मिड-डे मिल वर्कर के 'चूल्हे हुए ठंडे , 6 माह से कर रहे वेतन का इंतजार, 32 हजार से अधिक वर्कर प्रभावित

Dabwalinews.com
प्रदेश सरकार द्वारा 15 अगस्त 1995 से शुरू की गई मिड-डे मिल के वर्कर-कम-सहायकों के परिवार इन दिनों गर्दिश में है।वर्करों को पिछले 6 माह से वेतन नहीं मिला है, ऐसे में उनके समक्ष अनेक परेशानियां खड़ी हो रही है। सरकारी व सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में लगभग 32 हजार मिड-डे मिल वर्कर कार्यरत है। ऐसे में अगस्त-2020 के बाद वेतन प्राप्त न होने से उनके रसोई के चूल्हे ठंडे हो चले है। रिश्तेदारों व जान-पहचान वालों से उधारी भी अब मिलनी बंद हो गई है।सरकार की ओर से सरकारी व सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में बच्चों को दोपहर को भोजन उपलब्ध करवाने के लिए मिड-डे मिल योजना शुरू की गई थी। ताकि पौष्टिक आहार से उनका तन व मन तंदुरुस्त हो सकें। इस योजना को क्रियान्वित करने के लिए स्कूलों में मिड-डे मिल तैयार करने वाले वर्करों की नियुक्ति की गई। शुरूआत में इन वर्करों को मानदेय के रूप में 2500 रुपये ही दिए गए। लेकिन कई बार आंदोलन करने के बाद सरकार ने वर्ष 2018 में मानदेय में 1000 रुपये की बढ़ौतरी करके इसे 3500 रुपये प्रति माह किया। वर्तमान में मिड-डे मिल वर्करों को 3500 रुपये ही हासिल हो रहे है। बताया जाता है कि सरकार की ओर ग्रांट न आने के कारण अगस्त-2020 के बाद इन मिड-डे मिल वर्करों को इस राशि की भी अदायगी नहीं की गई है। पिछले छह माह से मिड-डे मिल वर्कर जैसे-तैसे अपना और अपने परिवार का पालन पोषण कर रहे है, लेकिन अब स्थिति पूरी तरह से ढांवाडोल हो चली है।
18 हजार वेतन की मांग
 मिड-डे मिल वर्करों की ओर से लगातार अपनी मांगों को लेकर आंदोलन चलाए जाते रहे है। कर्मचारी संगठनों की ओर से मिड-डे मिल वर्करों का वेतन 18 हजार रुपये मासिक किए जाने की मांग की जाती रही है। जबकि हालात यह है कि उन्हें 3500 रुपये प्रति माह हासिल होने में भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
 डिप्टी सीएम की कोठी का करेंगे घेराव : भाकर
सर्व कर्मचारी संघ के जिला सचिव राजेश भाकर ने कहा कि जिला में मिड-डे मिल वर्करों को पिछले 8 माह से वेतन नहीं मिला है। जिसके कारण उनमें भारी रोष है। उन्होंने बताया कि सर्व कर्मचारी संघ द्वारा मिड डे मिल वर्करों की समस्या के समाधान के लिए 12 फरवरी को सिरसा में डिप्टी सीएम की कोठी का घेराव किया जाएगा।

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