श्रद्धांजलि समारोह पर विशेष-महान व्यक्त्वि के मालिक थे मास्टर के दिलवार

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कला साहित्य का दर्पण है,और रंगकर्मी अपने रंगकर्म से उस दर्पण में समाज की तस्वीर में रंग भरता है। आसपास के क्षेत्र में शायद ही ऐसा कोई व्यक्ति होगा जो मास्टर कुरड़ा राम पंवार जो आज हमारे बीच नही रहे लेकिन उनकी अमिट छाप हमारे दिलो में प्रेरणा बनकर हमारे दिलों में बसी रहेगी।मास्टर कुरड़ा राम जी जैसी महान शख्सियत का नाम बड़े आदर और मान के साथ उनका नाम ना लेता हो। चाहे वो रामलीला का मंच हो या कोई भी समाज सेवा का कार्य हो जहां पर मास्टर जी के नाम की चर्चा ना हो। मास्टर कुरड़ा राम जो कि मा. के दिलावर के नाम से जाने जाते रहे है। रविवार की वो काली रात जिसने हमसे हमारे मास्टर जी को सदा के लिए छीन लिया। आज बेशक हमारे बीच मास्टर के दिलावर जी नही रहे लेकिन उनकी मधुर याद को कभी भुला नही सकता । मास्टर के दिलावर एक महान व्यक्तित्व के मालिक थे । शहर का ऐसा कोई भी मंच नही था जिसमें मास्टर जी की भागीदारी नही होती थी। उन्होने हमेशा धर्मिक,समाजिक संस्थाओं को अपना पूरा सहयोग दिया। मास्टर जी ने जवानी से लेकर अंतिम समय तक का सफर समाज की सेवा में लगाया। उन्हे कई बार विभिन्न संस्थाओं के अलावा प्रशासन ने भी उनके उत्कृष्ट प्रदर्शन पर सम्मानित किया। मास्टर के दिलवार ने अपने जीवन में कई किरदार निभाए । सर्वप्रथम उन्होने अपने पूरे परिवार को एक लड़ी में पिरोकर रखा उनके दुख सुख में उनका पूरा परिवार एक साथ खड़ा रहा। मास्टर जी ने डबवाली में वर्ष 1960 में भगवान राम की लीला का मंचन आरंभ किया जो आज भी उनकी प्रेरणा से जारी है। मास्टर जी के जीवन में ऐसे कई दुख के पहाड़ टूटे लेकिन उन्होने एक चट्टान की तरह उनका मुकाबला किया । एक समय ऐसा भी आया कि मास्टर जी अपने रिश्तेदारी में बीकानेर गए हुए थे कि अचानक वहां पर उन्हे ऐसा अटैक आया जिसमें मास्टर जी की आवाज तक चली गई लेकिन इस पर भी मास्टर जी ने अपना होंसला नही टूटने दिया और इसको भागवान का रजा़ मान कर सहन कर लिया । लेकिन राम नगर नाट्यशाला के मंच को सर्मपित मास्टर जी की सेवा से ऐसा चमत्कार हुआ कि रामलीला के मंच पर ही उनकी आवाज आपस लोट आई। 
इस पर मुझे एक शेयर याद आता है कि
सपने उनके पूरे होते है,जिनके सपनों में जान होती है।
पंखों से कुछ नही होता, होंसलों से ही उड़ान होती है।
मास्टर के दिलावर ने रामलीला के मंच पर ऐसे कई कलाकार पैदा किए जिन्होने फिल्मी दुनिया में पहुंच कर रामलीला के मंच के साथ-साथ अपने परिजनों का नाम रोशन किया।मास्टर जी ने भी रामलीला के मंच पर कई किरदार निभाए जिसमें राजा दशरथ का किरदार आज भी लोगों के दिलों पर छाया हुआ है उनकी दमदार आवाज से डायलॉग बोलने का अंदाज कमाल का था। लेकिन अब उनकी वो दमदार आवाज एक याद बन कर रह गई। मास्टर जी रामलीला के दौरान कलाकारों के मेकअप से लेकर वेशभूषा तक का ख्याल रखते थे। मास्टर जी के जीवन में एक ऐसी घटना घटी भी घटी जिसमेंं एक सड़क हादसे में मोत के मुंह से निकलकर आए लेकिन उनके साथ रामलीला मंच के कर्ताधर्ता स्व. आर के चलाना व उनकी भतीजी की मौत हो गई। ये हादसा वर्ष 1983 में चण्डीगढ़ जाते हुए हुआ था। मास्टर जी का जन्म अप्रैल 1944  को डबवाली की मसीत के पास श्री गोंबिद राम के घर हुआ और उन्होने वर्ष 1964 में राजकीय प्राथमिक पाठशाला मेंं बतोर शिक्षक के पर तेनात हुए और अपनी 39  वर्ष की बेदाक सेवा के बाद सेवामुक्त हुए ।

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