जहां लड़कियों को झेलनी पड़ती हैं ऐसी गंदी प्रथा

किर्गिजस्तान में शादी की प्रथा सबसे अजीबो-गरीब है। अगर यहां किसी भी लड़के को दुल्हन पसंद आती है तो वह उसे सरेआम उठा लेता है और अपने घर ले आता है। लड़के के घर में लड़की पर दबाव बनाया जाता है, वह उनके लड़के को पसंद कर ले और उसी से शादी करे। इस शादी को 'अला काछू' कहा जाता है।इसका मतलब है पकड़ो और भागो। कई बार यह काम बड़ी योजनाबद्ध तरीके से किया जाता है। किसी लड़के को बाजार या रास्ते में कोई सुंदर लड़की मिली और उसने मन ही मन अपना दिल दे दिया तो वह अपने परिवार और दोस्तों को यह बात बता देगा। फिर पूरा परिवार लड़की के अपहरण में जुट जाता है। कभी-कभी यह बहुत गंभीर मामला भी हो जाता है।घर के मर्दों द्वारा दुल्हन का अपहरण कर घर लाने के बाद अगला काम घर की महिलाओं का होता है, औरतें होने वाली बहू को मनाती हैं उसके नखरे सहती हैं, उसे डांट कर, पुचकार कर और अगर जरूरी हुआ तो थोड़ा सख्ति से काम लेती हैं। इसके ठीक बाद एक बड़ी शानदार पार्टी होती है। प्रथा निभाने वाले समाज के एक बुजुर्ग का कहना है कि एक बार लड़की ने पति के घर में रात गुजार ली तो हमेशा के लिए वहीं रह जाती है। इसके ठीक अगले दिन एक बकरे की बलि दी जाती है और बाद में उसे पकाकर खाया जाता है।घर के बड़े-बुजुर्ग फिर लड़की के परिवार से मिलने जाते हैं और उनसे माफ़ी मांगना चाहते हैं, इसके लिए वह होने वाले नए रिश्तेदारों के लिए बहुत सारे उपहार और एक बकरा भेंट में देते हैं। थोड़ा न नुकुर के बाद सभी मान जाते हैं और फिर एक और दावत लड़की के घर होती है। एक अपहृत लड़की की मां 'द्युसेनबीवा सोइरोगुल' का कहना है कि मुझे बहुत बुरा लगा कि मेरी बेटी को उठा ले गए, लेकिन क्या करें, यही तो दस्तूर है। क्योंकि मेरा भी लड़का है, कल को वह भी यही काम करेगा। मेरे साथ भी ऐसा ही हुआ था, यह तो प्राचीनकाल से चला आ रहा है।मैदेव टिनचक की शादी को 10 साल हो चुके हैं, वह बताते हैं कि ये हमारे खून में है, हालांकि हम कानून तोड़ते हैं, लेकिन ये हमारे जीवन का हिस्सा है। वहीं उनकी पत्नी बताती हैं कि जब वह पहली बार मिले थे तो उन्होंने कहा कि तुम मुझसे शादी करोगी या फिर मैं तुम्हें उठा ले जाऊं। मैंने कहा कि ऐसा मत करना...मेरा बॉयफ्रेंड है, लेकिन जब हम दूसरी बार मिले तो इन्होंने मुझे किडनैप कर लिया।इस पर मैदेव जवाब देते हैं कि मेरा अपने दिल पर जोर नहीं था, मुझे पहली नजऱ में प्यार हो गया था। इस पूरी प्रथा पर पहली बार फिल्म बनाने वाले बोज सल्किन (2007) के निर्देशक 'एर्नेस्ट एब्दीजपरोव' ने बताया कि 2007 के बर्थ रजिस्ट्री की रिपोर्ट में ज्यादातर लड़कियों के नाम असीमा था, जो इस फिल्म के मुख्य पात्र का नाम था। फिल्म के सक्सेसफुल होने के बाद शहर के मेयर ने मुझसे पूछा कि तुमने यह फिल्म क्यों बनाई। दुनिया सोचेगी कि हम दुल्हन चोर हैं।उन्होंने कहा कि पश्चिम के देश इन प्रथा की बुराई करते हैं, लेकिन वह अपने यहां गे और लेस्बियन शादियों को मान्यता जरूर देते हैं। ऐसा नहीं है कि हर बार अंत में सब कुछ अच्छा ही होता है। कई बार लाख मनाने पर लड़कियां नहीं मानतीं और आत्महत्या जैसा कदम उठा लेती हैं। एक लड़की की मां 'अब्दीशोवा' बताती हैं कि एक रात मैं घर पर नहीं थी, पीछे कुछ लोग मेरी बेटी को उठा ले गए और जबरदस्ती शादी कर ली। उसका पति अच्छा नहीं था। तीन महीने बाद बेटी घर आई तो उसने अपने आपको फांसी से लटका लिया।

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