फल व सब्जियों की खुद मार्केटिंग करके कमा रहे लाखों, दूसरे किसानों के लिए भी बन रहे प्रेरणा स्रोत

Dabwalinews.com
अपने उत्पादों की स्वयं मार्केटिंग की जाए तो पैदावार से अधिक मुनाफा कमाया जा सकता है। कई प्रगतिशील किसानों ने ऐसा करके भी दिखाया है।इन्हीं किसानों में रामपुरा ढिल्लों के बीएपास युवा सतीश कुमार भी शामिल हैं, जो अपने किन्नू फल की स्वयं मार्केटिंग करके लाखों रुपये कमा रहे हैं। सतीश की तरह ही बहुत से किसान है, जोकि अपने उत्पादों की स्वयं मार्केटिंग करके लाखों की आमदनी ले रहे हैं। सिरसा के गांव रामपुरा ढिल्लों के सतीश बीए पास हैं। उनका 30 एकड़ में किन्नू का बाग है। सतीश अपने किन्नू फलों की खुद मार्केटिंग करते हैं। किन्नू को प्लास्टिक करेटस में भरकर बाहर भेजते हैं। उन्होंने बताया कि उनका किन्न हरियाणा, राजस्थान तथा दिल्ली के विभिन्न स्थानों पर जाता है। सतीश ने उसने 30 एकड़ किन्नू के बाग से 94 लाख रुपये की आमदनी ली है। खुद की मार्केटिंग से होने वाले फायदे से प्रभावित होकर अब तक 10 और किसान भी अपने उत्पादों की स्वयं मार्केटिंग करने लगे हैं।
गांव वैदवाला के गौतम गोदारा भी मशरूम यूनिट एवं संरक्षित खेती से लाखों की आमदनी ले रहे हैं। गोदारा ने वर्ष 2020-21 में एम.आई.डी.एच. स्कीम के अन्र्तगत मशरूम उत्पादन यूनिट का निमार्ण किया, जिसकी क्षमता 200 टन है। इसके साथ ही 2500 वर्ग मी0 में संरक्षित खेती के लिए ढांचा तैयार किया गया है जिसमें वे शंकर सब्जी का उत्पादन किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि वे अपने उत्पादों को उत्तर भारत की मंडियों में बेच कर अधिक मुनाफा कमा रहे हैं। वे 15 एकड़ में मशरूम एवं शंकर सब्जी उगाते हैं, जिनसे साल में 30 लाख रुपये तक की कमाई करते हैं। उनके उत्पाद हरियाणा, दिल्ली, राजस्थान में जाते हैं। उन्होंने बताया कि मशरूम उत्पादन एंव संरक्षित खेती व इनकी स्वयं की मार्केटिंग से प्रभावित हो कर दुसरे किसान भी मशरूम उत्पादन व संरक्षित खेती की ओर अग्रसर हो रहे हैं।
जिला के गांव चौटाला के 40 वर्षीय राज कुमार सिहाग 65 एकड़ के किन्नू बाग से करोड़ों की कमाई कर रहे हैं। वे ग्रेडिंग से लेकर पैकिंग का कार्य स्वयं करते हुए मार्केटिंग भी अपने स्तर पर करते हैं। वे 2005 से बागवानी कर रहे हैं। राज कुमार 65 एकड़ के किन्नू बाग से 1.25 करोड़ से 1.5 करोड़ तक सालाना कमाई कर रहा है तथा अपने ग्रेडिंग व पैकिंग यूनिट से प्रति वर्ष 3 से 4 महीने के लिए 30 से 40 लोगों को रोजगार भी देता है। राजकुमार का किन्नू हरियाणा, दिल्ली, राजस्थान तथा अन्य राज्यों में जाता है।

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