कोरोना को जिंदादिली से मात दे रहें जिलावासी,पिछले सप्ताह 1702 मरीज स्वस्थ होने पर हुए डिस्चार्ज

Dabwalinews.com

कोरोना ने अपना विकराल रूप दिखाया हुआ है। लेकिन इस महामारी से जंग जीती जा सकती है। हौंसला बनाए रखने की जरूरत है।
जिस प्रकार का माहौल बना हुआ है, उस माहौल से ही भय लगने लगता है। जबकि हरेक में कोरोना से लडऩे की शक्ति है। यदि पीडि़त इस शक्ति को जीवित रखता है, तो इस जंग को भी बखूबी जीत सकता है। कोरोना के खिलाफ जंग में वासियों की जिंदादिली किसी से कम नहीं है। पिछले एक सप्ताह के आंकड़े यह बयान कर रहे है कि किस प्रकार सिरसा के लोगों ने कोरोना को मात दी है। अप्रैल माह के अंतिम सप्ताह में 1702 मरीज स्वस्थ होकर डिस्चार्ज हुए है। औसतन 250 मरीजों ने हर रोज इस बीमारी को मात देने में कामयाबी हासिल की है। ऐसे में कोरोना से जंग में हौंसला बनाए रखें। बीमारी से घबराने की जरूरत नहीं है, बल्कि इसका उपचार करवाने के लिए कदम बढ़ाने की जरूरत है। यह भी एक रोचक पहलू है कि अधिकांश मरीजों ने घर पर आइसोलेट होकर इस जंग को जीता है। जब दूसरे कर सकते है, तब आप भी इस जंग को जीत सकते है। इसलिए दिल में हौंसला बनाए रखें और भ्रामक सूचनाओं पर ध्यान न दें।

 एक सप्ताह में डिस्चार्ज हुए मरीजों का ब्यौरा

 दिनांक संख्या

24 अप्रैल 140

25 अप्रैल 219

26 अप्रैल 232

27 अप्रैल 252

28 अप्रैल 198

29 अप्रैल 359

30 अप्रैल 302

कुल डिस्चार्ज मरीज : 1702

3 लाख से अधिक सैंपल जांचें

 स्वास्थ्य विभाग की ओर से सिरसा जिला में तीन लाख से अधिक लोगों के सैंपल जांचें जा चुके है। राहत वाली बात यह है कि जब महानगरों में पॉजिटिविटी रेट 25 से 30 प्रतिशत तक पहुंचा हुआ है, वहीं जिलावासी अपनी जीवटता की वजह से इस रेट को 4.74 प्रतिशत पर ही थामने में कामयाब हुए है। इसका मतलब है कि 100 में से 4-5 लोग ही संक्रमित मिल रहे है। ऐसे में घबराने की जरूरत नहीं है। 

बेजोड़ है सरकारी सेवा

कोरोना का लक्षण दिखाई देने पर देर न करें। बल्कि अविलंब सरकारी अस्पताल पहुंचें। सैंपल देने के लिए आधा घंटा इंतजार करना पड़ सकता है। लेकिन महामारी से लडऩे का रास्ता आसान हो जाएगा। यदि रिपोर्ट पॉजिटिव भी आती है, तब स्वास्थ्य विभाग की ओर से जो दवाएं उपलब्ध करवाई जा रही है, वे बेजोड़ है। वे रामबाण की भांति काम करती है और मरीज दूसरे-तीसरे दिन में ही आराम महसूस कर रहा है। दिक्कत उनके साथ अधिक आ रही है, जोकि जांच करवाने में देरी कर रहे है। देरी करने पर बीमारी जटिल हो रही है और जटिलता की वजह से ही मरीज आक्सीजन की कमी महसूस कर रहे है। सैंपल देने के बाद स्वास्थ्य विभाग द्वारा फोन पर ही रिपोर्ट दी जाती है। होम आइसोलशन में रहने वाले मरीजों को घर द्वार पर ही किट प्रदान की जा रही है। ऐसे में मरीजों को अविलंब जांच के लिए सामने आना चाहिए। शुरूआत में ही उपचार शुरू करवाकर कोरोना को आसानी से मात दी जा सकती है।

1.92 लाख ने पहना 'कवचÓ!

 कोरोना से बचाव के लिए चलाए जा रहे वैक्सीनेशन अभियान के तहत सिरसा जिला के एक लाख 92 हजार 931 लोगों द्वारा टीका लगवाया जा चुका है। जिसमें से एक लाख 56 हजार 266 लोगों द्वारा पहली डोज लगवाई गई है। जबकि 3665 लोगों द्वारा वैक्सीन की दूसरी डोज भी लगवाई जा चुकी है। वैक्सीन लेने वालों पर कोरोना घातक प्रभाव नहीं डाल सकता। ऐसे में जिलावासियों ने प्रदेश के अन्य जिलों के मुकाबले टीकाकरण अभियान में अधिक सहयोग करके सुरक्षा कवच धारण करने का कार्य किया है। ऐसे में यह तय है कि हम कोरोना को अवश्य ही मात देंगे।

समझ रहें एकदूसरे का दर्द

भौतिकतावाद की अंधी दौड़ में लोग भागमभाग में लगे हुए है। लोगों को आसपड़ौस का भी ख्याल नहीं था। परिवारों में भी दूरियां आ रही थी। लेकिन कोरोना महामारी ने लोगों का दर्द महसूस करने पर मजबूर कर दिया है। स्थिति यह है कि बिन कहें भी लोग दूसरों का दर्द महसूस कर रहे है। क्योंकि इन हालात में हरेक पीड़ा को सहकर ही आगे बढ़ रहा है। अनेक लोग बिन कहें भी मदद के लिए हाथ आगे बढ़ा रहे है। जिसके कारण समाज में भी बदलाव आना तय है। भाईचारा अधिक मजबूत होगा। 

इनका योगदान भी सराहनीय

 कोरोना के खिलाफ जंग में अनेक चेहरे ऐसे है, जोकि पर्दे के पीछे से सहयोग कर रहे है, मगर इनका योगदान भी कम नहीं है। कोरोना टेस्ट लेने वाले स्वास्थ्य कर्मी हो या उपचार करने वाले चिकित्सक। घरों तक निर्बाध विद्युत आपूर्ति करने वाले निगम कर्मचारी हो या पीने का पानी आपूर्ति करने वाले। सफाई व्यवस्था में जुटे सफाई कर्मचारी। व्यवस्था बहाली में जुटे पुलिस अधिकारी हो या प्रशासनिक अधिकारी। हरेक द्वारा अपना 100 प्रतिशत देने का प्रयास किया जा रहा है। जिला में उपायुक्त प्रदीप कुमार, पुलिस अधीक्षक भूपेंद्र सिंह, डीएसपी आर्यन चौधरी, एसडीएम जयवीर यादव के अलावा अन्य अधिकारी-कर्मचारी दिनरात व्यवस्था बहाली में जुटे है। ऐसे में विपदा की इस घड़ी में पर्दे के पीछे सेवा कार्य में जुटे लोगों के योगदानको बिसराया नहीं जा सकता।

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