यारों का यार था जस्सा...!

पुण्यतिथि पर विशेष
जीवन की सबसे बड़ी क्षति मृत्यु नहीं है, क्षति है उस व्यक्ति की जो किसी की संतान है, बेटा है, भाई है। जीवन और मृत्यु का इतना सा अंतर है, किसी को नींद आ गई, किसी की आंख खुल गई। 13-07-2016 की वह दर्दनाक दिनांक जो मेरे भाई राजेश कुमार उर्फ जस्सा को हम सबसे दूर ले गई हम कैसे विस्मृत कर सकते हैंं।मैं ही क्या कोई भी व्यक्ति आज से पांच वर्ष पूर्व हुई उस अक्समात् घटना को नहीं भूल सकता जो सबके हृदय में अघात कर गई। हम जानते हैं मृत्यु एक प्राकृतिक घटना है, मृत्यु का समय, स्थान व कारण अज्ञात है परंतु फिर भी जब हमारा कोई अपना हम से दूर होता है तो मन खिन्न हो जाता है, लेकिन यदि कोई सदा के लिए अलविदा कह जाए तो उस रिक्त स्थान को कोई नहीं भर सकता। आज पांच वर्ष व्यतीत हो गए, जो क्षति आर्य परिवार को हुई वो कभी पूर्ण नहीं हो सकती।
अब नहीं लौट के आने वाला,
घर खुला छोड़ के जाने वाला,
अच्छे लोग कभी नहीं मरते,
वो अपनी जिस्मानी सूरत से आजाद हो जाते हैं,
लेकिन उनकी स्मृतियां सदैव हृदय में घर किए रहती हैं।
रहने को सदा दहर में आता नहीं कोई,
तुम जैसे गए ऐसे भी जाता नहीं कोई,

ईश्वर ने जो ऑक्समिक आघात किया, उस दु:ख को व्यक्त करने में हमारा आर्य परिवार असमर्थ हैं। परमपिता परमात्मा से प्रार्थना है कि इस दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान करे। आज दिनांक 13-07-2021 को दिवंगत भाई राजेश कुमार आर्य ''जस्साÓÓ की पांचवीं पुण्यतिथि पर शत्-शत् नमन्।


भैया की स्मृति

आज
भी
कामना करती हूं,
एक बार फिर
देख सकूं अपने भाई को...
जो कह गया अलविदा
हम सभी को बिना बताए।
चाहती हूं
घर के किसी कमरे से
निकलकर आ जाओ...
एक बार फिर
तुम्हारी आवाज़
सुनने को मिले
परंतु ये असंभव है।
जानती हूं
तुम भी महसूस करते होगे
मेरी अश्रुधारा को
और नहीं चाहते होगे
मेरा तुम्हारी स्मृति में यूं आंसू बहाना...
क्यों कोई चला जाता है-
जो सबसे अनमोल होता है-
घर की दहलीज, आंगन
सारी चीजें याद करती हैं तुम्हें
एक-एक कर पांच वर्ष बीत गए-
न जाने कितने दिन, महीने साल आएंगे
हृदय में यही टीस देकर जाएंगे
हां - मेरे भाई
हम सबने तुम्हें खो दिया-
हम सबने तुम्हें खो दिया।

तुम्हारी बहन प्रो. शन्नों आर्य

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