कौन बचा रहा है ईटीओ अनिल मलिक और टीआई हनुमान सैनी को?
कराधान आयुक्त हरियाणा के आदेशों की नहीं की जा रही पालना, ताक पर धरे आदेश
डबवाली न्यूज़ डेस्क
सिरसा। फर्जी फर्मों को पोषित करने के आरोपी आबकारी एवं कराधान विभाग के अधिकारियों को अब भी बचाने की कोशिशें जारी है।कराधान आयुक्त हरियाणा द्वारा 22 नवंबर 2019 को पत्र क्रमांक 3080 के माध्यम से आधा दर्जन अधिकारियों के खिलाफ पुलिस में आपराधिक मामला दर्ज करवाने के आदेश दिए गए थे। जिनमें से चार अधिकारियों के खिलाफ कराधान विभाग की ओर से 28 अक्टूबर 2020 को पुलिस में शिकायत दी गई, जिस पर सिविल लाइन सिरसा पुलिस ने आरोपी अधिकारियों के खिलाफ मामला दर्ज किया। लेकिन कराधान विभाग सिरसा के अधिकारियों ने तत्कालीन ईटीओ अनिल मलिक व तत्कालीन टीआई हनुमान सैनी के खिलाफ शिकायत नहीं दी बताई जाती है। जबकि कराधान आयुक्त हरियाणा द्वारा दिए गए आदेश पत्र में इन अधिकारियों के नाम का स्पष्ट उल्लेख है। यानि कराधान विभाग सिरसा के अधिकारी अब भी जानबूझकर फर्जी फर्मों के मामले में आरोपी बनाए गए अधिकारियों को बचाने की कोशिश की जा रही है।वर्णनीय है कि कराधान आयुक्त हरियाणा द्वारा अपने पत्र में तत्कालीन ईटीओ डीपी बैनीवाल, अनिल मलिक, मालाराम, अशोक सुखीजा, एईटीओ ओपीएस अहलावत, हनुमान सैनी टीआई के खिलाफ मामला दर्ज करवाने के आदेश दिए थे। कराधान विभाग सिरसा की ओर से इनमें से ईटीओ डीपी बैनीवाल, मालाराम, अशोक सुखीजा, एईटीओ ओपीएस अहलावत के नाम एफआईआर दर्ज करवाने के लिए पुलिस को लिखा। जबकि ईटीओ अनिल मलिक व टीआई हनुमान सैनी का जिक्र नहीं किया। इस प्रकार स्थानीय अधिकारियों ने अपने स्तर पर ही आरोपी बनाए गए अधिकारियों को बचाने का दुस्साहस किया है? इसका मतलब यह है कि कराधान आयुक्त हरियाणा के आदेशों की कराधान विभाग सिरसा के अधिकारियों को जरा भी परवाह नहीं है? वे कराधान आयुक्त हरियाणा से कहीं अधिक पॉवर रखते है? वे विभाग की बेहतरी कराधान आयुक्त हरियाणा से अधिक समझते है? सूत्र बताते है कि जिन अधिकारियों के खिलाफ मामले दर्ज करवाए गए है वे सेवानिवृत्त हो चुके है, जबकि ईटीओ अनिल मलिक अभी सेवा में है और विभाग में प्रभाव भी रखते है। यह भी अंदेशा लगाया जा रहा है कि यदि उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाई जाती है तो वे फर्जी फर्मों के मामले में अन्य भ्रष्ट अधिकारियों की संलिप्तता उजागर कर सकते है। संभवत: अधिकारियों द्वारा अपनी खाल बचाने के लिए ईटीओ अनिल मलिक और टीआई हनुमान सैनी के खिलाफ मामला दर्ज नहीं करवाया गया है। लेकिन उनके यह प्रयास कितने सार्थक होते है, इसका जल्द ही पता चल जाएगा। चूंकि पूरा मामला गृह मंत्री अनिल विज के संज्ञान में है, ऐसे में भ्रष्ट अधिकारियों व उनके समर्थकों का बच पाना मुश्किल है।
अन्य अधिकारी व कर्मचारी नहीं किए चिह्नित
कराधान आयुक्त हरियाणा द्वारा मामले में आधा दर्जन अधिकारियों के नाम का उल्लेख करने के साथ-साथ विभाग के उन अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ भी मामला दर्ज करवाने के आदेश दिए थे, जिनकी इसमें संलिप्तता थी। लेकिन 11 माह से अधिक का लंबा अरसा बीत जाने पर भी विभागीय अधिकारी फर्जी फर्मों के संचालकों से कनेक्शन रखने वालों को चिह्नित ही नहीं कर सकें। विभाग के अधिकारियों से यह अपेक्षा भी बेमानी साबित हो रही है, चूंकि वे कराधान आयुक्त द्वारा आरोपी बनाए गए ईटीओ अनिल मलिक और टीआई हनुमान सैनी के खिलाफ मामला दर्ज करवाने को ही तैयार नहीं है। तब अज्ञात अधिकारियों व कर्मचारियों के नाम कैसे मामला दर्ज होगा? विभागीय जांच में यह पाया जा चुका है कि विभाग के कर्मचारी व अधिकारी फर्जी फर्मों के सरगनाओं से संबंध बनाए हुए थे और उन्होंने नियमों को ताक पर धरकर सरकार को चपत लगवाई। विभाग में बैठे इन कर्मचारियों ने फर्जी फर्मों के सरगनाओं के लिए मुनीम का कार्य किया। उनकी फर्जी फर्मों की रिटर्न भरी और उन्हें लाभ पहुंचानेके लिए विभाग की ई-मेल से छेड़छाड़ की। विभागीय अधिकारियों की लाख कोशिश के बावजूद अब ऐसे भ्रष्ट अधिकारियों व कर्मचारियों का बच निकलना मुश्किल है, जोकि फर्जी फर्मों के सरगनाओं से मुधर संबंध बनाए हुए थे।
नियम विरुद्ध पहुंचाया लाभ
कराधान आयुक्त हरियाणा द्वारा अपने पत्र में ईटीओ अनिल मलिक को 5 'सीÓ फार्म, चार 'एफÓ फार्म गलत तरीके से देने का दोषी पाया। विभाग ने अपनी जांच में ईटीओ को विभाग की गाइडलाइन के विपरीत कार्य करते हुए पाया। फर्जी फर्मों की वजह से सरकार को 29 करोड़़ की चपत लगी। वहीं टीआई हनुमान सैनी के बारे लिखा गया है कि उसने मैसर्ज विनय ट्रेडिंग कंपनी को आरसी जारी करने में मदद की। वैट के रूल की पालना नहीं की, जिसके कारण सरकार को नुकसान हुआ।
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