गबन भ्रष्टाचार के मामलों में लीपापोती, महीनों बाद भी नहीं हुई कोई कार्रवाई
भ्रष्टाचार में 2 साल बाद केवल केस
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अव्यवस्था | सीएम विंडो की शिकायतों को गंभीरता से नहीं ले रहे किसी भी विभाग के अधिकारी
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#dabwalinews.com
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सीएम मनोहर लाल खट्टर पहली बार कल कालांवाली में अामजन के बीच रहे हैं। सीएम के सामने विकास कार्यों की उम्मीद के साथ आमजन की ओर से उनके द्वारा भ्रष्टाचार मुक्ति और एेसे मुद्दों पर कड़ी कार्रवाई के लिए शुरू की गई मनभावन योजना सीएम विंडो को सार्थक होने की नाराजगी भी नजर आएगी। तत्परताकी बजाय ढीली जांच सीएम भले ही मंच से इस योजना को लाभदायक बताएं लेकिन सच्चाई ये है कि सीएम की सख्ती के बावजूद यहां शिकायतों का सटीक निपटारा करने की बजाय गुमराह किया जाता है। योजना शुरू करते वक्त सीएम का दावा था कि लोगों को उनके संज्ञान में मामले लाने के लिए चंडीगढ़ नहीं आना पड़ेगा लेकिन अब स्थिति इससे बदतर है। भास्कर ने ऐसी शिकायतों पर अगल अलग विभागों की चर्चित शिकायतों पर पड़ताल की तो इसका नमूना सामने आया। पेंशन गबन मामले में कोई कार्रवाई नहीं गांव आसाखेड़ा में वर्ष 2011 में किए गए पेंशन गबन मामले में पूर्व सरकार में सस्पेंड हुए सरपंच रामकुमार पांडू पर कानूनी कार्रवाई अब तक नहीं हुई। इसके लिए वर्ष 2015 में सीएम विंडो की शिकायत की गई लेकिन मामला जांच पूरी हो चुकी बताकर बंद कर दिया। इस पर शिकायतकर्ता श्रवण कुमार तंवर ने 15 जून 2016 को फिर से सीएम विंडो में सीएमऑफ/एन/038866 दी तो इस पर संज्ञान लेने की बजाय पुरानी जांच रिपोर्ट की प्रति संलग्न कर फिर से मामले को 12 जुलाई को बंद करा दिया गया। शिकायतकर्ता श्रवण कुमार ने कि मामलों में कार्रवाई की बजाय अधिकारी पुरानी रिपोर्ट के आधार पर गुमराह कर रहे हैं। गांव सकताखेड़ा के स्कूल में गबन मामले में लापरवाही गांव सकताखेड़ा के स्कूल में पूर्व इंचार्ज बलबीर धारणिया के किए गए सरकारी फंडों में गबन का पता चलने पर गांव के सरपंच यादवीर सिंह ने 23 जून 2016 को सीएमऑफ/एन/041881 शिकायत की लेकिन एक माह में ही डीईईओ ने शिकायत रविवार में रविवार के दिन स्कूल से सूचना मिले होने के चलते आधारहीन बताकर बिना जांच किए मामला बंद करा दिया गया। इससे सरपंच ने दोबारा सीएम विंडो की शिकायत सीएम विंडो में 28 जुलाई को 054067 की तो इसे भी 23 अगस्त 2016 को पुरानी जांच रिपोर्ट साथ देकर बंद करा दिया गया। जांच रिपोर्ट के निष्कर्ष में सरपंच को ही लापरवाह अप्रत्यक्ष तौर पर साजिशकर्ता बताया गया है। इसी मामले में सरपंच यादवीर की 2 अगस्त को जांच कर्ता द्वारा मामले को दबाने में साजिश का खुलासा करने के लिए विजिलेंस जांच की मांग को लेकर सीएम विंडो की शिकायत 055503 दर्ज कराई गई लेकिन इसके जवाब में जांच आरोपित अधिकारी डीईईओ को ही दे दी गई। डीईईओ ने अपनी शिकायत होने से पुरानी जांच रिपोर्ट संलग्न कर जांच को गुमराह कर दिया और सरपंच को आधारहीन शिकायत करने वाला बताकर मामला 23 अगस्त को बंद करा दिया। जबकि सरपंच यादवीर सिंह का कहना है कि जिस डीईईओ ने गड़बड़ी की है उसी को जांच सौंपी जा रही है तो सीएम के आदेशों की इससे बड़ी अवहेलना क्या हो सकती है। बिजली बोर्ड में भी ढिलाई शहर में कॉपर वायर गबन मामले में नगर पार्षद युद्धवीर रंगीला ने शिकायत 059899 दिनांक 12 अगस्त को की गई। इसमें कॉपर वायर की गबन मामले में वर्ष 2015 में हो चुकी जांच पर फाइनल कार्रवाई रिकवरी कराने की मांग की गई। जिसमें शहर से करीब 15 करोड़ रुपये की कॉपर वायर गबन की रिकवरी होने की उम्मीद है लेकिन अभी तक मामले में तुरंत कोई एक्शन नहीं लिया गया है। शिकायतकर्ता नगर पार्षद ने कहा कि सीएम विंडो से तुरंत और भ्रष्टाचार हीन कार्रवाई की उम्मीद थी लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है। शहर में सबसे चर्चित वर्ष 2011 से 13 के बीच नगर पालिका में करोड़ों के भ्रष्टाचार मामले में पूर्व ठेकेदार कांग्रेस नेता भोलाराम शर्मा ने सीएम विंडो में 30 जुलाई 2015 को शिकायत नंबर सीएमऑफ/एन/2015/74624 की गई। इस पर सीएम ऑफिस से विजिलेंस को जांच और कार्रवाई के आदेश के बाद 3 से ज्यादा बार बंद कर दिया गया जबकि सीएम आॅफिस से इसके लिए 3 से ज्यादा बार रिमांइडर और क्लेरीफिकेशन आदेश दिए गए। शिकायत 11 जुलाई 2016 तक कोई कार्रवाई होने से सीएम ऑफिस से रिमाइंडर जारी किया गया जबकि 24 मई 2016 को डीजीपी को संदेश भेजा तथा 29 जून को कलेरीफिकेशन 30 जून को पुन: शिकायत पर निर्देश दिए गए। इसके बाद 20 जुलाई 2016 को दो साल की जांच के बाद तत्कालीन एसडीएम सुभाष श्योराण सहित 12 लोगों पर केस दर्ज किया और विजिलेंस ने करोड़ों रुपये की रिकवरी के पत्र भेजे लेकिन अब तक तो पुलिस ने किसी अभियुक्त को गिरफ्तार किया और ही किसी विभाग ने विजिलेंस की रिपोर्ट को आधार बनाकर रिकवरी की। जबकि 9 अगस्त काे स्थानीय स्तर पर फिर शिकायत को बंद किया गया। इससे शिकायतकर्ता भोलाराम शर्मा ने दोबारा फिर शिकायत की है। मेरे संज्ञान में ऐसा कोई मामला नहीं है, फिर भी जांच करवाएंगे। आमतौर पर शिकायतकर्ता को संतुष्ट करने का प्रयास किया जाता है।'' डॉ.वेद प्रकाश सीटीएम कम नोडल अधिकारी सीएम विंडो, सिरसा पूर्ण धनेरवा | |
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