नोटबंदी के बाद कहां से आरम्भ हुआ भ्रष्टाचार/काला धन


1- बैंक: बैंक अधिकारियों कर्मचारियों (प्राइवेट बैंक विशेष रुप से) ने न केवल अपने बंद नोट बदले बल्कि कमीशन पर नोट बदले और इसी कारण आम जनता को अधिक परेशानी हुई। जनता को नोट स्टाक समाप्त बता कर एक साथ 50, 100 या अधिक आई डी रिकॉर्ड में चढ़ा कर असली मुद्रा चहेतों या खरीदारों को प्रतिदिन दी गई। दिल्ली में छापों में बैंक मैनेजरों के घर से मिली राशि प्रमाण है। हुआ ऐसा पूरे देश में है।
2- सरकारी कार्यालयों टेलीफोन, बिजली, रेलवे व अन्य विभाग जहां पुराने नोट लेने की छूट है, संबंधित कर्मचारियों अधिकारियों ने जम कर लाभ उठाया है।
3- पेट्रोल पम्प व गैस एजेंसी मालिकों ने अपना काला धन ही नहीँ खपाया बल्कि नया काला धन भी अर्जित किया है और कर रहे हैं।
4- राजकीय विद्यालयों में इतनी थोड़ी फीस होती है कि 500 का नोट दूर की बात है फिर भी बंद नोट की स्वीकृति उन शिक्षकों के लिए वरदान साबित होगी जो अध्यापन की बजाय सम्पति व्यवसाय में लगे थे और कऱोडों में काला धन लिए बैठे हैं।
5- ज्वैलर्ज ने 70000 प्रति 10 ग्राम सोना बेच कर काले धन को निकालने के प्रयास में ही सेंध नहीं लगाई बल्कि नया काला धन बनाया है।
6- पुलिस और आयकर विभाग के अधिकारियों ने कितने हाथ रँगे होंगे, कहा नहीं जा सकता।
7, कुछ और जहां तक मैं नहीं पहुंच पाया, आप बता कर विषय को आगे बढ़ाएं।
सुझाव::::::
1, पेट्रोल पंप , गैस एजेंसी, विद्यालय फीस में 500 के नोट का प्रचलन 30 नवंबर को बंद किया जाये।
2, सीआईडी के माध्यम से जानकारी एकत्रित करके कुछ और बैंक अधिकारियों पर छापे मारे जाएं और उनके लॉकर भी सील किये जायें।
3- व्यापारियों के अतिरिक्त कुछ राजनेताओं, टैक्स व बैंक अधिकारियों, आईएएस व आईपीएस अधिकारियों , निजी बड़े हस्पतालों आदि पर प्रतिदिन छापे मारे जायें।
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ये कैसा ज़लज़ला आया है दुनियाँ में इन दिनों,
झोंपडी मेरी खडी हैं और महल उनके डोल रहे हैं।।
परिंदों को तो रोज कहीं से गिरे हुए दाने जुटाने थे।
पर वे क्यों परेशान हैं जिनके घरों में भरे हुए तहखाने थे।।
रमेश गोयल 

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