नव संवत्सर आर्य समाज स्थापना दिवस पर हवन यज्ञ आयोजित
डबवाली न्यूज़
आर्य समाज डबवाली की ओर से नव संवत्सर व आर्य समाज स्थापना दिवस के उपलक्ष में हवन यज्ञ का आयोजन सायं 5 बजे किया गया। जिसमें यज्ञब्रह्मा का दायित्व विजय कुमार शास्त्री ने निभाया, जबकि मुख्य यजमान के तौर पर जगसीर सिंह आर्य-प्रेम कौर आर्य ने आहुतियां डाली। इस अवसर पर उपस्थिति को संबोधित करते हुए अध्यक्ष एसके दुआ ने सभी को भारतीय नव वर्ष 2076 की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि चैत्र शुक्ल प्रतिपदा का ऐतिहासिक महत्व है। इस दिन से बहुत सी घटनाएं जुड़ी हुई हैं। इसी दिन सूर्योदय से ब्रह्माजी ने सृष्टि की रचना प्रारंभ की थी। स्वामी दयानंद सरस्वती जी ने इसी दिन आर्य समाज की स्थापना करते हुए कृणवंतो विश्वमआर्यम् का संदेश दिया। सम्राट विक्रमादित्य ने इसी दिन राज्य स्थापित किया। इन्हीं के नाम पर विक्रमी संवत् का पहला दिन प्रारंभ होता है। प्रभु श्रीराम का राज्याभिषेक इसी दिन हुआ। शक्ति का स्वरूप मां दुर्गा के नवरात्र भी आज से ही प्रारंभ होते हैं। सिखों के द्वितीय गुरू श्री अंगद देव जी का जन्म दिवस भी है। सिंध प्रांत के प्रसिद्ध समाज रक्षक वरूणावतार संत झूलेलाल इसी दिन प्रगट हुए। उन्होंने कहा कि विक्रमादित्य की भांति शालिवाहन ने हूणों को परास्त कर दक्षिण भारत में श्रेष्ठतम राज्य स्थापित करने हेतु यही दिन चुना। युधिष्ठिर का राज्यभिषेक भी इसी दिन हुआ। उन्होंने कहा कि इसके साथ ही भारतीय नववर्ष का प्राकृतिक महत्व भी है, क्योंकि वसंत ऋतु का आरंभ वर्ष प्रतिपदा से ही होता है जो उल्लास, उमंग, खुशी तथा चारों तरफ पुष्पों की सुगंधि से भरी होती है। फसल पकने का प्रारंभ यानि किसान की मेहनत का फल मिलने का भी यही समय होता है। नक्षत्र शुभ स्थिति में होते हैं अर्थात् किसी भी कार्य को प्रारंभ करने के लिए यह शुभ मुहूर्त होता है। तदोपरांत रजनी सुंधा व नीलम राये ने सुंदर-सुंदर भजनों से नव वर्ष का स्वागत किया। इस मौके भारत मित्र छाबड़ा, विजय कुमार कामरा, राज कुमार गर्ग एलआईसी वाले, कुलदीप सिंह पटवारी, डॉ. रामफल आर्य, नीलम दुआ, जगरूप सिंह आर्य, राजन सुंधा, खुशदीप, गौरव सहित कई अन्य पुरूष व महिलाएं उपस्थित थी। शांतिपाठ के पश्चात् प्रसाद वितरित किया गया।
आर्य समाज डबवाली की ओर से नव संवत्सर व आर्य समाज स्थापना दिवस के उपलक्ष में हवन यज्ञ का आयोजन सायं 5 बजे किया गया। जिसमें यज्ञब्रह्मा का दायित्व विजय कुमार शास्त्री ने निभाया, जबकि मुख्य यजमान के तौर पर जगसीर सिंह आर्य-प्रेम कौर आर्य ने आहुतियां डाली। इस अवसर पर उपस्थिति को संबोधित करते हुए अध्यक्ष एसके दुआ ने सभी को भारतीय नव वर्ष 2076 की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि चैत्र शुक्ल प्रतिपदा का ऐतिहासिक महत्व है। इस दिन से बहुत सी घटनाएं जुड़ी हुई हैं। इसी दिन सूर्योदय से ब्रह्माजी ने सृष्टि की रचना प्रारंभ की थी। स्वामी दयानंद सरस्वती जी ने इसी दिन आर्य समाज की स्थापना करते हुए कृणवंतो विश्वमआर्यम् का संदेश दिया। सम्राट विक्रमादित्य ने इसी दिन राज्य स्थापित किया। इन्हीं के नाम पर विक्रमी संवत् का पहला दिन प्रारंभ होता है। प्रभु श्रीराम का राज्याभिषेक इसी दिन हुआ। शक्ति का स्वरूप मां दुर्गा के नवरात्र भी आज से ही प्रारंभ होते हैं। सिखों के द्वितीय गुरू श्री अंगद देव जी का जन्म दिवस भी है। सिंध प्रांत के प्रसिद्ध समाज रक्षक वरूणावतार संत झूलेलाल इसी दिन प्रगट हुए। उन्होंने कहा कि विक्रमादित्य की भांति शालिवाहन ने हूणों को परास्त कर दक्षिण भारत में श्रेष्ठतम राज्य स्थापित करने हेतु यही दिन चुना। युधिष्ठिर का राज्यभिषेक भी इसी दिन हुआ। उन्होंने कहा कि इसके साथ ही भारतीय नववर्ष का प्राकृतिक महत्व भी है, क्योंकि वसंत ऋतु का आरंभ वर्ष प्रतिपदा से ही होता है जो उल्लास, उमंग, खुशी तथा चारों तरफ पुष्पों की सुगंधि से भरी होती है। फसल पकने का प्रारंभ यानि किसान की मेहनत का फल मिलने का भी यही समय होता है। नक्षत्र शुभ स्थिति में होते हैं अर्थात् किसी भी कार्य को प्रारंभ करने के लिए यह शुभ मुहूर्त होता है। तदोपरांत रजनी सुंधा व नीलम राये ने सुंदर-सुंदर भजनों से नव वर्ष का स्वागत किया। इस मौके भारत मित्र छाबड़ा, विजय कुमार कामरा, राज कुमार गर्ग एलआईसी वाले, कुलदीप सिंह पटवारी, डॉ. रामफल आर्य, नीलम दुआ, जगरूप सिंह आर्य, राजन सुंधा, खुशदीप, गौरव सहित कई अन्य पुरूष व महिलाएं उपस्थित थी। शांतिपाठ के पश्चात् प्रसाद वितरित किया गया।
No comments:
Post a Comment