गुरु नानक कॉलेज में आज विश्व वातावरण दिवस मनाया गया

Dabwalinews.com
गुरु नानक कॉलेज किलियांवाली में आज राजनीति शास्त्र विभाग की थिंकर सोसाइटी द्वारा विश्व वातावरण दिवस जूम एप पर ऑनलाइन मनाया गया ।इस अवसर पर कार्यक्रम का आरंभ करते हुए राजनीति शास्त्र विभागाध्यक्ष प्रो. अमित बहल ने पंजाब यूनिवर्सिटी चंडीगढ़ द्वारा ग्रेजुएशन के बच्चों के लिए निर्धारित अनिवार्य पेपर वातावरण शिक्षा के बारे में विस्तार - पूर्वक जानकारी देते हुए आज बिगड़ते वैश्विक वातावरण पर रोशनी डाली ।कॉलेज प्रिंसिपल डॉ सुरेंद्र सिंह ठाकुर ने थिंकर सोसाइटी के इस प्रकल्प की सराहना करते हुए अपने वक्तव्य में कहा कि आज कोरोना महामारी काल में विश्व वातावरण दिवस मनाए जाने की सार्थकता और बढ़ गई है क्योंकि आज हम जिन विकट समस्याओं और महामारियों का सामना कर रहे हैं उनका कहीं न कहीं प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष संबंध वातावरण के बढ़ रहे बिगाड़ से ही है।
साल 1972 में संयुक्त राष्ट्र संघ ने वैश्विक स्तर पर पर्यावरण प्रदूषण की समस्या पर चिंता जताई थी और विश्व पर्यावरण दिवस मनाने की नींव रखी थी। स्वीडन की राजधानी स्टॉकहोम में दुनिया का पहला पर्यावरण सम्मेलन आयोजित किया गया था, जिसमें 119 देश शामिल हुए थे। पहले पर्यावरण दिवस पर भारत की पूर्व प्रधानमंत्री स्व श्रीमती इंदिरा गांधी ने भारत के नजरिए से प्रकृति और पर्यावरण के प्रति चिंताओं को जाहिर किया था।
विश्व पर्यावरण दिवस के लिए हर साल एक थीम रखी जाती है। इस साल की थीम है 'पारिस्थितिकी तंत्र की बहाली' है। शहर-गांव को हरा-भरा करके, पेड़ लगाकर, जगह-जगह बगीचे बनाकर और नदियों और समुद्र की सफाई करके पारिस्थितिक तंत्र की बहाली की जा सकती है। प्रकृति को बचाना हर इंसान का कर्तव्य है और प्रकृति को बचाने के लिए सिर्फ एक अकेला व्यक्ति काफी नहीं है, इसलिए हम सभी को साथ आकर समय रहते एक स्वस्थ और सुरक्षित पर्यावरण के लिए काम करना चाहिए।संपूर्ण मानवता का अस्तित्व प्रकृति पर निर्भर है। इसलिए एक स्वस्थ एवं सुरक्षित पर्यावरण के बिना मानव समाज की कल्पना अधूरी है। प्रकृति को बचाने के लिए हमसब को मिलकर कुछ संकल्प लेना होगा। जिसमें वर्ष में कम से कम एक पौधा अवश्य लगाएं और उसे बचाएं तथा पेड़-पौधों के संरक्षण में सहयोग करें। हमें अपने बुजुर्गों द्वारा दिखाए गए मार्ग का इसके लिए अनुसरण करना होगा ।
इस वर्चुअल कार्यक्रम के अंत में प्रो. बहल ने कहा कि कोरोनावायरस महामारी में मानव जीवन के लिए विश्व पर्यावरण दिवस महत्व काफी अधिक हो गया है। प्रकृति और पर्यावरण दोनों ही पृथ्वी के लिए सबसे महत्वपूर्ण हैं। 1972 में, संयुक्त राष्ट्र (यूएन) महासभा ने 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस के रूप में नामित किया। तब से, हर साल, दुनिया भर की सरकारें, बड़े व्यवसाय और नागरिक पर्यावरण के मुद्दों को हल करने के लिए अपने प्रयास करते हैं ।कोरोनावायरस महामारी के कारण, इस साल भी दुनिया भर में लाखों लोग इस दिन को डिजिटल रूप से मनाएंगे। 05 जून 1972 में संयुक्त राष्ट्र महासभा ने मानव पर्यावरण पर स्टॉकहोम सम्मेलन के पहले दिन विश्व पर्यावरण दिवस की स्थापना की। दो साल बाद, 1974 में, पहला विश्व पर्यावरण दिवस 'केवल एक पृथ्वी' विषय के साथ आयोजित किया गया था।हर साल 5 जून को दुनिया विश्व पर्यावरण दिवस मनाती है, जो प्रकृति के लिए मनाया जाने वाला दिन है। जानवरों से इंसानों तक, हम जो भोजन करते हैं, जिस हवा में हम सांस लेते हैं, जो पानी हम पीते हैं, और वह जलवायु जो हमारे ग्रह को रहने योग्य बनाती है, सब कुछ प्रकृति से ही आता है। विश्व पर्यावरण दिवस पर्यावरण में सकारात्मक बदलाव को प्रेरित करने के लिए एक वैश्विक मंच प्रदान करता है। यह व्यक्तियों को इस बारे में सोचने के लिए प्रेरित करता है कि वे किस तरह से पारिस्थितिकी तंत्र का उपभोग करते हैं और उन्हें हरित भविष्य के निर्माण के लिए कार्रवाई करने का मौका देता है।इस अवसर पर बी ए प्रथम वर्ष की छात्रा अर्चना जिंदल,नवदीप कौर, बी ए द्वितीय वर्ष के विद्यार्थी हु स्नदीप, जशनदीप सिंह, सहजप्रीत सिंह एवं बीए तृतीय के कुलदीप व नवदीप ने इस ज्वलंत विषय पर अपने विचार ऑनलाइन मंच पर रखे । इस वर्चुअल कार्यक्रम में कालेज के कॉमर्स विभाग अध्यक्षा मैडम उषा गोयल, डॉ सीमा जिंदल, प्रो. आशीष बागला, प्रो. प्रिंस सिंगला तथा बीए व बीकॉम के छात्र उपस्थित थे ।

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