महावीर जयंती केवल एक पर्व ही नहीं बल्कि सत्य, सादगी, और पवित्रता का प्रतीक है-
डबवाली न्यूज़
गोल्डन एरा मिलेनियम स्कूल डबवाली मलोट रोड पर स्थित में आज महावीर जयंती मनाई गई । प्रात:कालीन प्रार्थना सभा में स्कूल के अध्यक्ष डॉ दीप्ती शर्मा ने जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर महावीर के जीवन एवं उपदेशों से सबको अवगत कराया।
इस दौरान शिक्षकों ने उनकी जीवनी पर विस्तार से प्रकाश डाला भगवान महावीर जैन धर्म के अंतिम तीर्थकर थे। सत्य व अहिंसा के मार्ग पर ही चलकर वे युग पुरुष बने। शिक्षकों ने स्कूली बच्चों को भगवान महावीर के पांच सिद्धांत-सत्य, अहिंसा, आचार्य, ब्रह्मचर्य और अपरिग्रह से अवगत कराया। इनमें अहिंसा का स्थान सर्वोपरि है। आगे चल कर जैन धर्म में दो संप्रदाय सामने आए – दिगंबर और श्वेतांबर, लेकिन जहां तक महावीर की मूल शिक्षाओं का सवाल है, दोनों समान रूप से उन्हें मानते हैं। कहा कि मानव को दया व अहिंसा तथा मन की पवित्रता की शिक्षा देने वाले महावीर का जन्म बिहार के वैशाली के राजपरिवार में हुआ था। ज्ञान प्राप्त करने के बाद जैन धर्म का प्रचार किया। महावीर जयंती केवल एक पर्व या उत्सव ही नहीं बल्कि सत्य, सादगी, और पवित्रता का प्रतीक है। शिक्षकों ने कहा कि हर वर्ष यह प्रेरणा देने का प्रयत्न किया जाता है कि हमें अपने जीवन में झूठ, कपट, लोभ-लालच और दिखावे से दूर रहना चाहिए। सच्चा और परोपकारी जीवन जीना चाहिए तभी सभी का कल्याण संभव है। । महावीर जयंती जैन धर्मावलंबियों के साथ ही पूरे देश के लोगों द्वारा मनाई जाती है। जैन धर्मावलंबियों के लिए तो यह एक बड़ा उत्सव होता है। महावीर जयंती का महत्व सिर्फ जैनियों के लिए ही नहीं, पूरे देशवासियों के लिए है। यही नहीं, विदेशों में रहने वाले वो भारतीय जो जैन मत को मानने वाले हैं, यह पवित्र दिन बहुत ही हर्षोल्लास के साथ मनाते हैं। महावीर की शिक्षाओं की उपादेयता सर्वकालिक है और यह पूरी दुनिया के लिए प्रासंगिक एवं ग्राह्य है। दुनिया के तमाम महान लोगों ने इनके विचारों से प्रेरणा ली है। सत्य, अहिंसा, अपरिग्रह ऐसे सिद्धांत हैं जो हमेशा स्वीकार्य रहेंगे और विश्व मानवता को प्रेरणा देते रहेंगे। उन्होंने बच्चों से कहा कि हमें उनके जीवन से प्रेरणा लेनी चाहिए और सच्चा और परोपकारी जीवन जीना चाहिए
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