डिप्टी सीएमओ डा. प्रमोद शर्मा व मेडिकल ऑफिसर डा. रोहित डूमरा को सूचना आयोग का शोकॉज नोटिस
15 फरवरी 2021 तक जवाब देने की मोहलत, 9 मार्च 2021 को चंडीगढ़ में होगी सुनवाई
डबवाली न्यूज़ डेस्क
सूचना का अधिकार अधिनियम की पालना न करने पर राज्य सूचना आयोग ने सिविल अस्पताल के राज्य जनसूचना अधिकारी-सह-डिप्टी सिविल सर्जन डा.प्रमोद शर्मा व मेडिकल ऑफिसर डा. रोहित डूमरा को सूचना आयोग ने शोकॉज नोटिस जारी किया है।आयोग ने अपने आदेश में कहा कि क्यों न उन्हें 250 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से 25 हजार रुपये का जुर्माना किया जाए। आयोग ने मामले में दोनों अधिकारियों को 15 फरवरी तक अपना लिखित जवाब देने की मोहलत दी है और 9 मार्च 2021 को आयोग के समक्ष व्यक्तिगत रूप से पेश होने के लिए कहा है। आयोग ने यह आदेश मंजु पुत्री पन्नाराम निवासी गीगोरानी की शिकायत पर दिया है। मंजु रानी ने आरटीआई एक्टिविस्ट पवन पारिक एडवोकेट के माध्यम से राज्य सूचना आयोग में 8 जुलाई 2019 को शिकायत की थी। जिसमें उसने बताया कि 24 मई 2019 को उसने सिविल सर्जन कार्यालय सिरसा से आरटीआई में जानकारी मांगी थी। विभाग की ओर से 3 जुलाई को आधा-अधूरा जवाब दिया गया। मामले की सुनवाई राज्य सूचना आयुक्त अरूण सांगवान द्वारा 2 दिसंबर 2019 को की गई। मामले में आयुक्त ने दोनों अधिकारियों से आरटीआई एक्ट के तहत निर्धारित समयावधि में सूचना प्रदान न करने का कारण पूछा। लेकिन अधिकारियों की ओर से आयोग के आदेश की पालना नहीं की गई। मामले की सुनवाई के लिए 15 अप्रैल 2020, 23 जून 2020 तथा 14 अक्टूबर 2020 को सुनवाई हुई। सूचना आयुक्त अरूण सांगवान ने मामले में अधिकारियों की ढिलाई को लेकर तलख टिप्पणी की और दोनों अधिकारियों से 250 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से 25 हजार रुपये जुर्माना क्यों न लगाए जाने बारे पूछा है। आयुक्त ने अपने आदेश में दोनों अधिकारियों को 15 फरवरी 2021 तक अपना लिखित जवाब देने की मोहलत दी है और 9 मार्च 2021 को व्यक्तिगत रूप से आयोग में हाजिर होने के आदेश दिए है।
ये मांगी थी सूचना
मंजु रानी निवासी गीगोरानी ने सिविल सर्जन कार्यालय सिरसा से आरटीआई में एक मेडिकल बोर्ड के गठन बारे जानकारी मांगी थी। पूछा गया था कि चौपटा पुलिस थाना में दर्ज अभियोग के अनुसार स्वास्थ्य विभाग द्वारा मेडिकल बोर्ड गठित किया गया था या नहीं। मेडिकल बोर्ड के गठन बारे पुलिस विभाग से हुए पत्राचार की प्रतियां मांगी गई थी। मंजु रानी ने मेडिकल बोर्ड अथवा रिमेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट की प्रति मांगी थी।
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