स्वास्थ्य विभाग पर लगाया आरटीआई का पहरा - कोरोनाकाल में घपले-घोटालों की आशंकाओं के मद्देनजर मांगी गई सूचना

डबवाली न्यूज़ डेस्क (इंदरजीत अधिकारी की विशेष रिपोर्ट)
कोरोनाकाल में सरकारी महकमों द्वारा किए जाने वाले घपले-घोटालों की आशंका के दृष्टिगत आरटीआई एक्टिविस्टों की ओर से मोर्चा खोला गया है।उपायुक्त कार्यालय हो या अन्य विभाग, आरटीआई एक्टिविस्ट कोरोना से संबंधित सूचना मांग रहा है। यह अलग बात है कि सरकारी महकमों द्वारा मांगी गई सूचनाएं उपलब्ध नहीं करवाई गई और मामले में प्रथम अपील और द्वितीय अपील के रूप में सूचना आयोग पहुंच चुके है।दरअसल, कोरोना की आड़ में सरकारी महकमों में फर्जी बिल बनाने और सरकारी खजाने से राशि हड़पने की आशंकाएं सामने आई है। ऐसे में सच्चाई को सामने लाने के लिए आरटीआई का इस्तेमाल किया जा रहा है। वैसे तो प्रशासन को अपने स्तर पर तमाम मुहैया करवानी चाहिए कि प्रशासन को कोरोना से लडऩे को क्या मदद मिलीं। प्रशासन ने उस राशि का क्या उपयोग किया। किन लोगों को क्या-क्या सहायता मुहैया करवाई। लेकिन प्रशासन द्वारा पूरे मामले को दबाने-छिपाने की कोशिश की गई है, जिसके कारण आशंकाओं को अधिक बल मिला है। चत्तरगढ़पट्टी निवासी आरटीआई एक्टिविस्ट इन्द्रजीत द्वारा स्वास्थ्य विभाग से विभिन्न पहलूओं को लेकर सूचना मांगी गई है, जिनके बाहर आने से स्वास्थ्य विभाग द्वारा किए गए कार्यों का ब्यौरा और किए गए खर्च का विवरण भी सामने आ पाएगा।
क्या मांगा आरटीआई में
सिविल सर्जन सिरसा कार्यालय से आरटीआई में यह जानकारी मांगी गई है कि केंद्र व प्रदेश सरकार द्वारा स्वास्थ्य विभाग को कोरोना से लडऩे के लिए कब-कब और कितनी राशि मुहैया करवाई गई। विभाग द्वारा किन मद पर इस राशि को खर्च किया गया। विभाग ने कोरोना वारियर्स यानि चिकित्सकों व स्टॉफ को क्या सुविधाएं मुहैया करवाई। यह कि विभाग ने कितने पीपीई किट, सैनेटाइजर, मास्क, ग्लव्ज, शू कवर की खरीद की और इन्हें किन्हें वितरित किया गया। यह भी जानकारी मांगी गई है कि स्वास्थ्य विभाग को किन-किन सामाजिक संस्थाओं की ओर से क्या-क्या सुविधा प्रदान की गई। आरटीआई में यह भी जानकारी मांगी गई है कि स्वास्थ्य विभाग द्वारा आशा वर्करों को क्या सुविधा प्रदान की। कंटेनमेंट जोन में आए लोगों को क्या सुविधा दी गई। कंटेनमेंट जोन में कितने लोगों को सैनेटाइजर, मास्क, दवा व अन्य सामग्री प्रदान की गई। आरटीआई में स्वास्थ्य विभाग से सिरसा जिला में बनाए गए क्वारटिन सेंटरों की भी जानकारी मांगी गई है। यह भी पूछा गया है कि इनमें कितने लोगों को ठहराया गया और इस पर कितनी राशि खर्च हुई। यह भी कि कोटा से आए छात्रों को कितने दिन तक क्वारंटिन सेंटर में रखा गय और उन्हें क्या सुविधा दी। आरटीआई में मांगी सूचना मिलने पर विभाग की कारगुजारियां जनता के सामने होंगी।
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