शहरों की दशा को सुधारने के लिए खट्टर सरकार को लेने होंगे अहम निर्णय, करके दिखाना होगा विकास
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डबवाली-
गुजरात व हिमाचल प्रदेश के चुनाव नतीजे बेशक चौकाने वाले आए हों लेकिन इन नतीजों ने हरियाणा की मनोहर लाल खट्टर की सरकार को रफ्तार पकडऩे को मजबूर कर दिया है। अब तक खट्टर सरकार धीमी गति से ही रास्ता तय कर रही थी लेकिन गुजरात के चुनाव नतीजों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि जनता को अब क्या चाहिए? उसे ईमानदार सरकार के साथ विकास करने वाली सरकार भी चाहिए। चुनाव नतीजों ने यह भी जाहिर कर दिया है कि जनता भाजपा और मोदी को चाहती है लेकिन वोट प्रदेश सरकार की कारगुजारी को देखकर ही दिए जाएंगे।
भले ही गुजरात के चुनाव नतीजों ने यह जाहिर कर दिया कि गुजरात भाजपा का अभेद दुर्ग बन गया है और वहां पर लगातार छटी बार भाजपा ने सत्ता पाई है। लेकिन जनता ने यह भी जाहिर कर दिया है कि उन्हें विकास चाहिए? विकास होता है भी तो दिखाई देना चाहिए। इस मामले में हरियाणा में विकास की गति रफ्तार नहीं पकड़ पाई है। हालाकिं पूर्ववर्ती सरकारों की भांति भ्रष्टाचार का कोई मामला सामने नही आया। सीएम खट्टर बेदाग छवि के रहे हैं लेकिन उनके नेतृत्व में प्रदेशवासियों को जो विकास की रफ्तार पकडऩे की उम्मीद जगी थी, उस उम्मीद पर जनता नाउम्मीद हुई है।
प्रदेश में भाजपा सरकार को तीन वर्ष से अधिक का समय बीत चुका है। आने वाले वर्षों में लोकसभा और फिर विधानसभा के चुनाव होने हैं। फिलहाल प्रदेश में कोई चुनावी मुद्दा नही है। विपक्ष हाशिए पर है। इसके बावजूद पब्लिक विकास के मामले में सरकार से रफ्तार चाहती है। आने वाले चुनावों के दृष्टिगत यह तय है कि विकास ही भाजपा को जीत की ओर ले जा सकता है। इसके लिए तेजी से और कड़े फैंसले लेने होंगे और जनहितों को सर्वोपरि रखना होगा।
भ्रष्टाचार व भ्रष्टाचारियों पर कसना होगा शिकंजा
खट्टर सरकार को पब्लिक का विश्वास जीतने के लिए भ्रष्टाचार के मामलों में चोट करनी होगी। प्रदेश में भ्रष्टाचार के हजारों मामले लंबिंत हैं। पूर्ववर्ती सरकारों के समय अधिकारियों ने जमकर सरकारी खजाने को लूटने का काम किया। ऐसे अधिकारियों के खिलाफ जांच हुई, कार्रवाही की अनुशंसा हुई। लेकिन वर्षों बाद भी कार्रवाही अमल में नहीं लाई गई। हजारों मामलों की फाइलें अटकी हुई है। पूर्ववर्ती सरकारों के समय किए गए घपले-घोटालों पर भाजपा सरकार में भी कार्रवाही न होने से जनता का विश्वास टूटता है। मुख्यमंत्री के ही महकमों में ही भ्रष्टाचार से संबंधित हजारों फाइलें लंबित हैं। ऐसे में खट्टर सरकार का एक्शन वाली सरकार साबित करना होगा। भ्रष्टाचारा पर करारी चोट करनी होगी। भ्रष्टाचारियों को सलाखों के पीछे भेजना होगा,तभी खट्टर सरकार जनता का विश्वास जीत पाएगी।
जांच की आंच छूने नहीं पाई,खुले घूम रहे भ्रष्टाचारी
