दुबई में भी है मनोज के किन्नू की डिमांड, बागवानी कर कमा रहे मुनाफा
Dabwalinews.com
प्रदेश सरकार की फसल संबंधी विभिन्न योजनाओं के चलते किसानों का फसल विविधिकरण की ओर रूझान बढ रहा है। अब किसान बागवानी को अपनाकर आर्थिक रूप से सुदृढ बन रहे हैं।बागवानी से न केवल किसान अपनी आय में इजाफा कर रहे हैं, बल्कि ड्रिप सिंचाई विधि अपनाकर पानी बचत करके सरकार की जल बचाओ मुहिम को भी मजबूती दे रहे हैं। राजस्थान बॉर्डर से लगते जिला के गांव खारी सुरेरा के मनोज कुमार किन्नू व सीट्रस की बागवानी करते है। उनके किन्नू की गुणवत्ता ऐसी कि दुबई तक उनके किन्नू जाते हैं।मनोज ने बताया कि वे कई वर्षों से बागवानी कर रहे हैं। इस कार्य में बागवानी व कृषि विभाग का काफी सहयोग मिला है। विभिन्न योजनाओं के लाभ के चलते वे सफल बागवानी कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि वे किन्न व सीट्रस की बागवानी करते हैं। फल उत्कृष्टता केंद्र मांगेआना से किन्नू का बीज लिया था। गुणवत्ता अच्छी होने के चलते दुबई तक उनके किन्नू की डिमांड है। उन्होंने बताया कि उन्होंने एसओपी भी बनाया हुआ है, जिसके साथ करीब 200 किसान जुड़े हुए हैं। बागवानी में ड्रिप विधि से सिंचाई की जाती है, जिससे पानी की बचत भी होती है और अधिक पैदावार भी। इसके अलावा वे गोभी, तरबूज आदि सब्जियों की भी खेती कर रहे हैं। इन्हीं की तरह गांव गंगा के पंकज कुमार भी किन्नू व अंजीर की बागवानी कर अच्छी खासी कमाई कर रहे हैं। वे चार एकड़ में बागवानी करते हैं। उन्होंने अपने खेत में सोलर सिस्टम लगाया हुआ है, जिससे वे ड्रिप सिंचाई करते है। इन किसानों का मानना है कि धान की जगह वैकल्पिक खेती व बागवानी करके किसान न केवल अपनी आमदनी बढा सकते हैं, बल्कि पानी की भी बचत कर सकते हैं।
मनोज की तरह ऐसे बहुत से किसान हैं, जो बागवानी की ओर अग्रसर हुए हैं और आज दूसरे किसानों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन रहे हैं। किसान रामचंद्र कंबोज करीब 12 एकड़ में पिछले 16 साल से बागवानी कर रहे हैं। उनका बागवानी में अच्छा खास अनुभव है, जिससे वे एक सफल बागवानी किसान है। बागवानी के साथ-साथ किसान फसल विविधिकरण को अपनाकर पानी बचत के साथ अपनी आमदनी को बढा रहे हैं। जिला के गांव चौटाला के जनकराज जो पहले 15 एकड़ की धान की खेती करते थे। अब धान को छोडकर 10 एकड़ में नरमा की फसल की बिजाई करके अच्छी पैदावार ले रहे हैं। ऐसा करके वे सरकार की मेरा पानी मेरी विरासत स्कीम का लाभ उठा रहे हैं, जिसके तहत 7000/- रू प्रति एकड़ से प्रोत्साहन राशि प्राप्त हुई है। इसी गांव के गौरव कुमार पुत्र कृष्ण कुमार सहारण ने भी धान को छोड़कर वैकल्पिक खेती करके सरकार की योजना का लाभ उठाते हुए पानी बचाओ मुहिम में सहयोगी बना है। वे जिस 6 एकड़ पर धान की खेती करते थे, अब नरमा की फसल की बिजाई की है। इसी प्रकार गांव पन्नीवाला मोटा का राजपाल पुत्र रणजीत सिंह 5 एकड़, गांव तिलोकेवाला का कुलदीप सिंह पुत्र गुरदेव सिंह 3 एकड़, जगतार सिंह पुत्र श्री दविन्द्र सिंह 4 एकड में धान की जगह नरमा की फसल की खेती कर रहे हैं। इन सभी किसानों ने धान की जगह वैकल्पिक खेती करके न केवल सरकार की मेरा पानी-मेरी विरासत योजना का लाभ उठाया है, बल्कि पानी बचत की दिशा में भी कदम बढाया है।
हरियाणा सरकार द्वारा मेरा पानी मेरी विरासत योजना खरीफ-2021 के तहत धान की बिजाई का क्षेत्रफल कम करने, गिरते भू-जल स्तर को बचाने एंव ज्यादा से ज्यादा किसानों को जागरूक/प्रेरित करने हेतू जिला सिरसा को 29010 एकड़ का लक्ष्य दिया गया है। इस स्कीम के अनुसार जो किसान धान फसल की बजाए वैकल्पिक फसल जैसे मक्का, कपास, अरहर, मूंग, ग्वार, तिल, मूंगफली, मोठ, उडद, सोयाबीन व चारा तथा प्याज की फसल की काष्त करने पर रू0 7000/- प्रति एकड प्रोत्साहन राषि दी जायेगी। योजना के लाभ के लिए किसान मेरा पानी मेरी विरासत तथा मेरी फसल मेरा ब्यौरा पोर्टल पर पंजीकरण 25 जून तक पंजीकरण करवा सकते हैं।
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