डेरा सच्चा सौदा की खुली पोल---डेरा सच्चा सौदा का नाम झूठा सौदा होना चाहिए-- संत दादूवाल


सिरसा। डेरा सच्चा सौदा का नाम झूठा सौदा होना चाहिए और स्वयं को ईश्वर बताने वाले की फिल्म पर प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए। दिल्ली विधानसभा चुनाव में 20 लाख समर्थक का दावा करके भाजपा को पथभ्रमित करने वाले डेरा प्रमुख की सच्चाई पर दिल्ली के वोटरों ने मोहर लगाकर डेरा सच्चा सौदा की पोल खोल दी है। उक्त विचार पंथक सेवा लहर के प्रमुख संत बलजीत सिंहवाल दादू ने दसवें पातशाही गुरूद्वारा में पत्रकारों से रूबरू होते हुए व्यक्त किए। फिल्म एमएसजी पर बोलते हुए संत दादूवाल ने कहा कि फिल्म में खुद को भगवान बताने वाले डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख गुरमीत सिंह की इस फिल्म पर रोक लगनी चाहिए। पैसों व सत्ता के दम पर सैंसर बोर्ड से प्रमाण पत्र लेने वाले गुरमीत सिंह की जगह जेल की सलाखों के पीछे है। सैंसर बोर्ड को चाहिए कि इस तरह की विवादित फिल्मों पर रोक लगाकर उसी फिल्म को प्रमाण पत्र दें, जो सत्यता दिखाए। दादूवाल ने कहा कि उनकी प्ररेणा से बनी फिल्म द ब्लड स्ट्रीट को सैंसर बोर्ड ने प्रमाण पत्र देने से दो बार मना किया है, जबकि यह फिल्म सच्ची घटना पर आधारित है और वे सैंसर बोर्ड से तीसरी बार फिल्म के प्रमाण पत्र के लिए तीसरी बार अपील दायर की जाएगी। दादूवाल के साथ आए फिल्म के निर्माता जसवीर सिंह भोपराए ने फिल्म ब्लड स्ट्रीट की फिल्म की कहानी के बारे में पत्रकारों से कहा कि यह फिल्म सच्ची घटना पर आधारित है, जोकि संत दादूवाल की प्ररेणा से बनी है। इस फिल्म को परिवार के साथ भी देखा जा सकता है। इस फिल्म को विदेशों में भी रिलीज किया जा रहा है, मगर भारत में सैंसर बोर्ड ने इस पर रोक लगाई हुई है और जल्द ही वे इस फिल्म के प्रमाण पत्र के लिए पुन: सैंसर बोर्ड से अपील करेंगे। पत्रकारों से दादूवाल ने कहा कि उन्होंने मीडिया के माध्यम से सिनेमाघरों के मालिकों से अपील की थी कि फिल्म एमएसजी को न चलाया जाए, अगर इसके बावजूद भी यह फिल्म सिनेमाघरों में चलती है और सरकार इस संबंध में कोई ठोस कदम नहीं उठाती है, तो वे सिख सगठनों व अन्य संगठनों के साथ इसका विरोध करेंगे, जिसकी जिम्मेवारी सरकार व प्रशासन की होगी। इस प्रैस कांफ्रेंस में द ब्लड स्ट्रीट के अभिनेता कर्मजीत बराड़, सहायक निर्माता इंद्रजीत सिंह भी मौजूद थे।

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