नेहरु कॉलेज ऑफ एजुकेशन में नागरिकता संशोधन कानून विषय पर व्याख्यान आयोजित
डबवाली न्यूज़
उपमंडल के गांव नेहरु कॉलेज ऑफ एजुकेशन में नागरिकता संशोधन कानून विषय पर आधारित एक व्याख्यान का आयोजन किया गया।
जिसमें मुख्य वक्ता के तौर पर आर्य समाज के अध्यक्ष संतोष कुमार दुआ ने शिरकत की, जबकि विशिष्ठ अतिथि के तौर पर समाजसेवी अशोक सेतिया ने अपनी उपस्थिति दर्ज करवाई। अपने संबोधन में दुआ ने नागरिकता संशोधन कानून सी.ए.ए. पर विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने कहा कि नागरिकता संशोधन कानून दूसरे देशों से आए हिंदू, बौद्ध, सिख, जैन, पारसी, ईसाई आदि धार्मिक प्रताडऩा के चलते भारत में आए हैं, उनको नागरिकता प्रदान करना है। उन्होंने कहा कि यह कानून किसी को भी नुक्सान पहुंचाने के लिए नहीं है। पहले नागरिकता प्राप्त करने के लिए 11 वर्षों का समय निर्धारित था जिसे कम करके अब 5 वर्ष कर दिया गया है। अब 5 वर्षों बाद ही दूसरे देश से विस्थापित होकर भारत आए लोगों को नागरिकता मिल सकती है। नेहरु आईटीआई के निदेशक विजयंत शर्मा ने उपस्थिति को संबोधित करते हुए कहा कि इस कानून के संबंध में जितनी भी भ्रांतियां देश में फैलायी जा रही हैं वह सही नहीं हैं, वे ऐसे लोग हैं जो नहीं चाहते कि भारत में कानून व्यवस्था सही चले। यह कानून सभी को बराबर का अधिकार देने के लिए बनाया गया है और हमें इस कानून का समर्थन करना चाहिए। मंच संचालन प्राध्यापिका ममता आर्य ने किया। कार्यक्रम के अंत में मुख्य वक्ता संतोष कुमार दुआ को कॉलेज प्रबंध समिति की ओर से स्मृति चिन्ह भेंट किया गया। कॉलेज की प्रिंसिपल डॉ. विमला साहू ने सभी अतिथियों का धन्यवाद किया। इस मौके टीचिंग व नॉन टीचिंग स्टॉफ मौजूद था।
उपमंडल के गांव नेहरु कॉलेज ऑफ एजुकेशन में नागरिकता संशोधन कानून विषय पर आधारित एक व्याख्यान का आयोजन किया गया।
जिसमें मुख्य वक्ता के तौर पर आर्य समाज के अध्यक्ष संतोष कुमार दुआ ने शिरकत की, जबकि विशिष्ठ अतिथि के तौर पर समाजसेवी अशोक सेतिया ने अपनी उपस्थिति दर्ज करवाई। अपने संबोधन में दुआ ने नागरिकता संशोधन कानून सी.ए.ए. पर विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने कहा कि नागरिकता संशोधन कानून दूसरे देशों से आए हिंदू, बौद्ध, सिख, जैन, पारसी, ईसाई आदि धार्मिक प्रताडऩा के चलते भारत में आए हैं, उनको नागरिकता प्रदान करना है। उन्होंने कहा कि यह कानून किसी को भी नुक्सान पहुंचाने के लिए नहीं है। पहले नागरिकता प्राप्त करने के लिए 11 वर्षों का समय निर्धारित था जिसे कम करके अब 5 वर्ष कर दिया गया है। अब 5 वर्षों बाद ही दूसरे देश से विस्थापित होकर भारत आए लोगों को नागरिकता मिल सकती है। नेहरु आईटीआई के निदेशक विजयंत शर्मा ने उपस्थिति को संबोधित करते हुए कहा कि इस कानून के संबंध में जितनी भी भ्रांतियां देश में फैलायी जा रही हैं वह सही नहीं हैं, वे ऐसे लोग हैं जो नहीं चाहते कि भारत में कानून व्यवस्था सही चले। यह कानून सभी को बराबर का अधिकार देने के लिए बनाया गया है और हमें इस कानून का समर्थन करना चाहिए। मंच संचालन प्राध्यापिका ममता आर्य ने किया। कार्यक्रम के अंत में मुख्य वक्ता संतोष कुमार दुआ को कॉलेज प्रबंध समिति की ओर से स्मृति चिन्ह भेंट किया गया। कॉलेज की प्रिंसिपल डॉ. विमला साहू ने सभी अतिथियों का धन्यवाद किया। इस मौके टीचिंग व नॉन टीचिंग स्टॉफ मौजूद था।
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