'लम्हों ने खता की, सदियों ने सजा पाई'....वीआईपी ही तोड़ रहे सोशल डिस्टेंसिंग के नियम, कैसे थमेगा कोरोना का संक्रमण.

Dabwalinews.com
शायर मुज्जफर इस्लाम रजमी की लिखी ये पक्तिंया, 'लम्हों ने खता की थी, सदियों ने सजा पाईÓ वीआईपीज द्वारा सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों की उल्लंघना के मामले में सटीक बैठती है। कोरोना कहर बरपा रहा है। सरकार को लॉकडाऊन जैसा कठोर कदम उठाना पड़ा है।लोगों के कारोबार ठप हो चुके है। पेट भरने के लाले पड़े है। लेकिन कोरोना संक्रमण की चेन तोडऩे के लिए सभी चुपचाप सह रहे है, क्योंकि मौत से सामना है। जनता लॉकडाऊन के नियमों की पालना कर रही है। मुंह पर मास्क पहन रही है। न पहनने वालों को चालान काटा जा रहा है। सोशल डिस्टेंसिंग की पालना की जा रही है। शादी-विवाह, मृत्यु की स्थिति में भी संख्या पर अंकुश लगा दिया गया है। लोग सरकार की हर हिदायत की पालना कर रहे है। मगर, प्रभावशाली लोगों द्वारा नियमों की पालना नहीं की जा रही। चूंकि कोरोना के मामले में एक भी व्यक्ति की ढिलाई पूरे परिवार व समाज के लिए नुकसानदेह साबित हो सकती है। यानि कुछ लोगों की वजह से तमाम लोगों को नुकसान उठाना पड़ सकता है। जो लोग नियमों की पालना कर रहे है, उन्हें भी दंड सहना पड़ता है। यदि सभी नियमों की पालना करेंगे तो कोरोना संक्रमण की दर को रोका जा सकेगा। कोरोना पर रोकथाम लगेगा तो जनजीवन सामान्य हो पाएगा। लॉकडाऊन खत्म होगा और जीवन पटरी पर लौटेगा। लोगों को रोजगार मिलेगा, उनके पेट भरने का जुगाड़ हो सकेगा। लेकिन यदि कुछ लोग लापरवाही बरतते रहेंगे और कोरोना का संक्रमण बढ़ता रहेगा, तब लॉकडाऊन को आगे भी बढ़ाना पड़ सकता है। यानि इसका खामियाजा हरेक को भुगतना पड़ेगा। सरकार की हरसंभव कोशिश है कि कोरोना पर जीत हासिल करने के लिए हरेक नियमों की पालना करें। इसलिए पुलिस व प्रशासन द्वारा दिन-रात प्रयास भी किए जा रहे है। हरेक नागरिक की यह जिम्मेवारी भी है कि कोरोना की जंग सामूहिक रूप से ही लड़ी जाएगी और इस जीत का हरेक को लाभ होगा। चंद लोगों की लापरवाही भी समूचे समाज को नुकसान पहुंचा सकती है।

बिजली मंत्री की उपस्थिति में उड़ी सोशल डिस्टेंसिंग की धज्जियां

कोरोना महामारी पर रोकथाम लगाने के लिए प्रदेश सरकार की ओर से रानियां से विधायक एवं प्रदेश के बिजली मंत्री चौ. रणजीत सिंह को सिरसा व फतेहाबाद जिलों की अहम जिम्मेवारी सौंपी गई है। वे वरिष्ठ नेता है और अनुभवी भी। उनके कुशल मार्गदर्शन में कोरोना के खिलाफ लड़ाई में सिरसा व फतेहाबाद जिलों ने काफी सफलता भी हासिल की है। उनके आह्वान पर विभिन्न समाजसेवियों द्वारा की गई मदद से आक्सीजन कंसट्रेटर भी मुहैया करवाए गए है। इन्हीं समाजसेवियों के साथ मीटिंग में वीरवार को सोशल डिस्टेंसिंग की धज्जियां उड़ी। एक-दूसरे से सटे लोग फोटो खिंचवाने में मस्त दिखाई दिए। किसी को भी इसकी जरा भी परवाह नहीं रही कि वे कोरोना के खिलाफ जंग के लिए एकजुट हुए है? वैसे तो इतनी भीड़ जुटाने की भी जरूरत नहीं थी। चूंकि सरकार की ओर से तमाम ऐसी गतिविधियों पर रोक लगाई हुई है, जिसमें भीड़ जुटें। विवाह के लिए भी केवल 11 लोगों की मंजूरी है, वो भी घर पर। अंतिम यात्रा में भी संख्या सीमित की गई है। मगर, वीरवार को सीडीएलयू के सभागार में भारी भीड़ जुटा ली गई। जिनमें अनेक ऐसे चेहरे भी शुमार रहें, जिनका दान-दक्षिणा से कोई वास्ता नहीं था। चौ. रणजीत सिंह का आरएमपी के साथ मीटिंग लेने की मजबूरी समझ में आती है, लेकिन आक्सीजन कंसीटे्रटर भेंट करने वालों की भीड़ जुटाना और सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों की पालना न करना बड़ी चूक मानी जाएगी। आखिर ऐसी लापरवाही कैसे बरती जा सकती है? श्री सिंह बड़े अनुभवी नेता है और दबंग भी। उन्हें तो वक्त के हालात देखकर सोशल डिस्टेंसिंग की पालना करवानी ही चाहिए थी? क्या प्रदेश में कानून सभी के लिए एक समान नहीं है?

की जोर गरीबां दा!

पुलिस हो या प्रशासन, हरेक का जोर केवल गरीब, मजबूर पर ही चलता है। किसी की बेबसी का मजाक भी उड़ाने में देर नहीं की जाती। सारा रौब निर्बल पर ही चलता है। असरदार लोगों को अनदेखा कर दिया जाता है। सब्जी मंडी में उमडऩे वाली भीड़, बिना मास्क और सोशल डिस्टेंसिंग की पालना में विफलता के लिए किसे जिम्मेवार ठहराया जाएगा? भादरा बाजार में उमड़े व्यापारियों व मजदूरों की सोशल डिस्टेंसिंग को भी अनदेखा कर दिया गया? अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन करने वाले किसानों को तो जिला प्रशासन तो क्या प्रदेश सरकार भी अनदेखा करने के लिए मजबूर है? ऐसे में सारे नियम-कायदे केवल मजबूर, गरीब व आम आदमी के लिए ही बने है। उस पर ही शासन-प्रशासन का सोशल डिस्टेंसिंग, मास्क न पहनने, लॉकडाऊन का उल्लंघन करने का डंडा चलता है।

No comments:

IMPORTANT-------ATTENTION -- PLEASE

क्या डबवाली में BJP की इस गलती को नजर अंदाज किया जा सकता है,आखिर प्रशासन ने क्यों नहीं की कार्रवाई