दो भाई और एक बहन, बंद आंखों से पढ़ लेते हैं अखबार

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सिरसा। कहते है कि प्रतिभा प्रदर्शन के लिए उम्र की कोई सीमा नहीं होती। बस जुनून बुलंदी तक ले जा सकता है।
सिरसा शहर में रहने वाले कुछ ऐसे बच्चे है, जिन्होंने यह साबित कर दिखाया है कि करने की चाहत और दृढ़ इच्छाशक्ति मजबूत हो तो हर असंभव को संभव किया जा सकता है।
तीन भाई बहन आंखों पर पट्टी बांधकर न केवल साइकिल आदि चला लेते हैं, बल्कि पढ़ लिख भी लेते हैं। इसके साथ ही रंगों की पहचान भी कर लेते हैं। शहर के सुरतगढ़िया बाजार निवासी राजकुमार गुप्ता का बड़ा बेटा 12 साल का केशव यूं तो सातवीं कक्षा का छात्र है, पर बुद्धि कौशलता में हर बड़ी उम्र और पढ़ लिखे लोगों को अपने दांतों तले उंगली दबाने पर मजबूर करता है।
केशव गुप्ता को यह शौक इसी साल जनवरी माह से ही लगा और देखते ही देखते उसका यह शौक जुनून बन गया। हालांकि शरुआती दौर में घरवालों को भी यह सब समझ नहीं आ रहा था, पर राजकुमार गुप्ता की मानें, तो उन्हें कुछ समय बाद में यह समझ आया कि उनका लाडला एक किस्म का जादूगर है।
केशव ने आंखों पर पट्टी बांधकर जब साइकिल चलाना शुरू किया, तो घरवाले भी अचंभे में पड़ गए कि आखिर वह यह क्या कर रहा है। मगर उसने साबित कर दिखाया कि केशव औरों सेे भिन्न हैं। इसके बाद वह ड्राइंग भी आंखों पर पट्टी बांधकर करने लगा और फिर पढ़ाई-लिखाई भी उसने इसी तरीके से की।
देखते ही देखते केशव के शौक से उसका चचेरा भाई 11 साल का राघव गुप्ता भी प्रभावित हो गया और केशव ने राघव को ट्रेंड कर दिया।
दूसरी कक्षा में पढ़ने वाली सुरभि गुप्ता भी अब अपने इन दोनों भाइयों की तरह आंखों पर पट्टी बांधकर वह सब कुछ आसानी से देख लेती है जो खुली आंख में भी करने सेे दूसरा इंसान हिचकिचाता है। सुरभि हालांकि दूसरी कक्षा में पढ़ती है पर वह यह कला सीखने के बाद खुद को बड़ा भाग्यशाली मानते हुए कहती हैं कि वह यह सब अपने भाइयों की तरह आंखों पर पट्टी बांधकर आसानी से कर लेती हे, जो खुली आंख से करने में दूसरा इंसान हिचकिचाता है। वह अपने स्कूल में अलग रूप से जानी व पहचानी जाती है। इस अद्भुत प्रतिभा को पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा, पूर्व मंत्री गणेशी लाल व सीएम के राजनीतिक सलाहकार जगदीश चोपड़ा के समक्ष प्रदर्शन किया और उन्हें सम्मानित किया।

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