बाहर से विनम्र अंदर से चट्टान थे शास्त्री जी : सुथार
डबवाली न्यूज़
उपतहसील गोरीवाला स्थित स्वामी विवेकानंद सीनियर सैकेंडरी स्कूल में शनिवार को भारत देश के द्वितीय प्रधामनंत्री लाल बहादुर शास्त्री की पुण्यतिथि पर श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी गई। इस अवसर पर प्रिंसिपल समेस्ता सुथार ने लाल बहादुर शास्त्री के जीवन पर प्रकाश डाला। शास्त्री जी ने महात्मा गांधी द्वारा चलाए गए असहयोग आंदोलन में भाग लिया। बाहर से विनम्र दिखने वाले शास्त्री जी अंदर से चट्टान की तरह कठोर थे। उनका सोचना था कि देश का किसान व जवान हर तरह से सक्षम है तो देश को उन्नति करने से कोई नहीं रोक सकता। उनके इन्हीं महान विचारों से उन्हें देश के सर्वोच्च सम्मान भारत रत्न से नवाजा गया। इस अवसर पर प्रबंधक सुलतान सुथार, सहसचिव मनोज सुथार, उपप्रधानाचार्य मोहन लाल बठला सहित अन्य स्टाफ सदस्य व विद्यार्थीगण उपस्थित थे।
उपतहसील गोरीवाला स्थित स्वामी विवेकानंद सीनियर सैकेंडरी स्कूल में शनिवार को भारत देश के द्वितीय प्रधामनंत्री लाल बहादुर शास्त्री की पुण्यतिथि पर श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी गई। इस अवसर पर प्रिंसिपल समेस्ता सुथार ने लाल बहादुर शास्त्री के जीवन पर प्रकाश डाला। शास्त्री जी ने महात्मा गांधी द्वारा चलाए गए असहयोग आंदोलन में भाग लिया। बाहर से विनम्र दिखने वाले शास्त्री जी अंदर से चट्टान की तरह कठोर थे। उनका सोचना था कि देश का किसान व जवान हर तरह से सक्षम है तो देश को उन्नति करने से कोई नहीं रोक सकता। उनके इन्हीं महान विचारों से उन्हें देश के सर्वोच्च सम्मान भारत रत्न से नवाजा गया। इस अवसर पर प्रबंधक सुलतान सुथार, सहसचिव मनोज सुथार, उपप्रधानाचार्य मोहन लाल बठला सहित अन्य स्टाफ सदस्य व विद्यार्थीगण उपस्थित थे।
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