दिल्ली में दंगे भड़काने वाले तो आजाद पंक्षी की तरह हवाओं में उड़ रहे हैं. जिन्हें जेल की सलाखों के पीछे होना चाहिए था, वो पुलिस के पहरे में आजाद घूम रहे हैं

डबवाली न्यूज़ डेस्क
स्टूडैंट्स फैडरेशन ऑफ इंडिया हरियाणा राज्य कमेटी ने दिल्ली पुलिस द्वारा देवांगना कलिता और नताशा नरवाल व अन्य विधार्थियों को तुरंत रिहा करने की मांग लेकर आज एस०एफ०आई हरियाणा राज्य कमेटी ने प्रदेश व्यापी विरोध प्रदर्शन किये। स्टूडैंट्स फैडरेशन ऑफ इंडिया एस०एफ०आई के राज्य अध्यक्ष सुमन , राज्य सचिव सुरेन्द्र सिंह व उपाअध्यक्ष विनोद गिल ने संयुक्त प्रैस बयान जारी करते हुए कहा कि दिल्ली में दंगे भड़काने वाले तो आजाद पंक्षी की तरह हवाओं में उड़ रहे हैं. जिन्हें जेल की सलाखों के पीछे होना चाहिए था, वो पुलिस के पहरे में आजाद घूम रहे हैं. वहीं दूसरी तरफ नागरिकता कानून (सीएए) दिल्ली पुलिस ने उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगा मामला में 2 लड़कियों नताशा और देवांगना को गिरफ्तार किया है इसी आन्दोलन में जामिया की छात्रा सफूरा जरगर को भी गिरफ्तार कर तिहाड़ जेल में डाल दिया गया है. जबकि वो तीन महीने की गर्भवती हैं. इसके बावजूद अदालत भी उसे जमानत देने के लिए तैयार नहीं है. एक तरफ तो सरकार बेटी बचाओं बेटी पढ़ाओ के नारे लगा रही है। दूसरी तरफ मौजूदा सरकार तानाशाही रवैया अपनाते हुए जेलों में बन्द कर रही है। जिसे स्पष्ट दिखाई दे रहा है। की भाजपा की केन्द्र सरकार सत्ता के सामने
गृह मंत्रालय बेहद संवेदनहीन और अपराधिक मनोवृति से संचालित हो रहा है। ऐसे समय में जब पूरा देश कोरोना महामारी के प्रकोप से जूझ रहा है,केंद्र सरकार से यह अपेक्षा की जाती है कि वह अपनी पूरी ऊर्जा महामारी से लड़ने में लगाए। दिल्ली के कोर्ट के द्वारा जमानत दिए जाने के तुरंत बाद दिल्ली क्राइम ब्रांच के द्वारा फिर से पिंजड़ा तोड़ की कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी और उन पर हत्या एवं हत्या की कोशिश, दंगा भड़काने, आदि जैसे गंभीर आरोप लगाकर रिमांड पर लेने की बदनीयती की एस०एफ०आई की हरियाणा राज्य कमेटी कड़े शब्दों में निंदा करती है। इन सभी विधार्थियों तुरंत रिहा करने की मांग करते हैं।
खासतौर यह तब किया गया जब देवांगना कलिता और नताशा नरवाल को जमानत देते हुए कोर्ट ने बहुत साफ कहा कि 'पुलिस पर हमला एवं सरकारी काम को रोकने जैसे मामले मेन्टेनेबल नहीं हैं' और 'ये तो CAA और NRC के खिलाफ मात्र विरोध है'। इससे साफ जाहिर होता है कि नागरिकता कानून को लेकर चल रहे विरोध की आवाज को फर्जी मामला बनाकर उसे बदनाम करने और दबाने का काम किया जा रहा है।
गौरतलब है कि दिल्ली दंगों के मामले में साजिश रचने का आरोप लगाते हुए दिल्ली पुलिस ने जिन छात्रों या पूर्व छात्रों को गिरफ्तार किया है. उन सबके खिलाफ UAPA एक्ट के तहत कार्रवाई की गयी है, ताकि उन्हें जमानत न मिले और वो लंबे वक्त तक जेल में सड़ते रहें.
वहीं जिन कपिल मिश्रा, अनुराग ठाकुर, प्रवेश वर्मा जैसे बीजेपी नेताओं को पूरी दुनिया ने दंगे भड़काते हुए खुली आंखों से देखा था, उन्हें गिरफ्तार करना तो दूर, उनके खिलाफ एक एफआईआर तक दर्ज नहीं किया गया है. बीजेपी के ये सभी सूरमा खुलेआम घूम रहे हैं.
दिल्ली पुलिस की इस पूरी कार्रवाई के पीछे गृह मंत्री अमित शाह का दिमाग है. जो सीएए और एनआरसी आंदोलन को पूरी तरह कुचल देना चाहते हैं. अमित शाह को पता है कि कोरोना संकट और लॉकडाउन खत्म होने के बाद सीएए के खिलाफ फिर से आंदोलन शुरू होगा. उनकी योजना है कि जो लोग इस आंदोलन को नेतृत्व दे रहे थे, अगर उन्हें ही जेल में डाल दिया जायेगा तो कोई भी फिर आंदोलन करने की हिम्मत नहीं करेगा. इसलिए सीएए आंदोलनकारियों पर दिल्ली में दंगा भड़काने का आरोप लगा कर उन्हें धड़ाधड़ गिरफ्तार किया जा रहा है. वहीं दंगे के असली आरोपी आजादी से घूम रहे हैं.
राज्य उपाअध्यक्ष विनोद गिल ने कहा कि सरकार ने जिस तरह अवसर की बात की थी, उसी तरह इसका इस्तेमाल किया। उन्होंने कहा, “सरकार ने न केवल कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार करने के लिए इसका इस्तेमाल किया बल्कि श्रम कानूनों को ध्वस्त कर दिया। सरकार निजीकरण कर रही है और हवाई अड्डों की नीलाम कर रही है।” अगर केन्द्र सरकार छात्राओं को रिहा करने के फैसले को वापिस नहीं लेती हैं तो एस०एफ०आई देश भर में आन्दोलन का आगाज करेगी।
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