भंडाफोड़ |भ्रूण लिंग- जांच लड़की पाई जाती तो लाल चुनरी और लड़का तो दिखाते थे सफेद रूमाल
राजस्थान-हरियाणा टीम की संयुक्त कार्रवाई, जांच के एवज में लिए 40 हजार रुपए
नेटवर्क को चलाने के लिए डॉक्टर और गुर्गां के बीच बकायदा कोड वर्ड बना रखे थे। शनिवार को भी लिंग जांच के बाद कोड वर्ड का इस्तेमाल किया गया। लड़की होने पर लाल चुनरी दिखाते तो लड़का होने पर सफेद रुमाल।
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तीन से सात साल की सजा और जुर्माने का प्रावधान
पीसीपी एनडीटी परियोजना निदेशक जयपुर हरियाणा स्वास्थ्य विभाग की टीम ने जंक्शन स्थित बॉम्बे अल्ट्रासाउंड सेंटर पर भ्रूण लिंग की जांच के आरोप में डॉ.अमर सेतिया, कंपाउंउर कुलदीप सिंह दलाल रामकिशन कुम्हार को गिरफ्तार किया है। टीम ने अल्ट्रासाउंड मशीन भी सीज करके अपने कब्जे में ले ली है। डॉ.सेतिया महज एक सप्ताह पहले ही नसबंदी कैंपों में फर्जी भुगतान उठाने के मामले में जेल से छूटकर आए थे। उन्हें 12 अगस्त को गिरफ्तार किया गया था। पीसीपीएनडीटी परियोजना निदेशक एएसपी रघुवीरसिंह ने बताया कि सूचना मिली थी कि बाॅम्बे अल्ट्रासाउंड संचालक डॉ. अमर सेतिया दलाल के माध्यम से लिंग जांच कर रहा है। इसी आधार पर हरियाणा की टीम से संपर्क किया गया और एक महिला कांस्टेबल को ग्राहक बनाया गया। महिला कांस्टेबल ने दलाल रामकिशन से फोन पर संपर्क किया। मामला 40 हजार रुपए में तय हुआ। रामकिशन ने महिला कांस्टेबल को दोपहर को जंक्शन में बुलाया लेकिन वह शाम करीब पांच बजे आई। इसके बाद महिला कांस्टेबल को बंसल नर्सिंग होम के पास ले गया और वहां से कंपाउडर कुलदीपसिंह को साथ में लिया। फिर दोनों महिला को लेकर बॉम्बे अल्ट्रासाउंड गए। वहां पर डॉ. सेतिया ने महिला की जांच की। जांच के बाद महिला ने दलाल को 40 हजार रुपए दिए। फिर बाहर आकर टीम को इशारा कर दिया। टीम ने रंगे हाथों तीनों को पकड़ लिया और अल्ट्रासाउंड मशीन सीज कर दी। दलाल के कब्जे से 40 हजार रुपए भी बरामद हो गए। टीम में जयपुर क्राइम ब्रांच इंचार्ज विक्रम सेवावत, जंक्शन पुलिस थाना के कांस्टेबल नरेश, प्रदीप गिल, मनीष बिश्नोई राजाराम शामिल थे। लड़की पाई जाती तो लाल चुनरी और लड़का तो दिखाते थे सफेद रूमाल एडवोकेट रेशमसिंह ने बताया कि पीसीपीएनडीटी एक्ट के तहत लिंग जांच में दोषी पाए जाने पर तीन से सात साल की सजा और जुर्माना का प्रावधान है। इसके अलावा मेडिकल कौंसिल की ओर से डॉक्टर का रजिस्ट्रेशन निरस्त कर दिया जाता है। इसके बाद संबंधित डॉक्टर प्रेक्टिस नहीं कर सकता है। सिरसा (हरियाणा) की टीम के पीसीपीएनडीटी मामलों के विशेषज्ञ डॉ.