युग सुंदर, सदियां सुंदर धरती का हर पल सुंदर अगर मानव जीवन हो सुंदर

  22 अप्रैल World Earth day के उपलक्ष्य में गोल्डन एरा मिलेनियम स्कूल की प्रिंसिपल डॉ शर्मा जी ने प्रार्थना सभा में बच्चों को संबोधित करते हुए कहा हम सब खुश किस्मत हैं
कि इस धरती पर हमारा जन्म हुआ है इस धरती को माता कहकर पुकारा जाता है क्योंकि धरती को चाहे कोई कितना भी कष्ट क्यों न दे परंतु धरती माता सभी को सुख व वे सभी कुछ देती है जो एक इंसान को जिंदा रहने के लिए चाहिए होता है ईश्वर ने धरती पर विभिनता में एकता स्थापित की है जैसे एक माला में अनेक रंगो के फूल हो तो माला बहुत सुंदर लगती है इसी प्रकार धरती पर भी भिन्न भिन्न रंगों के भिन्न भिन्न नस्ल व जाति के लोग रहते हैं लेकिन यदि सभी एकत्र भाग से रहते हैं तो धरती पर शांति स्थापित हो सकती है किसी ने खूब कहा है कि युग सुंदर, सदियां सुंदर धरती का हर पल सुंदर गर मानव जीवन हो सुंदर यह निश्चित रूप से कोई नहीं कह सकता कि धरती कब अस्तित्व में आई परंतु अरबों वर्ष पहले दहकते हुए अग्निपिंड के रूप में धरती का स्वरूप बना
धरती के सूर्य के चारों ओर चक्कर लगाने से व अपने अक्ष पर घूमने से मौसम व दिन रात बनते हैं परंतु विडंबना यह है कि आज धरती का रुप बदल चुका है आज प्रदूषण के कारण धरती का सांस लेना भी दुश्वार हो चुका है पेड़ों को काटा जा रहा है जिससे वर्षा की कमी से देश की आर्थिक स्थिति पर प्रभाव पड़ रहा है परमात्मा ने धरती को अनेक रंगों से सुशोभित किया जैसे कहीं घास का हरा रंग कहीं पर्वतों का भूरा रंग कहीं पानी का हल्का नीला रंग, कहीं पेड़ पौधे, पर्वत, कल कल करती नदियां फसलों से लहलहाते खेत आदि यदि इसी प्रकार मानव प्रकृति से छेड़छाड़ करता रहा तो जल्दी यह धरती मानव के रहने लायक नहीं रहेगी अंत मानव को सचेत होना पड़ेगा सभी का यह कर्तव्य है कि उन्हें इस धरती की रक्षा करनी चाहिए

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