आज पुण्यतिथि पर विशेष : भारत की आजादी व शिक्षा के प्रसार के लिए अपना सर्वस्व न्यौछावर कर दिया स्वतंत्रता सेनानी महाश्य हुकम चंद जी ने

डबवाली न्यूज़
स्वतंत्रता सेनानी दिवंगत महाश्य हुकम चंद छाबड़ा का जन्म 16 जून, 1916 को गांव लोहगढ़ में माता जेष्ठी बाई व पिता पोखर दास के घर हुआ।
 फाईल फोटो :
स्वतंत्रता सेनानी महाश्य हुकम चंद छाबड़ा। 
इन्होंने अपनी पढ़ाई गांव तथा मिडिल परीक्षा राजकीय स्कूल डबवाली से की। जब लाला लाजपत राय अबोहर आए और उन्होंने विदेशी कपड़ों की होली जलाई और खादी पहनने पर बल दिया तो इन्होंने उसी समय खादी पहनने का प्रण कर लिया और आजादी की लड़ाई में कूद पड़े। उस समय इनकी आयु 13 वर्ष थी। सन् 1942 में भारत छोड़ो आंदोलन में भाग लेने के कारण उन्हें सजा हुई और उनको मुल्तान जेल में रखा गया। दिवंगत चौ. देवी लाल, साहब राम व पतराम जी वर्मा उनके जेल के साथी थे। सजा के दौरान उन्हें मुंबई सैंट्रल जेल में भी रखा गया, लेकिन फिर भी उन्होंने आजादी की लड़ाई का संघर्ष जारी रखा।
वे अपने जीवनकाल में पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी के सदस्य व हरियाणा प्रदेश कांग्रेस कमेटी जिला हिसार के जनरल सचिव रहे। सन् 1976 में नगर सुधार मंडल के चेयरमैन रहे। सन् 1965 में ओम प्रकाश आर्य रामां मंडी वालों की प्रेरणा तथा अपने साथी बाबू राम अवतार, भक्त गंगादत्त, किशोरी लाल कामरा, लाला देसराज सिंगला, सरूप चंद गुप्ता व डॉ. जयपाल घीक के अथक सहयोग से आर्य विद्या मंदिर की नींव रखी और शिक्षा के क्षेत्र में समाजसेवा में जुट गए। उस समय उन्होंने उक्त साथियों के साथ मिलकर विद्यालय के लिए एक-एक रूपये की सहयोग राशि एकत्रित कर जो कार्य शुरू किया था, उस विद्यालय की आज शहर में तीन शाखाएं चल रही हंै और आर्य विद्या मंदिर के नाम से शिक्षा के क्षेत्र में अग्रणी हैं।
उन्होंने भारत की आजादी व शिक्षा के प्रसार हेतु अपना सर्वस्व समर्पित कर दिया। 15 अगस्त, 1972 को स्वतंत्रता दिवस की 25वीं वर्षगांठ पर प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी द्वारा ताम्रपत्र देकर उन्हें सम्मानित किया गया। आज ही के दिन 3 मार्च, 1983 को लंबी बीमारी से जूझते हुए उनका देहांत हो गया।
मरणोंपरांत हरियाणा सरकार द्वारा नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जन्म शताब्दी पर उनके परिवार को ताम्रपत्र देकर सम्मानित किया गया। आज छाबड़ा परिवार का प्रत्येक सदस्य उनके बताए हुए मार्ग पर चलते हुए तन-मन-धन से समाज सेवा में जुटा हुआ है।
दिवंगत महाश्य हुकम चंद जी छाबड़ा की स्मृति में श्रद्धांजलि समारोह व हवन यज्ञ आज दिनांक 3 मार्च, मंगलवार को प्रात: 9 बजे उनके मंझले बेटे भारत इंद्र छाबड़ा के निवास समीप वाल्मीकि चौंक में किया जाएगा। यह जानकारी देते हुए इनके ज्येष्ठ पुत्र भारत मित्र छाबड़ा ने बताया कि पारिवारिक सदस्यों के अतिरिक्त आर्य समाज के सदस्यों सहित आसपास के क्षेत्र के गणमान्य व्यक्ति पहुंचकर अपने श्रद्धासुमन अर्पित करेंगे।

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