कुत्ते से बचने के चक्कर में दो मासूम डूबे
जूस पीकर लौट रहे थे चार मासूम परिजन पहुंचे तब तक हो चुकी थी देर
डबवाली। मंडी किलियांवाली में शनिवार को किन्नू के बाग की सिंचाई के लिए बनी पानी की डिग्गी में डूबने से दो बच्चों की मौत हो गई। माहौल उस समय गमगीन हो गया, जब एक बेजुबान मां के आगे उसके लाल का शव पड़ा था। वह अश्रुधारा और संकेतों से अपने दर्द को बयां कर रही थी। शहर के चिकित्सक गिरधारी लाल गर्ग का मंडी किलियांवाली में कोल्ड स्टोर है। कोल्ड स्टोर के इर्द-गिर्द किन्नू का बाग लगा हुआ है। ड्रिप सिस्टम से सिंचाई के लिए बाग में पानी की डिग्गी बनी हुई है।
शनिवार सुबह करीब 11 बजे कोल्ड स्टोर में रहने वाले चार बच्चे जॉनी, गणेश, अजय तथा नन्नी गन्ने का जूस पीने के लिए स्टोर से कुछ दूरी पर गए थे। चारों जूस पीकर लौट रहे थे। मार्ग में कुत्ते से बचने के लिए चारों शॉर्टकर्ट अपनाते हुए बाग में प्रवेश कर गए ताकि कोल्ड स्टोर में पहुंचा जा सके। गर्मी से राहत पाने के लिए जॉनी और अजय कपड़े उतारकर बाग में बनी डिग्गी में कूद गए। यहां दोनों डूबने लगे। दोनों को डूबते देख गणेश तथा नन्नी शोर मचाते हुए कोल्ड स्टोर में पहुंचे। गणेश ने अपने बड़े भाई जॉनी के डूबने की सूचना अपनी बहन पूनम को दी। कोल्ड स्टोर में रह रहे परिवारों में हड़कंप मच गया। शोर सुनकर वहां आए शाम श्रीवास्तव, खान और मनजीत सिंह ने पानी की डिग्गी में कूदकर जॉनी तथा अजय को बाहर निकाला। परिजन उसे निजी चिकित्सक के पास ले गए। चिकित्सक ने दोनों को मृत घोषित कर दिया।
मृतक जॉनी का दादा भी अस्पताल में
कोल्ड स्टोर में रह रहे कृष्ण कुमार का 11 वर्षीय बेटा जॉनी आर्य विद्या मंदिर स्कूल की 5वीं कक्षा पढ़ता था। वह पांच भाई बहनों में मंझला था। हादसे के समय कृष्ण कुमार घर पर मौजूद नहीं था। जॉनी की बहन पूनम ने बताया कि उसके दादा कुंभाराम गांव सांवतखेड़ा में रहते हैं। शुक्रवार को घर पर उन्हें बैल ने पटक दिया था। उसके पिता उन्हें लेकर बठिंडा गए हैं। दादा की हालत नाजुक है।
खेलते-खेलते पहुंचे बाग में
बाग में ड्रिप सिस्टम के लिए डिग्गी का निर्माण किया गया है। अक्सर बच्चे कोल्ड स्टोर के भीतर खेलते थे। खेलते-खेलते बच्चे बाग में पहुंचे गए। गर्मी के कारण नहाने के लिए डिग्गी में उतर गए।
-डॉ. गिरधारी लाल गर्ग
मां ने इशारों मेंे ही बयां किया अपना दर्द
कोल्ड स्टोर में लेबर ठेकेदार कुमार थापा का 6 वर्षीय बेटा अजय तीन भाइयों में सबसे छोटा था। वह कोल्ड स्टोर के निकट स्थित एक विद्यालय में पहली कक्षा में पढ़ता था। माहौल उस समय बेहद गमगीन हो गया, जब थापा की बेजुबान पत्नी के आगे उसके लाल का शव पड़ा था। आंखों से अश्रु की धारा नहीं रुक रही थी। महिलाओं ने उसे संभालने का प्रयास किया लेकिन वह बेटे के जाने का गम केवल इशारों और अश्रुधारा से ही बयां कर पा रही थी।
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