अपितु सुखद, संतुलित एवं स्वस्थ जीवन के लिए संजीवनी बूटी है योग - सुरेंद्र कुमार कौशिक

डबवाली न्यूज़ डेस्क
''योगश्चित्त वृत्ति: निरोध:''अर्थात् चित्त की वृत्तियों का निरोध योग है। ''योग कर्मसु कौशलम्'' कर्मों में कुशलता ही योग है। योग हमारी संस्कृति की प्राचीनतम पहचान ही नहीं अपितु सुखद, संतुलित एवं स्वस्थ जीवन के लिए संजीवनी बूटी है। उक्त शब्द वाटर वक्र्स रोड स्थित बाल मंदिर स्कूल के प्रिंसिपल सुरेंद्र कुमार कौशिक ने कहे। उन्होंने कहा कि यह शरीर और दिमाग की एकता का प्रतीक है। श्रीमद् भगवद्गीता में भगवान श्री कृष्ण को योगेश्वर कहा गया है। भगवान श्री कृष्ण श्रीमद् भगवद् गीता में ज्ञान योग, भक्ति योग और कर्म योग का व्यापक ज्ञान देते हैं। उन्होंने कहा कि भारत के पास वह अध्यात्म विद्या है जो विश्व के अन्य किसी देश के पास नहीं है। आधुनिक जीवन की बदलती जीवन शैली में तन और मन को स्वस्थ एवं संतुलित रखना नितांत आवश्यक है। आज संपूर्ण विश्व में विज्ञान की अंधी दौड़ में सर्वत्र विभिषिका के बादल मंडरा रहे हैं। चहुंओर तनाव ही तनाव नज़र आ रहा है और मनुष्य अपने ही द्वारा सभ्यता के विकास की ओर कदम बढ़ाते हुए विषाक्त वातावरण तैयार कर रहा है। जिसका प्रत्यक्ष उदाहण है कोरोना वैश्विक महामारी। जिसका भयावह रूप हमारे सामने है। इस महामारी पर जिसने भी विजय पाई है तो सिर्फ अपनी रोग प्रतिरोधक क्षमता के बल पर। उन्होंने कहा कि हम सभी भारतीयों में अन्य देशों के नागरिकों से अधिक रोग प्रतिरोधक क्षमता पाई गई है, क्योंकि हमारे ऋषि-मुनियों ने हजारों वर्ष पूर्व ही जीवन को स्वस्थ बनाने के सूत्र दिए जिन पर चलकर आज दुनिया के हर कोने में लोग लाभांवित हो रहे हैं। हमारी संस्कृति की अमूल्य विरासत सिर्फ हमारे देश में नहीं परंतु अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर धूम मचा रही है और आज ही के दिन 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के रूप में मनाया जाता है। उन्होंने बच्चों से आह्वान किया कि करो योग-रहो निरोग का सिद्धांत अपनाएं और योग को अपनी दिनचर्या में शामिल करें। उन्होंने सीबीएसई प्रपत्र का जिक्र करते हुए बताया कि स्कूल के पीटीआई प्रतिदिन योग के विभिन्न आसनों एवं व्यायाम की वीडियो बनाकर ऑनलाईन प्रार्थना सभा में भेजते हैं। जिसका अनुसरण करते हुए छात्र-छात्राएं भी अपनी वीडियो स्कूल गु्रप में भेज रहे हैं। इतना ही नहीं अभिभावक भी अपने बच्चों के साथ योगाभ्यास करके स्वास्थ्य लाभ ले रहे हैं। उन्होंने कहा कि कठिन समय में छात्रों के सकारात्मक दृष्टिकोण को बनाए रखने में योग की अहम् भूमिका है और योग के कारण ही अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भारत का गौरव बढ़ रहा है। जीवन को संयमित व सुखमय बनाने के लिए योग और व्यायम अवश्य करना चाहिए।
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