हरियाणा में 40% मतदाता ट्विटर-फेसबुक पर सक्रिय,सोशल मीडिया साबित होगा गेम चेंजर



सोशल मीडिया साबित होगा गेम चेंजर
लोकसभा चुनाव में सोशल मीडिया गेम चेंजर की भूमिका निभा सकता है। मुख्यमंत्री मनोहर लाल से लेकर मंत्रियों अनिल विज, कैप्टन अभिमन्यु और मनीष ग्रोवर, सांसद दुष्यंत चौटाला और दीपेंद्र सिंह हुड्डा, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा, अभय चौटाला, रणदीप सुरजेवाला, किरण चौधरी, कुलदीप बिश्नोई सहित कई दिग्गज सोशल मीडिया पर निरंतर सक्रिय हैं।
 लोकसभा चुनाव में सोशल मीडिया खासा रंग दिखाएगा। हरियाणा में 40 फीसदी मतदाता व्हाट्सएप (Whatsapp), ट्विटर (Twitter) और फेसबुक (Facebook) पर सक्रिय हैं जिनकी चुनावों में अहम भूमिका होगी। चुनावी गणित में इस तबके पर निगाह जमाए सियासी दलों ने भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म बनाते हुए चुनाव प्रचार छेड़ दिया है।
90 लाख वोटरों के पास स्मार्टफोन
पिछले साल पांच नगर निगमों और फिर जींद उपचुनाव में सोशल मीडिया अपनी अहमियत दिखा चुका है। मौजूदा हाईटेक दौर में मतदाताओं को लुभाने के लिए सोशल मीडिया एक मजबूत धरातल के रूप में उभरा है। प्रदेश का राजनीतिक परिदृश्य बताता है कि सोशल मीडिया संसदीय चुनावों में अहम भूमिका निभा सकता है, क्योंकि कुल एक करोड़ 74 लाख मतदाताओं में से लगभग 90 लाख वोटर स्मार्ट फोन का इस्तेमाल करते हैं।

सोशल मीडिया पर सक्रिय वोटरों को रिझाने के लिए सियासी दलों ने आइटी सेल गठित कर विशेषज्ञों की ड्यूटी लगाई है। सत्तारूढ़ भाजपा से लेकर विपक्षी कांग्रेस, इनेलो, आम आदमी पार्टी और जननायक जनता पार्टी सहित लगभग सभी दलों के नेता और समर्थक सोशल मीडिया के जरिये मतदाताओं तक अपनी राजनीतिक विचारधारा पहुंचा रहे हैैं। राजनीतिक दलों की कमजोरियां उजागर करने और आलोचना के लिए भी सोशल मीडिया कारगर हथियार साबित हो रहा है।

एक सर्वेक्षण रिपोर्ट बताती है कि सभी मोबाइल उपयोगकर्ताओं के बीच हर तीसरा व्यक्ति मोबाइल पर इंटरनेट का उपयोग करता है। युवा इसका बहुत बड़ा हिस्सा हैं। लगभग 40 लाख मतदाता 18-29 वर्ष की आयु वर्ग के अंतर्गत आते हैं, जबकि 18-39 आयु वर्ग में लगभग 81 लाख मतदाता शामिल हैं। इस आयु वर्ग में कुल 70 फीसद मतदाता इंटरनेट का उपयोग करते हैं।

राजनीतिक दलों ने बनाए सोशल मीडिया सेल
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की अहमियत को समझते हुए भाजपा, कांग्रेस और इनेलो सहित अन्य दलों ने सोशल मीडिया सेल का गठन किया है। सोशल मीडिया पर चुनाव प्रचार के लिए बाकायदा पदाधिकारियों को नियुक्त किया गया है।

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