डबवाली अग्नि त्रासदी पर रिटायर्ड आइपीएस अनिल राव ने भेजी अपनी संवेदनाएं
Dabwalinews.com
रिटायर्ड आइपीएस अनिल राव बेशक कहीं भी हो, डबवाली अग्नि त्रासदी की बरसी पर संवेदनाएं व्यक्त जरुर करते हैं। पिछले दिनों सीएम मनोहर लाल ने उन्हें पब्लिक सेफ्टी, ग्रीवेंस और गुड गवर्नेंस एडवाइजर बनाया था। वे सीएम विंडो के ओवरऑल इंचार्ज हैं। अग्नि त्रासदी की 25वीं बरसी पर उन्होंने फूलों के रुप में अपनी संवेदनाएं भेजी।डबवाली निवासी सुनील मेहता ने राव की ओर से स्मारक पर श्रद्धांजलि अर्पित की। अनिल राव ने कहा कि वे 23 दिसंबर 1995 को डबवाली आकर श्रद्धांजलि देना चाहते थे। किसी कार्यवश वे नहीं पहुंच पाए। स्मारक पर चल रही लाइब्रेरी के लिए आवश्यक पुस्तकों की सूची मांगी है। उनका कहना है कि वे पुस्तकें उपलब्ध करवाएंगे।अनिल राव खुद डबवाली अग्निकांड पीडि़त हैं। दिसंबर 1995 में अनिल राव बतौर डीएसपी डबवाली में तैनात हुए थे। उन्होंने अपनी इकलौती पांच वर्षीय बेटी सुरभि को डीएवी स्कूल में दाखिल करवाया था। उन्हें डबवाली आए हुए चार ही दिन बीते थे कि अग्निकांड ने सबकुछ छीन लिया। राव अपनी बेटी के साथ 23 दिसंबर 1995 को डीएवी स्कूल के वार्षिक उत्सव में शामिल हुए थे। अग्निकांड ने उनकी इकलौती बेटी को सदा-सदा के लिए उनसे छीन लिया था। वे खुद अन्य बच्चों को बचाते हुए 40 फीसद तक झुलस गए थे। उपचार के लिए उन्हें पीजीआइ चंडीगढ़ लेजाया गया था।डबवाली अग्नि पीडि़त संघ के प्रवक्ता विनोद बांसल ने बताया कि 25 साल पहले डबवाली में हुए अग्निकांड को इतिहासकारों ने भीषणतम अग्नि त्रासदी माना है। त्रासदी पीडि़तों ने अपने हौसले से बहुत ऊंचा मुकाम हासिल किया है। जिनमें से अनिल राव एक हैं। मूल रुप से गुरुग्राम के रहने वाले अनिल राव की सफलता की कहानी प्रत्येक अग्निकांड पीडि़त को आगे बढऩे के लिए प्रेरित करती है। वे किसी भी ओहदे पर पहुंच जाएं, लेकिन डबवाली अग्निकांड पीडि़तों के साथ बिताए पलों को वे कभी नहीं भूलते। पीडि़तों से वे सुख-दु:ख सांझा करते हैं। 31 जुलाई 2020 को वे सेवानिवृत्त हुए थे।
Source Link - Press Release
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