मंडी पर मंडराया मंदी का खतरा - व्यापारी के सुसाइड से डूबी करोड़ों की रकम, लेनदेन का पहिया डगमगाया


डबवाली न्यूज़ डेस्क(इंदरजीत अधिकारी)
व्यापारी के सुसाइड मामले ने पूरी मंडी के लेनदेन के पहिए को भारी झटका दिया है। व्यापारी के सुसाइड मामले में सिरसा मंडी के ही दो व्यापारियों के खिलाफ आत्महत्या के लिए मजबूर करने का मामला दर्ज है। व्यापारी द्वारा सुसाइड नोट में एक व्यापारी पर दो करोड़ 50 लाख और दूसरे पर 30 लाख रुपये बिजनेस पर लगाने का आरोप लगाया गया था। पुलिस द्वारा मामला दर्ज किया गया और उस पर जांच जारी है। अचरज की बात यह है कि सुसाइड नोट में मृतक ने लेनदारों के नामों का भी जिक्र किया है। जिसमें बताया गया है कि उसने करोड़ों रुपये किस-किस से लिए। उन लोगों के नाम और राशि का भी उल्लेख किया गया है। लगभग तीन दर्जन लोगों के नाम इस सुसाइड नोट में अंकित है। सुसाइड नोट में नाम अंकित होने के बावजूद लेनदारों द्वारा पैसे का तकाजा नहीं किया जा रहा। आखिर उनकी राशि का भुगतान कौन करेगा? मृतक व्यापारी ने कई लोगों से 20-20, 30-30 लाख रुपये तक लिए हुए है। ऐसे में व्यापारी की मौत के साथ ही उनकी पंूजी भी डूब चुकी है। ऐसे में पैसा देने वालों की भी आर्थिक गतिविधि ठहर गई है।जिन लोगों को पहले अपनी मूल पूंजी से ब्याज की उम्मीद थी और वे ब्याज राशि से अपना सर्कल चला रहे थे। ऐसे लोगों की मूल पूंजी ही दांव पर लग गई। ऐसे लोगों की पीड़ा यह है कि वे अपनी पूंजी के लिए तकाजा भी नहीं कर सकते। चूंकि उन्हें तकाजे को आत्महत्या के लिए मजबूर करने से जोड़े जाने का भय सताता है। सुसाइड नोट में उनका नाम पहले ही अंकित है। ऐसे में वे चुप्पी साधे हुए है। मगर, कारोबार में पैसा डूबने से लेनदारों की भी गतिविधियां ठप हो गई है। उन्होंने जिन लोगों से लेनदेन करना था, वह रूक गया है। मंडी के हालात यह है कि भीतर से कारोबारी पूरी तरह से हिलें हुए है। चूंकि इन दिनों गेहूं का सीजन सिर पर था, ऐसे में कुछ समय के लिए झटका बर्दाश्त कर लिया। लेकिन आने वाले दिनों में इसका असर दिखाई देने की प्रबल आशंका बनी हुई है।

पैसा भी डूबा, इंकम टैक्स का भी डर

सिरसा मंडी के व्यापारी द्वारा सुसाइड करने और सुसाइड नोट में लेनदारों के नाम अंकित किए जाने से उनमें भय व्याप्त है। उन्हें मूल पूंजी डूबने का तो गम है ही, साथ ही उन्हें इंकम टैक्स का भी भय सता रहा है। चूंकि सुसाइड नोट में तीन दर्जन से अधिक लोगों के नाम और उनके द्वारा दी गई राशि का भी उल्लेख किया गया है। सूत्र बताते है कि अधिकांश ने दो नंबर में पैसा ब्याज पर दिया था। दो नंबर के पैसे को ब्याज पर देकर वे आय अर्जित कर रहे थे। जिसका इंकम टैक्स में कोई उल्लेख नहीं किया गया था। चूंकि सुसाइड नोट पुलिस केस में जुड़ा है। ऐसे में इंकम टैक्स की नजर में भी चढ़ सकता है। इंकम टैक्स विभाग ने यदि नजरें टेड़ी की तो लाखों रुपये ब्याज पर देने वालों की खैर नहीं है।

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