विरेश भूषण के अनुसार लिंग जांच का यह नेटवर्क काफी बड़ा है। इसमें दलालों के रूप में कई कड़ियां होने का खुलासा हुआ है। इसमें कई अोर नाम सामने सकते हैं। फिलहाल जांच जारी है। हनुमानगढ़ की टीम पर भरोसा नहीं था, इसलिए जयपुर से बुलाया हरियाणा की टीम ने जिला मुख्यालय पर आठ माह बाद दूसरी बार डिकॉय अॉपरेशन के तहत कार्रवाई कर भ्रूण लिंग जांच करते डॉक्टर को पकड़ा है। इससे पहले 30 जनवरी को टाउन में डॉ. शोपत अल्ट्रासाऊंड सेंटर पर कार्रवाई की गई। शनिवार को हुई दूसरी कार्रवाई में बड़ी बात यह है कि हरियाणा की टीम ने हनुमानगढ़ स्वास्थ्य विभाग की टीम पर भरोसा नहीं जताया। इसके लिए जयपुर से पीसीपीएनडीटी टीम को इस कार्रवाई में अटैच किया गया। जनवरी में हुई कार्रवाई में हरियाणा की टीम को बराबर सहयोग नहीं मिला था। वहीं उस कार्रवाई में शामिल तत्कालीन एसीएमएचओ डॉ. योगेंद्र तनेजा पर प्रभावशाली लोगों ने दबाव बनाने की कोशिश की थी। इस बीच रात दो बजे तक पुलिस थाना में जब्त उपकरणों की सुरक्षा के साथ जयपुर पीसीपीएनडीटी थाना में पहुंचाने को लेकर ड्रामा हुआ था। इसके बाद बिना सुरक्षा के ही जब्त उपकरणों को जयपुर ले जाया गय था। इस पूरे घटनाक्रम के बाद एसीएमएचओ डॉ. तनेजा परेशान होकर लंबी छुट्टी पर चले गए थे। इस तरह से हरियाणा की टीम ने इस बार स्थानीय स्वास्थ्य विभाग पर भरोसा नहीं जताया और जयपुर की टीम को कार्रवाई में शामिल किया। आठ माह में दूसरी बड़ी कार्रवाई के बाद चिकित्सा एंव स्वास्थ्य विभाग के स्थानीय अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठने लगे हैं। तीन जनों को मिलेगा दो लाख का पुरस्कार इस कार्रवाई के लिए राज्य सरकार की ओर से मुखबिर योजना के तहत तीन जनों को दो लाख रुपए का पुरस्कार दिया जाएगा। इसमें सूचना देने वाले को 80 हजार रुपए, बोगस ग्राहक को 80 हजार रुपए और बोगस ग्राहक का पति बनकर गए व्यक्ति को 40 हजार रुपए का पुरस्कार दिया जाएगा। पीसीपी एनडीटी सेल की भूमिका पर उठे सवाल पड़ौसी राज्य की जिला स्तरीय पीसीपीएनडीटी सेल की भ्ूमिका पर सवालिया निशान लग गया है। खास बात है कि पीसीपीएनडीटी सेल की हर माह बैठक होती है और लिंग जांच रोकने के लिए चर्चा भी की जाती है लेकिन अभी तक सेल ने एक भी कार्रवाई नहीं की है। जबकि जिला मुख्यालय पर लिंग जांच का यह नेटवर्क काफी समय से चल रहा था। आठ माह में पड़ौसी राज्य की टीम की ओर से दूसरी बड़ी कार्रवाई से स्वास्थ्य विभाग के साथ पीसीपीएनडीटी सेल की भूमिका संदिग्ध मानी जा रही है।
काफी बड़ा है नेटवर्क : डॉ. विरेशभूषण आधे पैसे एजेंट रखते थे, डॉक्टर को दिए जाते थे 20 हजार रुपए भ्रूणलिंग जांच कराने वाले ग्राहक से एजेंट 35 से 40 रुपए वसूलते थे। इनमें से डॉक्टर को 15 से 20 हजार का भुगतान किया जाता जबकि शेष एजेंट रख लेते। ताजा मामले में भी यही सब हुआ। फर्जी बने ग्राहक से एजेंट ने फीस की राशि पहले ही ले ली। इस दौरान जांच करने के लिए हनुमानगढ़ बुलाया। सब दिखावे के पोस्टर बॉम्बे अल्ट्रासाउंड सेंटर पर भ्रूण लिंग जांच नहीं करने की घोषणा करते पोस्टर बड़ी संख्या में चिपके मिले लेकिन ये सब दिखावे के ही साबित हुए।
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