नगर परिषद में 73 लाख के जीएसटी गबन का मामला

Dabwalinews.com
सिरसा। सिरसा नगर परिषद में 73 लाख से अधिक के जीएसटी गबन मामले में नगर परिषद के प्रधान रहें सुरेश कुक्कू व शीला सहगल के अलावा तत्कालीन एसडीएम परमजीत सिंह चहल को नोटिस किया गया है। इन्हें रिकार्ड अवलोकन के लिए 29 जून से 2 जुलाई 2021 का समय दिया गया था और एक सप्ताह में अपना पक्ष लिखित में देने के निर्देश दिए गए थे। लाखों रुपये के इस गबन मामले में प्याज की भांति परतें खुल रही है। पूर्व में नगर परिषद के महज आधा दर्जन कर्मचारियों को ही नोटिस दिया गया था। लेकिन अब मामले में आधा दर्जन ईओ और दो अकाऊंट ऑफिसर भी जांच के घेरे में बताए जाते है।वर्णनीय है कि माल और सेवाकर आसूचना महानिदेशालय गुरुग्राम द्वारा नगर परिषद के अधिकारियों व कर्मचारियों द्वारा जीएसटी में किए गए गबन का पर्दाफाश किया था। जीएसटी की राशि न पहुंचने पर जीएसटी विभाग हरकत में आया और छानबीन कर उन्होंने घोटाले का पर्दाफाश किया। जीएसटी इंटेलिजेंस ने अप्रैल-2013 से जून-2017 तक के वाऊचरों की जांच की थी और जांच उपरांत 63 लाख 23 हजार 244 रुपये का गबन पाया। इंटेलिजेंस द्वारा मामले की जब पड़ताल की गई तो जांच का दायरा जुलाई-2012 तक बढ़ा दिया गया। इस अवधि में गबन की राशि बढ़कर 73 लाख 516 पहुंच गई। लगभग 5 साल तक जीएसटी के गबन का खेल नगर परिषद में खेला गया। अक्टूबर-2018 में मामला एक्सपोज होने के बाद जिला उपायुक्त द्वारा एसडीएम सिरसा डा. जयवीर यादव की अध्यक्षता में जांच कमेटी का गठन किया। जांच कमेटी में हरियाणा रोडवेज सिरसा के लेखा अधिकारी अश्वनी कुमार, नगर परिषद के लेखा अधिकारी सुरेंद्र कुमार व सर्व शिक्षा अभियान सिरसा के लेखा अधिकारी रविंद्र कुमार को शामिल किया गया।जांच कमेटी द्वारा मामले में दूध का दूध और पानी का पानी करने के लिए गहन जांच की गई। जब जांच की गई तो प्याज की परतों की भांति अनेक चेहरे बेनकाब हुए है। जांच कमेटी द्वारा मामले में तत्कालीन प्रधान सुरेश कुक्कू के अलावा श्रीमती शीला सहगल को तथा तत्कालीन एसडीएम परमजीत सिंह चहल को नोटिस जारी किया है और जीएसटी गबन मामले में अपना पक्ष रखने के लिए कहा है। जांच कमेटी ने उन्हें एक सप्ताह का समय दिया है।

इन्हें नोटिस की वजह

नगर परिषद सिरसा के प्रधान रहें सुरेश कुक्कू का कार्यकाल 2 अगस्त 2010 से 3 जून 2015 तक रहा। जीएसटी गबन का सिलसिला वर्ष 2012 से शुरू हुआ। चूंकि सुरेश कुक्कू उस समय प्रधान थे। प्रधान व ईओ के हस्ताक्षर से ही बैंक से नगदी की निकासी हुई थी। इसी प्रकार श्रीमती शीला सहगल 13 दिसंबर 2016 से 31 जुलाई 2018 तक प्रधान रहीं। इस अवधि में हुए जीएसटी गबन मामले में उनका पक्ष पूछा गया है। सिरसा के एसडीएम परमजीत सिंह चहल 4 जून 2015 से 12 दिसंबर 2016 की अवधि में बतौर प्रशासक थे। यह अवधि भी जीएसटी गबन के दौरान की है। बताया जाता है कि बतौर प्रशासक उन्होंने जीएसटी अदा करने के लिए पेमेंट निकाली थी। इसलिए जांच कमेटी ने उन्हें भी नोटिस देकर उनका पक्ष जानना चाहा है।

