पर्यावरणविद राणा राम बिश्नोई का बुधवार को डबवाली पहुंचने पर बिश्नोई सभा ने किया भव्य स्वागत
डबवाली न्यूज़ डेस्क
पर्यावरणविद राणा राम बिश्नोई का बुधवार को डबवाली पहुंचने पर बिश्नोई सभा द्वारा भव्य स्वागत किया। बिश्नोई धर्मशाला में आयोजित समारोह में समाज की अनेक संस्थाओं ने राणाराम बिश्नोई को सम्मानित किया।इस दौरान उन्होंने धर्मशाला प्रांगण में पौधारोपण कर उपस्थित लोगों को पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। डबवाली पहुंचने के बाद राणाराम बिश्नोई सबसे पहले बिश्नोई धर्मशाला में बने गुरु जंभेश्वर मंदिर में जाकर माथा टेका। यहां स्वामी विवेकानंद व स्वामी इंद्रदास ने उन्हें तिलक लगाकर आशीर्वाद दिया। इसके बाद उन्होंने धर्मशाला में कम पानी में पनपने वाला कंकेडी का पौधा रोपित किया। लंबी उम्र का यह पौधा वह राजस्थान से ही अपने साथ लेकर आए थे। इसके बाद सम्मान समारोह का आयोजन किया जिसमें बिश्नोई सभा के सदस्यों ने सभा सचिव इंद्रजीत बिश्नोई व कोषाध्यक्ष अनिल धारणियां के नेतृत्व में स्मृति चिन्ह भेंट कर व शाल आदि ओढ़ा कर उनका सम्मान किया। इसके अलावा अखिल भारतीय जीव रक्षा सभा, बिश्नोई शहीद स्मारक समिति, अखिल भारतीय बिश्नोई युवा संगठन, अखिल भारतीय सेवक दल, अखिल भारतीय बिश्नोई कर्मचारी कल्याण समिति व जांभाणी साहित्य अकादमी की और से भी पर्यावरणविद् राणाराम बिश्नोई को सम्मानित किया गया। इस अवसर पर संबोधन में राणाराम बिश्नोई ने कहा कि पर्यावरण को संरक्षित रखना ही सबसे बड़ी धन है। अधिक से अधिक पौधे लगाकर ही पर्यावरण को आने वाली पीढिय़ों के लिए सुरक्षित रखा जा सकता है। पौधे लगाकर उनकी देखभाल करना भी बहुत जरुरी है। उन्होंने कहा कि यदि हम सब इस अहम जिम्मेदारी को निभाएंगे तभी आने वाले समय में लोग शुद्ध वातावरण में सांस ले पाएंगे। उन्होंने बताया कि वे राजस्थान के रेगिस्तान में पौधे लगाने के बाद दूर दराज से तालाबों अथवा नलकूप आदि से पहले ऊंट पर घड़ों मेें पानी लाते हैं और फिर घड़े को सिर पर रखकर उसे टिब्बे तक पहुंचाते थे ताकि वहां लगे पौधों को पानी से सिंचित कर पनपाया जा सके। उन्होंने बताया कि उनके इस प्रयास को भरपूर सफलता मिली और दूर-दूर तक दिखाई ेदेने वाला राजस्थान का रेगिस्तान भी हरा भरा हो गया। इस अवसर पर राणाराम बिश्नोई को हिसार लेकर आए पृथ्वी सिंह गिला को भी बिश्नोई सभा ने सम्मानित किया। दिल्ली बिशनोई धर्मशाला के कर्मचारी विनोद कुमार खीचड़ का भी सभा द्वारा शाल ओढाकर सम्मान किया गया। कार्यक्रम में बिश्नोई सभा डबवाली के सदस्य बनवारी लाल गोदारा ,सुरेन्द्र कुमार गोदारा ,मिठू राम थापन ,सतपाल खीचड़ , जीव रक्षा सभा के जिला अध्यक्ष एडवोकेट मुकेश कुमार धायल ,जंभेश्वर सेवक दल के प्रचार मंत्री राजेश ब खीचड़ ,रामकुमार धारणिया , रामकुमार लखुआना शहीद स्मारक समिति के सदस्य जीतराम पूनियां , शिवकुमार खीचड़ , दलीप कुमार कड़वासरा, युवा संगठन जिला अध्यक्ष नोबीसन बिशनोई, सदस्य संजीव कुमार धारनिया, योगेश रोहज, रवि कुमार, कर्मचारी कल्याण समिति सदस्य जगदीश रोहज, बस स्टैंड इंजार्ज, अध्यापक देवीलाल धारनियां ,रिटायर्ड प्रिंसिपल तुलसीराम सीगड़ ,आत्मा राम खीचड़ जांभाणी साहित्य अकादमी जिला अध्यक्ष इन्द्र जीत बिशनोई, राजेन्द्र कुमार देहडू , हनुमान खीचड़, परविंदर कड़वासरा , विक्रांत धारनिया सहित समाज के अनय गणमान्य लोग मौजूद थे।
इंद्रजीत बिश्नोई ने बताया कि पर्यावरणविद राणा राम बिश्नोई जोधपुर जिले के एकलखोरी गांव के रहने वाले हैं। राजस्थान के उस क्षेत्र में पानी की अत्याधिक कमी है लेकिन राणा राम बिश्नोई ने अपने पौधारोपण अभियान में बाधा नहीं बनने दिया। उन्होंने पौधे रेापित ही नहीं किए बल्कि अपने कंधों पर दूरदराज से घडों में पानी लाकर उन्हें पोषित भी किया। इस प्रकार उन्होंने गुरु जंभेश्वर भगवान के नियम 'जीव दया पालनी, रुंख लीलो नही धावेÓ पर चलते हुए अपना पूरा जीवन पर्यावरण के लिए समर्पित कर दिया। 61 वर्ष की उम्र तक उन्होंने करीब 50 हजार पौधे लगा कर और उनके पनपने तक पूरी देखभाल की। राणाराम बिश्नोई का यह उल्लेखनीय कार्य पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में एक मिसाल है। इसके लिए उन्हें दिल्ली में जंत्रमंत्र पर पूर्व केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी द्वारा भी सम्मानित किया गया। इंडिया टूडे मैग्जीन में राणा राम बिश्नोई की प्रेरक स्टोरी को अपने कवर पेज पर स्थान देकर उन्हें एक रियल हीरो के तौर पर सम्मान दिया। इसके अलावा उनके इस कार्य की देश विदेश में चर्चा है।
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