सरकारी सुविधाओं से दूर एक स्कूल ,खेल परिसर में बच्चों को पढ़ाने को मजबूर शिक्षक
गरीब परिवारों को के बच्चों की संख्या अधिक
#dabwalinews.com-हरियाणा सरकार शिक्षा के क्षेत्र में बेहतर सुविधाएं देने व गरीब बच्चों के नि:शुल्क देने के कितने भी दावे क्यों न करें। लेकिन यह दावे धरातल पर दम तोड़ते दिखाई पड़ते हैं। विशेषकर प्राथमिक पाठशालाओं की हालत और भी अधिक चिंताजनक है। पहले तो कोई सुविधाएं स्कूली बच्चों तक पहुंचती ही नहीं यदि पहुंचती भी है तो बहुत देर से पहुंचती है। इसके प्रति न सरकार गंभीर दिखाई देती है और न ही शिक्षा विभाग। दोष किसे दिए जाए क्योंकि सरकारी सिस्टम ही कुछ ऐसा ही है। डबवाली शहर का एक सरकारी स्कूल ऐसा भी है जिसके पास न तो कोई इमारत है और न ही को स्थाई ठिकाना। सबसे बड़ी बात तो यह है कि इस स्कूल में अधिकतर बच्चे मलीन बस्तियों के ही शिक्षा के लिए आते हैं।
सरकार चाहे कांग्रेस की रही हो या फिर भाजपा अथवा अन्य किसी राजनीतिक दल की प्राथमिक स्कूलों की हालत में कभी सुधार हो ही नहीं पाया। डबवाली के चौहान नगर में स्थित एक संकरें और जर्जर हो चुके भवन एक प्राथमिक पाठशाला चलाई जा रही थी,इमारत की दयनीय हालत को देखते हुए सितम्बर 2017 में इसे काफी पेशोपश व राजनीतिज्ञों सहित सामाजिक संस्थाओं के सदस्यों दबाव के बाद इसे सिरसा रोड पर स्थित श्री गुरू गोबिंद सिंह खेल परिसर में स्थानातंरित कर दिया गया। तब से लेकर खेल परिसर में बच्चों को शिक्षित करने का काम किया जा रहा है।
इस स्कूल में हर्ष नगर, धालीवाल नगर व चौहान नगर सहित अन्य बस्तियों के लगभग 163 बच्चे प्रतिदिन शिक्षा के लिए आ रहे हैं। इन 163 बच्चों पर सात शिक्षकों का स्टाफ है जो अपने स्तर पर ही इस खेल परिसर में सुविधाएं जुटाकर बच्चों को कड़ी मेहनत के बल पर शिक्षित करने का प्रयास कर रहे हैं। शिक्षकों के यह प्रयास सार्थक भी साबित हो रहे हैं लेकिन सरकार उदासीनता के चलते प्रयाप्त मात्रा में सुविधाएं नहीं मिल पा रही। इसका जिम्मेवार कौन है इस पर आमजन को भी विचार करने की आवश्यकता है।
इमारत के लिए भूमि होना जरूरी
मलीन बस्तियों के नन्हें, गरीब घरों के बच्चो को शिक्षित करने का बीड़ा उठाने वाले इसी स्कूल के शिक्षक बलबीर सिंह बिश्रोई बताते हैं कि चौहान नगर की जर्जर इमारत से खेल परिसर में शिफ्ट कर दिया गया है। बहुत सी बस्तियों में जाकर बच्चों के अभिभावकों को उन्हें स्कूल भेजने के लिए पे्ररित किया। अब इन बस्तियों के बच्चे जहां स्कूल में आने लगे हैं वही चंद माह में बच्चे शिक्षा के प्रति इतने अधिक लालायित हो गए हैं कि बेहतर परिणाम देने लगे हैं। बलबीर सिंह कहते हैं कि स्कूल की स्थाई इमारत न होने के कारण भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि विभाग बिल्डिंग बनाने के लिए फंड देने को तैयार है लेकिन भूमि का जुगाड़ खुद करना होगा। अब ऐसे में वह किस तरह और कहां से भूमि का इंतजाम करें कि स्कूल के लिए भवन का निर्माण करवाया जा सके। उन्होंने बताया कि इसके लिए वह प्रयास कर रहे है और जल्द ही भूमि का इंतजाम होने की आशा है।
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