आर्य समाज द्वारा आयोजित वार्षिक वेद प्रचार उत्सव का द्वितीय दिवस : ‘‘डूबतों को बचा लेने वाले, मेरी नईया है तेरे हवाले...’’
डबवाली।
नगर की प्रसिद्ध सामाजिक संस्था आर्य समाज डबवाली द्वारा आयोजित चार दिवसीय वार्षिक वेद प्रचार उत्सव के दूसरे दिवस पारिवारिक श्रृंखला का कार्यक्रम वार्ड नं. 4 स्थित आर्य समाज महाशा धर्मशाला सोसायटी के प्रांगण में हवन यज्ञ आर्य समाज के प्रचार प्रमुख विजय कुमार शास्त्री के सानिध्य में संपन्न हुआ। जिसमें सोसायटी सदस्यों राजन-रजनी सुंधा, जगसीर आर्य-प्रेम कौर, गुरविंद्र तरगोत्रा सहित आर्य समाज के पदाधिकारियों ने यज्ञ में आहुतियां डाली। तदोपरांत आर्ष विदुषी, विख्यात भजनोपदेशिका व धर्मोदेशिका कुमारी अंजलि आर्य ने अपनी मधुर वाणी से यज्ञ प्रार्थना ‘‘परमपूज्य प्रभु हमारे भाव उज्ज्वल कीजिए, छोड़ देवें छल कपट को मानसिक बल दीजिए’’ प्रस्तुत कर उपस्थित श्रद्धालुओं को भाव-विभौर कर दिया।
परमपिता परमात्मा के गुणों का सरल भाषा में मनुष्य के साथ जोड़ते हुए ‘‘डूबतों को बचा लेने वाले, मेरी नईया है तेरे हवाले...बोलो ओ३म्-2’’ प्रस्तुत कर श्रद्धालुओं को झूमने पर मजबूर कर दिया। कुमारी अंजलि आर्य ने अपने मुखारविंद से वैदिक प्रवचनों की वर्षा करते हुए कहा कि परमपिता परमात्मा ने हमें मनुष्य बनाकर धरती पर भेजा, लेकिन मनुष्यों ने अपनी मानसिकता के चलते ऊंच-नीच, छोटा-बड़ा बना लिया। उन्होंने महाभारत का प्रसंग सुनाते हुए कहा कि दुर्योधन राजकुल में उत्पन्न हुआ, लेकिन अपने निकृष्ट कर्मों के चलते उसे कोई प्रसंद नहीं करता और योगीराज श्री कृष्ण, धर्मराज युधिष्टर, अर्जुन, भीम आदि का नाम लेकर गौरवांवित होते हैं और उनके पदचिन्हों पर चलने के लिए प्रेरित करते हैं। उन्होंने कहा कि आज मैं आर्य समाज महाशा धर्मशाला के प्रांगण में बैठी हूं और अपने आप को धन्य समझती हूं कि जिन लोगों को महर्षि दयानंद सरस्वती, स्वामी श्रद्धानंद जैसी हुतात्माओं ने शुद्धि सम्मेलन चलाकर मुख्यधारा के साथ जोड़ा था। उन्होंने कहा कि महाश्य शब्द में ही गौरव की झलक है। उन्होंने कहा कि ‘म’ से महान और ‘श’ से शरण होता है और आज सभी परमात्मा की शरण में हैं। उन्होंने देश भक्ति से ओत-प्रोत गीतों से वातावरण को देशभक्ति के रंग में रंग दिया। उन्होंने कहा कि महर्षि दयानंद सरस्वती ने सामाजिक बुराइयों को दूर करने व करवाने में अपनी अहम् भूमिका निभाई, जिसे आर्य समाज ने आगे बढ़ाने का कार्य किया। इस दौरान गांव रिसालिया खेड़ा से पहुंचे अमीं लाल रिसालिया व गौसेवा आयोग के उपाध्यक्ष पतराम जी ने महर्षि दयानंद सरस्वती जी द्वारा रचित पुस्तक गौ-करूणनिधि की चर्चा करते हुए गौसेवा व गाय की सुरक्षा के लिए प्रेरित किया। तत्पश्चात् सोसायटी की ओर से कुमारी अंजलि आर्य, तबले पर संगत कर रहे भाई हरीश जी को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया। इस मौके पर आर्य समाज के अध्यक्ष एसके दुआ, महामंत्री सुदेश आर्य ने मंच संचालन निभाया। आर्य समाज महाशा धर्मशाला के अध्यक्ष सुखदयाल ने आए हुए सभी अतिथियों का आभार जताया। इस मौके पर दोनों संस्थाओं के पदाधिकारी व कार्यकारिणी सदस्यों सहित काफी संख्या में महिला, पुरूष व बच्चें मौजूद थे। शांति पाठ के पश्चात् ऋषि लंगर वरताया गया।
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वार्षिक वेद प्रचार उत्सव के प्रथम दिवस रात्रिकालीन सत्र का कार्यक्रम आर्य समाज मंदिर में स्थित वैदिक सत्संग हाल में आयोजित हुआ। जिसमें कुमारी अंजली आर्या के सारगर्भित प्रवचन व अर्थपूर्ण भजनों ने समां बांध दिया।
