नोटबंदी और जीएसटी के बाद आपके घर में घुसने को तैयार सरकार
आप समय कहां बिताते हैं, इसका हिसाब मागेंगी सरकार, आपके घरों में दस्तक देंगे सर्वे कर्मचारी, सब जानकारी लेेंगे
नरेश अरोड़ा की विशेष रिपोर्टभाजपा यानि मोदी सरकार ने पहले नोटबंदी की घोषणा कर सभी देश वासियों को आश्चर्यचकित कर दिया और उसके बाद जीएसटी लागू कर व्यापारियों पर कुठाराघात कर दिया। अब जब नोटबंदी और जीएसटी से आमजन धीरे-धीर उभरने लगा है तो अब आमजन के मन में यह सवाल हिलोरे ले रहा है कि अब मोदी सरकार का जनता के लिए नया फरमान क्या होगा। आईए जनता जनार्दन हम आपको बता देते हैं मोदी सरकार का जनता के लिए अब नया क्या फरमान होगा। अब मोदी का सरकार का नया फरमान यह है कि अब सरकार आपके घर में घुसकर आपसे यह जानना चाहेगी कि आप अपने समय का उपयोग कैसे करते हैं? यानि नौकरी अथवा व्यापार को कितना समय देते हैं, बच्चों के साथ कितने समय तक रहते हैं। इसके अतिरिक्त नहाने धोने में कितना समय लगाते हैं, यानि वह सब कुछ जो आपकी दिनचयर्या में शामिल है। कुल मिलाकर पहले तो सरकार ने आप पर आर्थिकता व व्यापार पर कुठाराधात किया किया और अब आपके घरों में घुसने को तैयार है। आपके समय का भी लेखा जोखा सरकार अपने पास रखने की तैयारी कर रही है। मतलब आपके समय का हिसाब-किताब भी सरकार ही अब रखेगी।
बता दें कि अमेरिका और ब्रिटेन की तर्ज पर देश में पहली बार ‘टाइम यूज सर्वे’ करने की तैयारी कर रही है। इसमें लोगों से पूछा जाएगा कि वे अपने समय का उपयोग किस तरह करते हैं। सूत्रों ने कहा है कि नीति आयोग के उपाध्यक्ष अरंविंद पानगढिय़ा की अध्यक्षता वाली एक उच्च स्तरीय टास्क फोर्स ने सरकार से यह सर्वे कराने की सिफारिश की है। उन्होंने यह सिफारिश प्रधानमंत्री कार्यालय को दिए एक पे्रजेंटेशन में की है। बताया जाता है कि प्रधानमंत्री कार्यालय को यह सिफारिश पसंद आई है और जल्द ही इस दिशा में कदम उठाया जाएगा।
उल्लेखनीय है कि इसी तरह का सर्वेक्षण अमेरिका व ब्रिटेन में होता है। ब्रिटेन में वर्ष 2000-01 और 20014-15 में इस तरह का सर्वेक्षण किया गया। इसमें लोगों से पूछा गया था कि उन्होंने विभिन्न गतिविधियों पर कितना समय समय खर्च किया। अमेरिका में भी इसी तरह का सर्वेक्षण होता है जिससे लोगों से पूछा जाता है कि वे दिनभर के समय का इस्तेमाल कैसे करते हैं। इस सर्वे से पता चलता है कि नौकरी या रोजगार पर लोग कितना समय व्यतीत करते हैं जबकि घरेलू कार्यों को जैसे बच्चों की देखभाल पर कितना समय लगाते हैं। अमेरिका में यह सर्वे 2003 से किया जा रहा है। वहां पर यह सर्वेक्षण बीएलएस यानि ब्यरो ऑफ लेबर स्टेटिस्टिक्स कराता है। बीएलएस के लिए यह सर्वेक्षण सलाना होता है, लेकिन इसके कुछ आंकड़े भी उपलब्ध होते हैं। सूत्रों ने कहा है कि भारत में ‘टाइम यूज सर्वे’ नैशनल सैंपल सर्वे आर्गनाइजेशन (एनएसएसओ) करेगा। एनएसएसओ फिलहाल परिवारिक परिवारिक सर्वेक्षण करता है। रोजगार और परिवारिक व्यय के संबंध में भी आंकड़े जुटाने के लिए एनएसएसओ ही सर्वे करता है। एनएसएसओ के आंकड़ों के आधार पर ही सरकार अब तक गरीबी रेखा भी तय करती रही है। पनगढिय़ा की अध्यक्षता वाली जिस टास्क फोर्स ने यह सवेक्षण कराने की सिफारिश की है, सरकार ने उसका गठन रोजगार के आंकड़ें जुटाने की उपयुक्त विधि सुझाने को किया था। अब सरकार यह दावा कर रही है कि इसके सर्वेक्षण लोगों की दिनचर्या का पता चलेगा। अब यह सर्वे कंपनियों को फायदा पहुंचाने के इलावा कुछ नही है।
अंत में हम तो यही कहेंगे कि, लम्हों ने खता की थी,सदियों ने सजा पाई....।
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