सरकार द्वारा भारी पुलिस बल के साथ सड़कों को तुडवाकर बड़ी-बड़ी खाईयां खुदवा कर सड़के जाम कराना देश में पहला उदाहरण है - बजरंग गर्ग

डबवाली न्यूज़ डेस्क 
चण्डीगढ़- अखिल भारतीय व्यापार मंडल के राष्ट्रीय महासचिव व हरियाणा प्रदेश व्यापार मंडल के प्रांतीय अध्यक्ष बजरंग गर्ग ने किसान नेताओं से बातचीत करने के उपरांत कहा कि केंद्र व हरियाणा सरकार ने किसानों का शांतिप्रिय आंदोलन को कुचलने के लिए भारी पुलिस बल के साथ सड़कों को तोड़कर बड़ी-बड़ी खाई खोद कर पुलिस द्वारा सड़कों को जाम करने का देश में पहला उदाहरण है। सरकार के इशारे पर किसानों पर लाठीचार्ज करके किसान नेताओं पर झूठे मुकदमे दर्ज करना सरकार का तानाशाही रवैया का जीता जागता सबूत है जबकि पुलिस अधिकारियों द्वारा निहतें किसानों पर लाठीचार्ज करने व आंसू गैस के गोले छोड़ने वालों को गिरफ्तार करके सरकार को उन पर मुकदमा दर्ज करना चाहिए था। राष्ट्रीय महासचिव बजरंग गर्ग ने कहा कि प्रदेश की जनता के पैसों से बनी सड़कों को सरकार के इशारों से तोड़ने व नेशनल हाईवे जाम करने के लिए सरकार में बैठे दोषी लोगों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए नुकसान की भरपाई की जाए। श्री गर्ग ने कहा कि केंद्र व हरियाणा सरकार द्वारा किसान, आढ़ती व मजदूर आंदोलन को कुचलने के लिए सभी प्रकार के ओच्छे हथकंडे अपनाने के बावजूद भी किसान आंदोलन को विफल करने में सरकार पूरी तरह नाकाम रही है। किसान देश का अन्नदाता है। जिस प्रकार केंद्र व हरियाणा सरकार किसान व आढ़तियों के साथ ज्याति कर रही है। उससे यह साफ सिद्ध हो जाता है कि यह सरकार किसान, आढ़ती, मजदूर व आम जनता विरोधी सरकार है जो अपने चहेतों को लाभ पहुंचाने के लिए किसान, आढ़ती व मजदूरों को बर्बाद करने पर तुली हुई है। राष्ट्रीय महासचिव बजरंग गर्ग ने कहा कि सरकार का तानाशाही फरमान तीन कृषि काले कानून को देश व प्रदेश का किसान, आढ़ती व मजदूर किसी भी कीमत पर नहीं मानेगा, जब तक सरकार तीन कृषि काले कानून को वापिस नहीं लेती तब तक देश व प्रदेश के किसान, आढ़ती व मजदूरों का आंदोलन जारी रहेगा। राष्ट्रीय महासचिव बजरंग गर्ग ने कहा कि केंद्र व हरियाणा सरकार द्वारा किसानों पर सभी ओच्छे हथकंडे अपनाने के बावजूद किसानों का दिल्ली प्रवेश करना तो एक ट्रेलर है पूरी फिल्म तो अभी बाकी है। श्री गर्ग ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अपील की है कि वह अपना तानाशाही रवैया को छोड़कर देश के किसान, आढ़ती, मजदूर व आम जनता के हित में तीन कृषि काले कानून को तुरंत वापिस ले और किसान की हर फसल एमएसपी रेटों पर आढ़ती के माध्यम से खरीदने का गारंटी कानून बनाएं। बड़े अफसोस की बात है कि केंद्र सरकार किसान की फसल एमएसपी पर खरीद करने का कानून ना बनाने पर क्यों अड़ी हुई है। इसका मतलब साफ है कि केंद्र सरकार के नियत में खोट है जो देशहित में नहीं है।
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