बैंक, बीमा कंपनियों तथा सरकार की मिलीभगत के कारण किसान का हो रहा है शोषण - जसवीर सिंह भाटी
डबवाली न्यूज़
बकाया बीमा क्लेम देने की मांग को लेकर विभिन्न गांवों से आए किसानों ने शुक्रवार को चौटाला रोड पर स्थित भारतीय स्टेट बैंक की शाखा के बाहर धरना विया व नारेबाजी करते हुए रोष प्रदर्शन भी किया। यह धरना सुबह 10 बजे से लेकर दोपहर बाद 2 बजे तक जारी रहा।
इस मौके पर राष्ट्रीय किसान संगठन के प्रदेश अध्यक्ष जसवीर सिंह भाटी ने कहा कि बैंक, बीमा कंपनियों तथा सरकार की मिलीभगत के कारण किसान को तंग व परेशान होना पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि किसान के बैंक खाते से 15 जुलाई व 15 दिसंबर को बिना किसान को कोई नोटिस दिए बीमा कंपनियों के लिए प्रीमियम राशि काटी जाती है, किसान से किसी फसल का ब्यौरा तक नहीं लिया जाता, बैंक अपनी मर्जी से फसल लिख देते हैं जिसका किसान को नुकसान झेलना पड़ता है। उन्होंने कहा कि बहुत सारे बैंकों में किसानों के खाते से प्रीमियम राशि काट ली मगर बीमा कंपनियों को नहीं जमा करवाई जिसका नुकसान भी किसान को उठाना पड़ा है। दूसरी तरफ सरकार की वाहवाही करने में जुटे कुछ नेता भी गलत आंकड़े पेश कर किसान को नुकसान व बीमा कंपनियों को फायदा पहुंचाने का काम कर रहे हैं। इसमें भी सीधा नुकसान किसान को होता है। उन्होंने बताया की 2018 खरीफ बीमा क्लेम जो अभी तक 50प्रतिशत किसानों को नहीं मिला उसके लिए जिम्मेदार कौन है, कोई भी यह बताने के लिए तैयार नहीं है। ऐसे में किसान कहां जाएं? सरकार अपनी सभी जिम्मेदारियों से पल्ला झाड़ कर किसान को कसूरवार ठहरा देती है। दूसरी तरफ सरसों व गेहूं की खरीद के लिए सरकार ने दिसंबर जनवरी में किसानों से रजिस्ट्रेशन करवा ली थी मगर अब 28 मार्च को सरसों खरीद का समय देकर किसानों से फिर वही कागजात की मांग कर दी है जो किसान को प्रशासन देने में आनाकानी कर रहा है और किसान इधर उधर चक्कर काट कर परेशान हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि किसान को अपनी फसल बेचनी है ना कि वह विदेश जाने का वीजा सरकार से मांग रहे हैं। लेकिन शायद किसान को होने वाली परेशानी से सरकार को कोई लेना देना नहीं है । उन्होंने कहा कि किसान सरकार से अपील करते हैं कि जिन कार्यों का एमएसपी घोषित किया है उनकी सारी फसल सरकार एमएसपी पर खरीद करें या एमएसपी से कम रेट पर की जाने वाली खरीदारी को अपराध घोषित किया जाए। किसानों ने मांग की कि बीमा योजना का को या तो बंद किया जाए या किसान हितैषी बनाया जाए। खरीफ सीजन 2018 का बीमा क्लेम जल्दी दिया जाए। नहरी पानी नरमा बिजाई के लिए मई महीने में कम से कम 21 दिन दिया जाए। ट्यूबवेल कनेक्शन को लेकर जो डिमांड नोटिस भेजे हैं उनमें नई से जोड़ी गई शर्तं हटाई जाए। आवारा पशुओं से फसलों को बचाया जाए। डॉ स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट को लागू किया जाए किसान को कर्ज मुक्त किया जाए। फसलों के रेट लागत व मुनाफा जोड़कर सरकार के वादे अनुसार दिए जाए। बाद में किसानों ने तहसील कॉम्पलेक्स में पहुंचकर नायब तहसीलदार सुरेंद्र मेहता को मांगों से संबधित ज्ञापन भी सौंपा। किसानों ने अन्य मांगों के अलावा सरसों की खरीद जल्द शुरू करने व अन्य दिक्कतों को दूर करने की मांग प्रमुखता से उठाई। किसानों ने बकाया बीमा क्लेम को लेकर अन्य बैंकों के बाहर भी धरने देने की चेतावनी दी है। इस मौके पर सुरेश पुनिया, वेदपाल डांगी, राजेश खन्ना, राकेश नेेहरा, मेजर सिंह, बलवीर हरदीप सिंह अलीका, अमरीक, नरेश, कुलविंदर सिंह मांगेआना, अंग्रेज सिंह , गुरमेल सक्ताखेड़ा आदि मौजूद थे।