नगर की प्रसिद्ध सामाजिक संस्था आर्य समाज डबवाली द्वारा आयोजित चार दिवसीय वार्षिक वेद प्रचार उत्सव के दूसरे दिवस पारिवारिक श्रृंखला का कार्यक्रम वार्ड नं. 4 स्थित आर्य समाज महाशा धर्मशाला सोसायटी के प्रांगण में हवन यज्ञ आर्य समाज के प्रचार प्रमुख विजय कुमार शास्त्री के सानिध्य में संपन्न हुआ। जिसमें सोसायटी सदस्यों राजन-रजनी सुंधा, जगसीर आर्य-प्रेम कौर, गुरविंद्र तरगोत्रा सहित आर्य समाज के पदाधिकारियों ने यज्ञ में आहुतियां डाली। तदोपरांत आर्ष विदुषी, विख्यात भजनोपदेशिका व धर्मोदेशिका कुमारी अंजलि आर्य ने अपनी मधुर वाणी से यज्ञ प्रार्थना ‘‘परमपूज्य प्रभु हमारे भाव उज्ज्वल कीजिए, छोड़ देवें छल कपट को मानसिक बल दीजिए’’ प्रस्तुत कर उपस्थित श्रद्धालुओं को भाव-विभौर कर दिया।
परमपिता परमात्मा के गुणों का सरल भाषा में मनुष्य के साथ जोड़ते हुए ‘‘डूबतों को बचा लेने वाले, मेरी नईया है तेरे हवाले...बोलो ओ३म्-2’’ प्रस्तुत कर श्रद्धालुओं को झूमने पर मजबूर कर दिया। कुमारी अंजलि आर्य ने अपने मुखारविंद से वैदिक प्रवचनों की वर्षा करते हुए कहा कि परमपिता परमात्मा ने हमें मनुष्य बनाकर धरती पर भेजा, लेकिन मनुष्यों ने अपनी मानसिकता के चलते ऊंच-नीच, छोटा-बड़ा बना लिया। उन्होंने महाभारत का प्रसंग सुनाते हुए कहा कि दुर्योधन राजकुल में उत्पन्न हुआ, लेकिन अपने निकृष्ट कर्मों के चलते उसे कोई प्रसंद नहीं करता और योगीराज श्री कृष्ण, धर्मराज युधिष्टर, अर्जुन, भीम आदि का नाम लेकर गौरवांवित होते हैं और उनके पदचिन्हों पर चलने के लिए प्रेरित करते हैं। उन्होंने कहा कि आज मैं आर्य समाज महाशा धर्मशाला के प्रांगण में बैठी हूं और अपने आप को धन्य समझती हूं कि जिन लोगों को महर्षि दयानंद सरस्वती, स्वामी श्रद्धानंद जैसी हुतात्माओं ने शुद्धि सम्मेलन चलाकर मुख्यधारा के साथ जोड़ा था। उन्होंने कहा कि महाश्य शब्द में ही गौरव की झलक है। उन्होंने कहा कि ‘म’ से महान और ‘श’ से शरण होता है और आज सभी परमात्मा की शरण में हैं। उन्होंने देश भक्ति से ओत-प्रोत गीतों से वातावरण को देशभक्ति के रंग में रंग दिया। उन्होंने कहा कि महर्षि दयानंद सरस्वती ने सामाजिक बुराइयों को दूर करने व करवाने में अपनी अहम् भूमिका निभाई, जिसे आर्य समाज ने आगे बढ़ाने का कार्य किया। इस दौरान गांव रिसालिया खेड़ा से पहुंचे अमीं लाल रिसालिया व गौसेवा आयोग के उपाध्यक्ष पतराम जी ने महर्षि दयानंद सरस्वती जी द्वारा रचित पुस्तक गौ-करूणनिधि की चर्चा करते हुए गौसेवा व गाय की सुरक्षा के लिए प्रेरित किया। तत्पश्चात् सोसायटी की ओर से कुमारी अंजलि आर्य, तबले पर संगत कर रहे भाई हरीश जी को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया। इस मौके पर आर्य समाज के अध्यक्ष एसके दुआ, महामंत्री सुदेश आर्य ने मंच संचालन निभाया। आर्य समाज महाशा धर्मशाला के अध्यक्ष सुखदयाल ने आए हुए सभी अतिथियों का आभार जताया। इस मौके पर दोनों संस्थाओं के पदाधिकारी व कार्यकारिणी सदस्यों सहित काफी संख्या में महिला, पुरूष व बच्चें मौजूद थे। शांति पाठ के पश्चात् ऋषि लंगर वरताया गया।
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वार्षिक वेद प्रचार उत्सव के प्रथम दिवस रात्रिकालीन सत्र का कार्यक्रम आर्य समाज मंदिर में स्थित वैदिक सत्संग हाल में आयोजित हुआ। जिसमें कुमारी अंजली आर्या के सारगर्भित प्रवचन व अर्थपूर्ण भजनों ने समां बांध दिया।
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