जेल में बंद हैं दो भाई, न्याय लिए 23 दिनों से भूख हड़ताल पर

मार्बल लाने गए भाइयों पर राजस्थान पुलिस ने बनाया केस 


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गांव सिंघपुरा के प्रॉपर्टी डीलर उसके रिश्ते में भाई पर 29 माह पहले राजस्थान के चित्तौडगढ में दर्ज किए गए एनडीपीएस एक्ट के केस में न्याय नहीं मिलने पर पीड़ितों ने भूख हड़ताल शुरू कर दी है। जिससे उनकी जान का जोखिम बना हुआ है। इसके बचाव के लिए पत्नी बेटे ने राष्ट्रपति से मामले में न्याय की मांग की है।
भूख हड़ताल पर जाने से विचाराधीन कैदी की हालत भी गंभीर होती जा रही है। डाक्टर उन्हें ड्रिप लगाकर सेहत में सुधार करने की कोशिश कर रहे हैं। पिछले 23 दिनों से विचाराधीन कैदियों के भोजन नहीं लेने पर जेल प्रशासन ने परिजनों को अस्पताल में बुलाया लेकिन न्याय नहीं मिलने तक कैदियों ने भोजन लेने से मना कर दिया है। इससे पति की जान जोखिम में देखकर पीड़िता बेटे ने भी राष्ट्रपति न्यायाधीशों को पत्र भेजकर न्याय की गुहार की है। पीड़िता रानी देवी पत्नी हरबंस सिंह ने बताया कि उसके पति हरबंस सिंह अपने रिश्ते में भाई पंजाब निवासी अवतार सिंह के साथ अगस्त 2013 में राजस्थान में मार्बल खरीद करने गए थे। इसी दौरान चित्तौडगढ में एक सितंबर 2013 को राजस्थान पुलिस ने उन्हें अपनी रिट्ज कार और नकदी के साथ बेवजह पकड़ लिया। जिससे पुलिस से सवाल-जबाव करने पर उसके पति सहित दोनों को पुलिस से पंगा लेने का सबक सिखाने की धमकी देकर अवैध हिरासत में रखा और नकदी की बजाय उन पर 29 किलो अफीम तस्करी का केस डाल दिया गया। उक्त केस की एफआईआर में भी झूठी धरपकड़ की कहानी दर्ज की गई है जिससे साफ पता चलता है कि केस रंजिश में बनाया गया है। इसको लेकर उसका पति सदमे में है और उनके एनआरआई भाई को केस में फंसाने की धमकी देकर पुलिस ने कई प्रकार के दस्तावेज भी साइन करा रखे हैं। इस बारे में पीड़ित हरबंस सिंह ने कोर्ट में भी पक्ष रखा लेकिन किसी वकील ने उनका केस लड़ने से मना कर दिया। इससे खुद ही अपने केस की पैरवी करने को मजबूर हैं। महिला का कहना है कि हरबंस ने29 महिनों बाद भी न्याय नहीं मिलने पर भाेजन लेने से मना कर दिया है। जिससे उनकी हालत लगातार बिगड़ती जा रही है। जिससे उसने राष्ट्रपति, सुप्रीम काेर्ट के चीफ जस्टिस राजस्थान हाईकोर्ट के न्यायाधीशों को पत्र भेजकर मामले की न्यायिक जांच की मांग की है।

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