कांग्रेस समर्थित पार्षदों का बड़ा बयान प्रदेश में भाजपा सरकार आते ही डबवाली के बुरे दिन शुरु हो गए थे



मंडी डबवाली।
कांग्रेस समर्थित पार्षद विनोद बांसल, रविंद्र बिंदु तथा रमेश बागड़ी ने संयुक्त बयान जारी करते हुए कहा कि प्रदेश में भाजपा सरकार आते ही डबवाली के बुरे दिन शुरु हो गए थे। उस समय नप पर प्रशासक राज था, एक ही झटके में साढ़े 3 करोड़ रुपये के टेंडर रद करके सरकार ने विकास कार्यों में रुकावट की नींव रख दी थी।

पार्षदों के अनुसार 22 मई 2016 को नगरपरिषद चुनाव हुए। अगस्त 2016 में हाऊस की पहली बैठक हुई। अब तक 14 बैठकें हो चुकी हैं। जिसमें विकास कार्यों के 85 प्रस्ताव पारित किए गए हैं। खास बात यह कि 10 बैठकों को मंजूरी मिली है। 3 बैठकों को रद कर दिया गया। जबकि एक बैठक का अनुमोदन आना शेष है। सरकार इतनी मेहरबान है कि किसी अधिकारी को डबवाली में टिकने नहीं देती। रिकॉर्ड के अनुसार इस सरकार में अधिकतर समय तक नप पर प्रशासक नियुक्त रहा है। डेढ़ वर्ष में पांच स्थाई कार्यकारी अधिकारी बदल दिए गए। कांग्रेसी पार्षदों के अनुसार कुलदीप मलिक एक माह, विजय पाल यादव 10 माह, जितेंद्र सिंह साढ़े तीन माह, अमन ढांडा साढ़े तीन माह रहे। कुछ रोज पहले आए ईओ वीरेंद्र सहारण का तबादला 8 मार्च को अंबाला कर दिया। आचार संहिता के बाद वे भी रिलीव हो जाएंगे।
कांग्रेस समर्थित पार्षदों के अनुसार जनता ने उन्हें चुनकर शहर की सरकार बनाई है। शहरी सरकार केवल हाऊस में जनहित के मुद्दों पर विचार विमर्श करके मंजूरी के लिए आगे भेजती है। उन प्रस्तावों को मंजूरी देने का कार्य प्रशासन का है। मंजूरी के बाद कार्य शुरु करवाना अधिकारियों का काम है। प्रस्तावों को मंजूरी मिलने में करीब छह से आठ माह बीत जाते हैं। वहीं अधिकारी न होने से विकास का पहिया ठहर जाता है। तथ्यों के आधार पर स्थिति पूरी तरह से स्पष्ट हैं कि शहर के विकास में मनोहर सरकार रोड़ा बनी हुई ।

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