बकाया बीमा क्लेम देने की मांग को लेकर विभिन्न गांवों से आए किसानों ने शुक्रवार को चौटाला रोड पर स्थित भारतीय स्टेट बैंक की शाखा के बाहर धरना विया व नारेबाजी करते हुए रोष प्रदर्शन भी किया। यह धरना सुबह 10 बजे से लेकर दोपहर बाद 2 बजे तक जारी रहा।
इस मौके पर राष्ट्रीय किसान संगठन के प्रदेश अध्यक्ष जसवीर सिंह भाटी ने कहा कि बैंक, बीमा कंपनियों तथा सरकार की मिलीभगत के कारण किसान को तंग व परेशान होना पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि किसान के बैंक खाते से 15 जुलाई व 15 दिसंबर को बिना किसान को कोई नोटिस दिए बीमा कंपनियों के लिए प्रीमियम राशि काटी जाती है, किसान से किसी फसल का ब्यौरा तक नहीं लिया जाता, बैंक अपनी मर्जी से फसल लिख देते हैं जिसका किसान को नुकसान झेलना पड़ता है। उन्होंने कहा कि बहुत सारे बैंकों में किसानों के खाते से प्रीमियम राशि काट ली मगर बीमा कंपनियों को नहीं जमा करवाई जिसका नुकसान भी किसान को उठाना पड़ा है। दूसरी तरफ सरकार की वाहवाही करने में जुटे कुछ नेता भी गलत आंकड़े पेश कर किसान को नुकसान व बीमा कंपनियों को फायदा पहुंचाने का काम कर रहे हैं। इसमें भी सीधा नुकसान किसान को होता है। उन्होंने बताया की 2018 खरीफ बीमा क्लेम जो अभी तक 50प्रतिशत किसानों को नहीं मिला उसके लिए जिम्मेदार कौन है, कोई भी यह बताने के लिए तैयार नहीं है। ऐसे में किसान कहां जाएं? सरकार अपनी सभी जिम्मेदारियों से पल्ला झाड़ कर किसान को कसूरवार ठहरा देती है। दूसरी तरफ सरसों व गेहूं की खरीद के लिए सरकार ने दिसंबर जनवरी में किसानों से रजिस्ट्रेशन करवा ली थी मगर अब 28 मार्च को सरसों खरीद का समय देकर किसानों से फिर वही कागजात की मांग कर दी है जो किसान को प्रशासन देने में आनाकानी कर रहा है और किसान इधर उधर चक्कर काट कर परेशान हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि किसान को अपनी फसल बेचनी है ना कि वह विदेश जाने का वीजा सरकार से मांग रहे हैं। लेकिन शायद किसान को होने वाली परेशानी से सरकार को कोई लेना देना नहीं है । उन्होंने कहा कि किसान सरकार से अपील करते हैं कि जिन कार्यों का एमएसपी घोषित किया है उनकी सारी फसल सरकार एमएसपी पर खरीद करें या एमएसपी से कम रेट पर की जाने वाली खरीदारी को अपराध घोषित किया जाए। किसानों ने मांग की कि बीमा योजना का को या तो बंद किया जाए या किसान हितैषी बनाया जाए। खरीफ सीजन 2018 का बीमा क्लेम जल्दी दिया जाए। नहरी पानी नरमा बिजाई के लिए मई महीने में कम से कम 21 दिन दिया जाए। ट्यूबवेल कनेक्शन को लेकर जो डिमांड नोटिस भेजे हैं उनमें नई से जोड़ी गई शर्तं हटाई जाए। आवारा पशुओं से फसलों को बचाया जाए। डॉ स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट को लागू किया जाए किसान को कर्ज मुक्त किया जाए। फसलों के रेट लागत व मुनाफा जोड़कर सरकार के वादे अनुसार दिए जाए। बाद में किसानों ने तहसील कॉम्पलेक्स में पहुंचकर नायब तहसीलदार सुरेंद्र मेहता को मांगों से संबधित ज्ञापन भी सौंपा। किसानों ने अन्य मांगों के अलावा सरसों की खरीद जल्द शुरू करने व अन्य दिक्कतों को दूर करने की मांग प्रमुखता से उठाई। किसानों ने बकाया बीमा क्लेम को लेकर अन्य बैंकों के बाहर भी धरने देने की चेतावनी दी है। इस मौके पर सुरेश पुनिया, वेदपाल डांगी, राजेश खन्ना, राकेश नेेहरा, मेजर सिंह, बलवीर हरदीप सिंह अलीका, अमरीक, नरेश, कुलविंदर सिंह मांगेआना, अंग्रेज सिंह , गुरमेल सक्ताखेड़ा आदि मौजूद थे।
No comments:
Post a Comment