सालों से घोड़ी नहीं चढ़े लड़के ,इस गांव में कोई भी परिजन अपनी लड़की की शादी नहीं करना चाहता है,

पानीपत, [जगमहेंद्र सरोहा]। शहर से 13 किलोमीटर दूर असंध रोड पर बसा खुखराना गांव। 1978 में बिजली निर्माण के लिए बनाए गए थर्मल से रोजगार की उम्मीद जगी थी। ग्रामीणों को रोजगार मिलना तो दूर अब तो इस गांव में कोई अपनी लड़की शादी भी नहीं करना चाहता है। यही नहीं रिश्तेदार भी इस गांव में आने से डरते हैं। वजह जानकर आप भी हैरान हो जाएंगे।
थर्मल की राखी ने खुखराना गांव को उजाड़ दिया है। गांव में पानी और हवा इतनी खराब है कि लोग घरों के बाहर तक नहीं बैठ सकते। गांव को शिफ्ट करने की योजना दो दशक से केवल योजना बनकर रह गई है। पानीपत शहर में भी उतनी ही तेजी के साथ पानी जहरीला होता जा रहा है। शहरवासी अब भी नहीं जागे तो फिर खुखराना की तरफ बसने लिए जगह तक नहीं मिल पाएगी।
लड़कों की शादी तक नहीं हो पा रही
गांव का पानी इतना खराब है कि रात को रख दिया तो सुबह तक पीला पड़ जाता है। बच्चों को छोटी उम्र ही चश्मा लग गया है। कोई भी इस गांव में अपने बच्चों की शादी को तैयार नहीं है। रिश्तेदार भी रुकना पसंद नहीं करते।

गांव छोड़कर गए लोग।
हाईकोर्ट के फैसले के बाद भी शिफ्ट नहीं हुआ गांव
ग्रामीण गांव शिफ्ट करने की मांग को लेकर 1985 में हाईकोर्ट चले गए थे। हाईकोर्ट ने गांव को शिफ्ट करने का फैसला दिया था। सरकारें तब से लेकर अब तक इसके प्रयास कर रही हैं, लेकिन गांव के लिए जमीन चिह्न्ति होने के सिवाय कुछ नहीं हो पाया है। ऐसे में गांव की शिफ्टिंग ठंडे बस्ते में पड़ी है। ग्रामीणों की माने तो मकान खंडहर हो गए हैं।
2014 में रखा था शिफ्टिंग का पत्थर
गांव के आज तक शिफ्ट नहीं होने का एक बड़ा कारण ग्रामीणों में गुटबाजी है। 2014 में तत्कालीन सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने मतलौडा रैली में गांव शिफ्ट करने का पत्थर रखा था। मिलन गार्डन के पीछे 23 एकड़ 5 कनाल जमीन तय कर रखी। जमीन और राशि तय कर रखी है, लेकिन ग्रामीण एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगा रहे हैं। वे एक-दूसरे पर एरिया कम या ज्यादा दिखाने का आरोप लगा रहे हैं।
प्रदूषण की वजह से लोगों के हाथों में पड़े छाले
वहीं पंचायत समिति, जिला परिषद व विधायक तक मुद्दे पर गांव से वोट तो लेते हैं, लेकिन बाद में शिफ्टिंग का वादा भूल जाते हैं। न्यू खुखराना में 402 प्लॉट अलॉट किए गए हैं। सरकार के सभी संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी दौरा कर चुके हैं। सरकार व प्रशासनिक अधिकारी गांव को जल्द शिफ्ट करने का कई बार दावा कर चुके हैं, लेकिन यह सिमटे हुए हैं।
credit jagran नेटवर्क
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