कैसे रचा गया षड्यंत्र

सरकारी खजाने में जीएसटी की रकम भरने में बड़े शातिराना ढंग से कार्य किया गया। बैंक के वाऊचर में 50052 रुपये अंकित किया। बैंक में इतनी ही राशि जमा करवाई। बैंक द्वारा प्रदत्त चालान कॉपी पर 250052 अंकित कर दिया और सीधे-सीधे 2 लाख रुपये डकार लिए। जुलाई 2012 से लेकर फरवरी-2015 तक तो आंकड़ों में ही खिलवाड़ किया गया। मार्च-2015 के बाद तो बैंक की फर्जी मोहर लगाकर नकली वाऊचर नगर परिषद में थमा दिए गए। अचरज की बात तो यह है कि नगर परिषद में एक वाऊचर कई हाथों से निकलता है। कैशियर, लेखाकार, ऑडिटर सहित अन्य के पास पहुंचता है, मगर मार्च-2015 से जुलाई-2017 तक बैंक की फर्जी मोहर लगाकर वाऊचर जमा करवाए जाते रहें। मामले में किसी एक कर्मचारी या अधिकारी की संलिप्तता नहीं हो सकती। चूंकि 2012 से लेकर 2017 की पांच साल की अवधि में कई अधिकारी आए और गए, मगर गबन का सिलसिला चलता रहा। स्कैंडल एक्सपोज होने के बाद 48 लाख रुपये की वसूली होना भी यह दर्शाता है कि यह राशि किसी एक कर्मचारी द्वारा जमा नहीं करवाई गई है, बल्कि कई लोगों ने मिलकर इस राशि का भुगतान किया है? ऐसे में गबन मामले की पूरी पड़ताल आवश्यक है और दोषियों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज किए जाने की जरूरत है।

बढ़ेगा जांच का दायरा?

नगर परिषद में हुए गबन को लेकर जांच कमेटी द्वारा जुलाई-2012 से जून-2017 की अवधि में 73 लाख 516 की जांच की जा रही है। मामले में वर्ष 2012 व वर्ष 2013 के दौरान नगर परिषद के खाते से अधिक राशि निकालकर जीएसटी के रूप में 12 लाख रुपये कम राशि जमा करवाया जाना सामने आया है। यानि 73 लाख जमा 12 कुल 85 लाख रुपये गबन बनता है। नगर परिषद की ऑडिट रिपोर्ट के क्रमांक 37 दिनांक 27 फरवरी 2019 के अनुसार नगर परिषद के खाते से 598352 रुपये की निकासी की गई, जबकि 98352 रुपये जीएसटी के रूप में जमा करवाए गए यानि सीधे-सीधे 5 लाख रुपये डकार लिए गए। इसी प्रकार 6 सितंबर 2013 को खाते से 401472 रुपये की निकासी की गई और 101472 रुपये जमा करवाए गए यानि 3 लाख का गबन किया गया। जबकि 11 अक्टूबर 2013 को 479923 की निकासी की गई और 79923 रुपये जमा करवाकर 4 लाख रुपये डकार लिए गए। इस मामले में सीएम विंडो दाखिल की गई थी, जोकि नगर आयुक्त श्रीमती संगीता तेतरवाल के पास पहुंची। उनकी ओर से 7 जुलाई को इसे एसडीएम सिरसा को अग्र-प्रेषित कर अतिरिक्त 12 लाख के गबन की भी जांच के निर्देश दिए है।

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