गूंज उठा गांव, बरिंदर चक दे फट्टे


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 ऊबड़-खाबड़ रास्ता, छोटा सा गांव और सामान्य दिनचर्या। इन सबके बीच गांव के चौक में होती आतिशबाजी और एक ही टीवी स्क्रीन पर मैच देखते ग्रामीण। यह तस्वीर उस गांव की है, जिसके 23 वर्षीय बेटे बरिंदर सरां ने भारतीय क्रिकेट टीम में शामिल होकर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पदार्पण किया है।1टीवी स्क्रीन पर जैसे ही गांव के गबरू को देखा तो युवाओं ने वीरे बरिंद्र चक दे फट्टे की तेज आवाजें दीं और जो बोले सो निहाल-सत श्री अकाल के जयकारे लगाए। गांव के चौक में टीवी पर जैसे ही पहला विकेट बरिंदर ने लिया तो पटाखे भी जलाए जाने लगे। गांव को देखकर लग रहा था कि क्रिकेट स्टेडियम से अधिक उत्साह तो यहां के ग्रामीणों में है। सबके मन से एक ही बात हमारा दोस्त और भाई आज भारत के लिए खेल रहा है, इससे बड़ी उपलब्धि क्या होगी। मीडिया के जमावड़े से भी ग्रामीण दूर नहीं रहे बल्कि उन्हीं के बीच यह भी कहते रहे कि प्रतिभा कमियों से छुपती नहीं। छोटे से गांव का उनका बेटा आज दुनिया में छा गया है। यहां टीम इंडिया की हार का गम भी दिखा तो इस बात की खुशी भी दिखी कि बरिंदर मैदान पर अपनी प्रतिभा दर्शाने में कामयाब हो गया। बरिंदर के दोस्त राजेंद्र सिंह बोले कि हमें तो पता था, इन गांव की गलियों में खेला बरिंद्र जरूर चमकेगा और आज उसने अपनी चमक बिखेरी है। नजदीकी रिश्तेदार जग्गा सिंह बराड़ ने बताया कि जब बरिंदर छोटा था तो प्लास्टिक की गेंद से खेलता था बल्ब पर निशाना लगाता था। न जाने कितने बल्ब फोड़ता था। इसके अलावा घर में गेंदबाज की स्टाइल में बॉल फेंकता था और बॉल दीवार पर लगती थी। 1जागरण संवाददाता, सिरसा : ऊबड़-खाबड़ रास्ता, छोटा सा गांव और सामान्य दिनचर्या। इन सबके बीच गांव के चौक में होती आतिशबाजी और एक ही टीवी स्क्रीन पर मैच देखते ग्रामीण। यह तस्वीर उस गांव की है, जिसके 23 वर्षीय बेटे बरिंदर सरां ने भारतीय क्रिकेट टीम में शामिल होकर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पदार्पण किया है।1टीवी स्क्रीन पर जैसे ही गांव के गबरू को देखा तो युवाओं ने वीरे बरिंद्र चक दे फट्टे की तेज आवाजें दीं और जो बोले सो निहाल-सत श्री अकाल के जयकारे लगाए। गांव के चौक में टीवी पर जैसे ही पहला विकेट बरिंदर ने लिया तो पटाखे भी जलाए जाने लगे। गांव को देखकर लग रहा था कि क्रिकेट स्टेडियम से अधिक उत्साह तो यहां के ग्रामीणों में है। सबके मन से एक ही बात हमारा दोस्त और भाई आज भारत के लिए खेल रहा है, इससे बड़ी उपलब्धि क्या होगी। मीडिया के जमावड़े से भी ग्रामीण दूर नहीं रहे बल्कि उन्हीं के बीच यह भी कहते रहे कि प्रतिभा कमियों से छुपती नहीं। छोटे से गांव का उनका बेटा आज दुनिया में छा गया है। यहां टीम इंडिया की हार का गम भी दिखा तो इस बात की खुशी भी दिखी कि बरिंदर मैदान पर अपनी प्रतिभा दर्शाने में कामयाब हो गया। बरिंदर के दोस्त राजेंद्र सिंह बोले कि हमें तो पता था, इन गांव की गलियों में खेला बरिंद्र जरूर चमकेगा और आज उसने अपनी चमक बिखेरी है। नजदीकी रिश्तेदार जग्गा सिंह बराड़ ने बताया कि जब बरिंदर छोटा था तो प्लास्टिक की गेंद से खेलता था बल्ब पर निशाना लगाता था। न जाने कितने बल्ब फोड़ता था। इसके अलावा घर में गेंदबाज की स्टाइल में बॉल फेंकता था और बॉल दीवार पर लगती थी। 1बरिंद्र के पहला विकेट लेते ही चहक उठे टीवी स्क्रीन पर मैच देख रहे ग्रामीण।

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