सिरसा जिला के अन्य शहरों के सरकारी विभागों में यदि छोडक़र केवल डबवाली की बात करें तो हैरानी करने वाले अनेक तथ्य उभरकर सामने आते हैं। इस छोटे से शहर में भ्रष्टाचारियों ने किस कद्र लूट कर अपनी जेबे भरी है उसका पूरा अनुमान तक लगा पाना मुश्किल हो गया है। विद्युत विभाग के अधिकारियों व कर्मचारियों ने बड़ा कोपर घोटाला किया और तांबे की करोड़ों रूपये की तार तक डकार गए विलिलेंस ने जांच की लेकिन नतीजा शून्य। फिर जांच हुई लेकिन साबित हो जाने के बाद भी अभी तक जांच दर जांच की ही बात कही जा रही है। इसके अतिरिक्त सब्जी मंडी के डिवाइडर को तोडक़र उसका मलवा तक गायब करने वाले दोषियों का अभी तक कोई पता नहीं चल पाया और दोषी खुली हवा में सांस ले रहे है। यही नहीं पिछले प्लान में नगर परिषद के विभिन्न कार्यों में जमकर भ्रष्टाचार हुआ लेकिन भ्रष्टाचारियों पर कोई कार्रवाही नहीं हुई।
डेढ़ साल बाकी कैसे पूरे होंगे प्रोजेक्ट
प्रदेश की भाजपा सरकार का तीन साल का कार्यकाल पूरा हो चुका है। अब सरकार के पास विकास कार्यों के लिए सिर्फ डेढ साल का समय बाकी है, क्योंकि कार्यकाल खत्म होने से 6 माह पहले सरकार चुनाव की तैयािरयों में व्यस्त हो जाएगी। जबकि अब तक भाजपा विधायक एवं खास कार्यकर्ता अधिकारियों पर सही ढंग से काम करने के आरोप लगाते रहे हैं।
170 घोषणाओं में से एक भी योजना पर काम नहीं हुआ
डबवाली । मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर द्वारा प्रदेश में जितनी भी घोषणाएं की गई उनमें से अधिकतर तो इन तीन सालों में एक भी योजना पर काम शुरू नहीं हुआ या जिन योजनाओं पर काम शुरू हुआ वह पूर्णत: तक नहीं पहुंच पाई और अधर में ही लटकी है। प्रदेश के अन्य जिलों को छोड़ दिया जाए और केवल सिरसा जिला की बात करें तो जो अधिकारिक तथ्य उभरकर सामने आए हैं वो चुकाने वाले हैं। सिरसा जिला की पांच विधानसभा सीटों के लिए मुख्यमंत्री ने इन तीन वर्षों में कुल 170 घोषणाएं की लेकिन आश्चर्य की बात यह है कि इन 170 घोषणाओं में से एक भी योजना पूरी नहीं हो पाई। हां यह बात जरूर है कि उक्त घोषणाओं में से 55 योजनाओं पर तो काम शुरू ही नहीं हुआ। इसके अतिरिक्त 110 पर काम शुरू हुआ लेकिन पूर्णत: की ओर एक भी योजना नहीं बढ़ पाई। डबवाली दौरे के दौरान मुख्यमंत्री ने जो घोषणाएं की गई थी उन योजनाओं को लेकर नगर परिषद द्वारा आम बैठकों में एजेंडें तो अनेक बार रखे गए लेकिन किसी भी योजना पर आज तक कोई काम शुरू नहीं हो पाया। ऐसे में मुख्यमंत्री द्वारा की घोषणाओं को कैसे और कब पूरा किया जाएगा। इसका किसी के पास कोई जवाब तक नहीं है।
सीएम के दावे कितने सच्चे,कितने झूठे
डबवाली। सीएम मनोहर लाल खट्टर अपनी सरकार के तीन साल के कार्यकाल में प्रदेशभर में 3600 से ज्यादा घोषणाएं कर चुके हैं। सीएम का दावा है कि इनमें से 2700 पूरी हो चुकी हैं। बाकी पर काम चल रहा है, जो जल्द पूरी हो जाएंगी। लेकिन जब प्रदेश के आधे यानि 12 जिलों की रियलिटी चेक की गई तो चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए। सीएम ने 12 जिलों में 2192 छोटी-बड़ी घोषणाएं की हैं, जिनमें से सिर्फ 324 ही पूरी तरह कंप्लीट हो चुकी हैं, जबकि 1868 घोषणाएं किसी किसी वजह से लटकी हुई हैं। इनमें कई घोषणाएं वे हैं, जिनकी फिजिबिल्टी देखे बिना ही स्थानीय नेता के कहने पर सीएम ने घोषणा कर दी।
प्रदेश भर में की थी 3600 घोषणाएं
सीएम ने प्रदेश भर में अपने 3 साल के कार्यकाल में 3600 से ज्यादा घोषणाएं की हैं। जब ‘डबवाली’ दर्पण के संवाददाता ने रियलिटी चेक की तो पता चला कि 12जिलों में 2192घोषणाओंमें से324पूरी हुईं, जबकि 1868 घोषणाएं किसी न किसी वजह से लटकी हुई हैं जिनका पूर्ण होना असंभव सा जान पड़ता है।
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