तेरे नाम का सुमिरन करके मेरे मन में सुख भर आया...
डबवाली न्यूज़
रविवार को आर्य समाज की ओर से यज्ञशाला में साप्ताहिक हवन यज्ञ का आयोजन किया गया। जिसमें यज्ञब्रह्मा का दायित्व पुस्तकालयाध्यक्ष डॉ. रामफल आर्य ने निभाया जबकि मुख्य यजमान के तौर पर कुलदीप सिंह पटवारी ने आहुतियां डाली। तदोपरांत स्त्री आर्य समाज की कर्मठ सदस्य रजनी सुंधा ने अर्थपूर्ण व प्रेरणादायक भजन तेरे नाम का सुमिरन करके मेरे मन में सुख भर आया...तथा सुखी बसे संसार सब दुखिया रहे ने कोय...प्रस्तुत किए। आर्यमाज के संरक्षक राज कुमार गर्ग लोहे वालों की 38वीं वैवाहिक वर्षगांठ पर विशेष आहुतियां डालते हुए उन्हें शुभकामनाएं दी गई।
डॉ. रामफल आर्य ने उपस्थिति को संबोधित करते हुए आर्य समाज के दस नियमों में से दूसरे नियम की व्याख्या करते हुए कहा कि ईश्वर सच्चिदानंदस्वरूप, निराकार, सर्वशक्तिमान, न्यायकारी, दयालु, अजन्मा, अनंत, निर्विकार, अनादि, अनुपम, सर्वाधार, सर्वेश्वर, सर्वव्यापक, सर्वअंतर्यामी, अजर, अमर, अभय, नित्य, पवित्र और सृष्टिकर्ता है, उसी की उपासना करने योग्य है। उन्होंने कहा कि हमें प्रत्येक मनुष्य के साथ धर्मानुसार व प्रीतिपूर्वक व्यवहार करना चाहिए। इस संबंध में जानकारी देते हुए महामंत्री सुदेश आर्य ने बताया कि इस मौके प्रधान एसके दुआ, कोषाध्यक्ष भारत मित्र छाबड़ा वरिष्ठ सदस्य विजय कामरा, जगरुप सिंह आर्य, राजन सुंधा, खुशदीप व गौरव आदि मौजूद थे। शांतिपाठ के बाद प्रसाद वितरित किया गया।
रविवार को आर्य समाज की ओर से यज्ञशाला में साप्ताहिक हवन यज्ञ का आयोजन किया गया। जिसमें यज्ञब्रह्मा का दायित्व पुस्तकालयाध्यक्ष डॉ. रामफल आर्य ने निभाया जबकि मुख्य यजमान के तौर पर कुलदीप सिंह पटवारी ने आहुतियां डाली। तदोपरांत स्त्री आर्य समाज की कर्मठ सदस्य रजनी सुंधा ने अर्थपूर्ण व प्रेरणादायक भजन तेरे नाम का सुमिरन करके मेरे मन में सुख भर आया...तथा सुखी बसे संसार सब दुखिया रहे ने कोय...प्रस्तुत किए। आर्यमाज के संरक्षक राज कुमार गर्ग लोहे वालों की 38वीं वैवाहिक वर्षगांठ पर विशेष आहुतियां डालते हुए उन्हें शुभकामनाएं दी गई।
डॉ. रामफल आर्य ने उपस्थिति को संबोधित करते हुए आर्य समाज के दस नियमों में से दूसरे नियम की व्याख्या करते हुए कहा कि ईश्वर सच्चिदानंदस्वरूप, निराकार, सर्वशक्तिमान, न्यायकारी, दयालु, अजन्मा, अनंत, निर्विकार, अनादि, अनुपम, सर्वाधार, सर्वेश्वर, सर्वव्यापक, सर्वअंतर्यामी, अजर, अमर, अभय, नित्य, पवित्र और सृष्टिकर्ता है, उसी की उपासना करने योग्य है। उन्होंने कहा कि हमें प्रत्येक मनुष्य के साथ धर्मानुसार व प्रीतिपूर्वक व्यवहार करना चाहिए। इस संबंध में जानकारी देते हुए महामंत्री सुदेश आर्य ने बताया कि इस मौके प्रधान एसके दुआ, कोषाध्यक्ष भारत मित्र छाबड़ा वरिष्ठ सदस्य विजय कामरा, जगरुप सिंह आर्य, राजन सुंधा, खुशदीप व गौरव आदि मौजूद थे। शांतिपाठ के बाद प्रसाद वितरित किया गया।
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