कहने को घर हैं लेकिन हैं गोदाम
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डबवाली।
यहां हर व्यक्ति अपनी मर्जी का मालिक हो चला है। किसी को न कोई परवाह नहीं न नियमों की जानकारी ली जाती है न कानूनी कार्रवाही का किसी को भय है। जिसका जैसा दिल चाहता वह उसी प्रकार अपने कार्य को अंजाम दे डालता है। इसका मुख्य कारण है संबंधित विभागों में बैठे अधिकारियों व कर्मचारियों की घोर लापरवाही और काम न करने की आदत। यदि करना भी चाहे तो उस काम के बदले मेें नजराना वसूलकर अनदेखा कर देना आम बात है।
नगर परिषद के वार्ड चार के आवासीय क्षेत्र में पिछले लंबे अरसे से कमर्शियल गतिविधियां चल रही हैं। बाहर से रिहायशी मकान व कोठियां नजर आने वाली इमारतों को गोदामों का स्वरूप दे दिया गया है। यहां दिन में ही नहीं बल्कि रात के समय में भी ट्रकों सहित अन्य भारी वाहनों का आवागमन रहने के साथ-साथ इन आवासीय इमारतों में ट्रक और अन्य वाहन माल भीतर-बाहर करते देखे जा सकते हैें। रिहायशी इलाकों में कमर्शियल गतिविधियां संचालिक करने पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध होने के बावजूद भी कानून की जमकर धज्जियां उड़ाई जा रही है। यहां के लोगों द्वारा अनेक बार नगर परिषद से लेकर प्रशासनिक अधिकारियों तक को शिकायत करने के बावजूद भी कोठियों और मकानों को गोदामों का स्वरूप देने वालों पर किसी तरह की कोई कार्रवाही अमल में नहीं लाया जा रहा,जिसके चलते यहां के लोगों में असंतोष की भावना तो उत्पन्न हो ही रही है वहंी भारी वाहनों की आवाजाही के कारण यहां के लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। यहां के निवासी अवतार सिंह बराड़, मुकेश कुमार, बाबू राम, छज्जू राम, ध्रमेन्द्र, बंटी, रमेश कुमार, अजीत सिंह व नजायब सिंह ने बताया कि हर समय भारी वाहनों के यहां से गुजरने से दुघर्टना होने की आंशका बनी रहती है। उन्होंने बताया कि अनेक बार लिखित व मौखिक रूप से शिकायत करने के बावजूद भी आज तक इस कार्य पर अंकुश लगाने के लिए कोई कदम नहीं उठाया जा रहा।
डबवाली।
नगर परिषद के वार्ड चार के आवासीय क्षेत्र में पिछले लंबे अरसे से कमर्शियल गतिविधियां चल रही हैं। बाहर से रिहायशी मकान व कोठियां नजर आने वाली इमारतों को गोदामों का स्वरूप दे दिया गया है। यहां दिन में ही नहीं बल्कि रात के समय में भी ट्रकों सहित अन्य भारी वाहनों का आवागमन रहने के साथ-साथ इन आवासीय इमारतों में ट्रक और अन्य वाहन माल भीतर-बाहर करते देखे जा सकते हैें। रिहायशी इलाकों में कमर्शियल गतिविधियां संचालिक करने पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध होने के बावजूद भी कानून की जमकर धज्जियां उड़ाई जा रही है। यहां के लोगों द्वारा अनेक बार नगर परिषद से लेकर प्रशासनिक अधिकारियों तक को शिकायत करने के बावजूद भी कोठियों और मकानों को गोदामों का स्वरूप देने वालों पर किसी तरह की कोई कार्रवाही अमल में नहीं लाया जा रहा,जिसके चलते यहां के लोगों में असंतोष की भावना तो उत्पन्न हो ही रही है वहंी भारी वाहनों की आवाजाही के कारण यहां के लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। यहां के निवासी अवतार सिंह बराड़, मुकेश कुमार, बाबू राम, छज्जू राम, ध्रमेन्द्र, बंटी, रमेश कुमार, अजीत सिंह व नजायब सिंह ने बताया कि हर समय भारी वाहनों के यहां से गुजरने से दुघर्टना होने की आंशका बनी रहती है। उन्होंने बताया कि अनेक बार लिखित व मौखिक रूप से शिकायत करने के बावजूद भी आज तक इस कार्य पर अंकुश लगाने के लिए कोई कदम नहीं उठाया जा रहा।
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