के प्रति मोह कोई नया नहीं है। कई बार जीवों को बचाने के लिए अपनी जान भी दाव पर लगा देते है। कृष्ण कुमार मेघवाल के अलावा  इसकी गांव के कृष्ण कुमार बिश्नोई के परिवार द्वारा भी करीब डेढ़ वर्ष की लाल रंग की मादा हिरण का पालन पोषण किया जा रहा है। उसे भी घायल अवस्था में आवारा कुत्तों से बचाया गया था। इसकी प्रकार गांव गंगा की गौ शाला में एक हिरण की देख भाल की जा रही है। इससे पूर्व गांव के खूंखार हो चुके कुत्तों द्वारा लगातार हिरणों का शिकार किये जाने के बाद ग्रामीण जीवों की रक्षा के लिए आगे आ थे उन्होंने खूंखार कुत्तों को पकडऩे के लिए प्रशासन पर दबाव बनाया था और गांव जंडवाला बिश्नोईयां की पंचायत ने अपने स्तर पर 19 हजार रुपये खर्च किये।
पहला मामला है केसरा राम
अखिल भारतीय बिश्नोई वन्य जीव रक्षा समिति के कोषाध्यक्ष केसरा राम ने बताया कि सेंचुरी में सफेद रंग का हिरण के शिशु का मिलना पहला मामला है। पहले इस रंग का शिशु देखने को नहीं मिला। ये अभी तक रहस्य बना हुआ है कि इस रंग का शिशु यहां पर कैसे आया। न ही सफेद रंग की मादा और नर यहां पर है।
जांच होगी: वन रक्षक
वन्य जीव रक्षक लीलू राम ने बताया कि सम्भवत: ये ब्लैक बग की किस्म हो क्योंकि उसका उसका शिशु भी पहले तीन साल तक सफेद रंग का होता है और धीरे-धीरे उसका रंग काला होने लगता है। इसकी जांच की जायेगी। इसके संरक्षण के भी पूरे प्रयास किये जायेंगे।

गांव जड़वाला बिश्नोईयां व इसके आस पास के क्षेत्र में करीब 450 हिरण है इनमें दुर्लभ ब्लैक बग यानी काले हिरण भी है। इसके अलावा काला तीतर 1000, मोर 50, सेह18, सियार 40 से 50, और नील गाय सैकड़ों की संख्या में है। सरकारी स्तर पर उनकी संख्या के आंकड़े उपलब्ध नहीं है, और न ही पिछले एक दशक से इनकी गणना की गई है लेकिन ग्रामीणों की वन्य जीव रक्षा समिति के सदस्य अपने स्तर पर मोटे तौर पर यह गणना उपलब्ध करवा रहे है। जीवों की रक्षा का जिम्मा भी ज्यादा तर इन गांवों के बिश्नोई समुदाय के लोग ही उठा रहे है।


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