नगर परिषद में जीएसटी के 73 लाख के गबन का मामला ,सूचना आयोग ने नप को दिया जवाब देने का अंतिम मौका
Dabwalinews.com
सिरसा। नगर परिषद में जीएसटी के 73 लाख रुपये के गबन मामले में मांगी गई आरटीआई पर कुंडली मारे राज्य जनसूचना अधिकारी-सह-कार्यकारी अधिकारी को राज्य सूचना आयोग ने जवाब देने का अंतिम मौका दिया है।आयोग द्वारा 20 नवंबर 2020 को शोकॉज नोटिस दिया गया था। इसके बावजूद नगर परिषद ने आरटीआई में वांछित सूचना प्रदान नहीं की। मामले में राज्य सूचना आयुक्त जय सिंह बिश्नोई ने कड़ा संज्ञान लिया और नगर परिषद के एसपीआईओ को आखिरी मौका दिया है। मामले की अगली सुनवाई 16 अगस्त को होगी।दरअसल, जीएसटी विजिलेंस ने वर्ष 2018 में नगर परिषद का 73 लाख रुपये का घोटाला पकड़ा था। नगर परिषद के अधिकारियों ने कथित सांठगांठ करके वर्ष 2012 से 2017 यानि पांच वर्षों तक जीएसटी राशि का गबन किया था। मामले को लेकर आरटीआई एक्टिविस्ट इंद्रजीत अधिकारी निवासी चत्तरगढ़पट्टी की ओर से 22 अक्टूबर 2018 को नगर परिषद से आरटीआई में जानकारी मांगी गई। नगर परिषद ने यह कहकर जानकारी देने से इंकार कर दिया कि मामले की जांच जारी है। इस मामले में प्रथम अपीलीय अधिकारी-सह-नगराधीश सिरसा के समक्ष अपील की गई। अपीलेंट अधिकारी ने नगर परिषद की दलील को खारिज कर दिया और 27 फरवरी 2019 को वांछित सूचना देने के निर्देश दिए। इसके बावजूद नगर परिषद ने जब सूचना प्रदान नहीं की तो राज्य सूचना आयोग का द्वार खटखटाया गया।
मामला राज्य सूचना आयुक्त जय सिंह बिश्नोई के पास सुनवाई के लिए पहुंचा। आयोग ने 2 मार्च 2020 को मामले में नगर परिषद को मांगी गई सूचना प्रदान करने के आदेश दिए। मगर, नगर परिषद ने वांछित सूचना प्रदान नहीं की। जिस पर सूचना आयोग ने 20 नवंबर 2020 को शोकॉज नोटिस जारी किया। जिस पर नगर परिषद सिरसा की ओर से बताया गया कि वांछित सूचना प्रदान की जा चुकी है। जबकि आयोग ने फाइल की पड़ताल में नगर परिषद का यह जवाब पाया कि मामले की जांच चल रही है। आयोग ने मामले में कड़ा संज्ञान लेते हुए नगर परिषद के कार्यकारी अधिकारी-सह-राज्य जनसूचना अधिकारी को जवाब देने का अंतिम मौका दिया है। उन्हें मांगी गई सूचना प्वाइंट वाइज देने की हिदायत दी गई है। आदेश में शोकॉज नोटिस के मामले में 16 अगस्त की सुनवाई पर फैसला दिया जाएगा।
लाखों की गबन राशि हो चुकी है जमा
जीएसटी गबन का खेल नगर परिषद में 5 वर्षों तक चला। जब मामला उजागर हुआ, तब नगर परिषद के अधिकारियों पर शिकंजा कसा गया। चूंकि जीएसटी अदा करने के नाम पर बोगस चालान जमा करवाए गए। कुछ वर्ष तक तो बैंक में नाममात्र राशि जमा करवाकर अधिक राशि दर्शाकर लाखों रुपये डकारे गए। बाद के वर्षों में फर्जी चालान पेश करके पूरी राशि ही डकार ली गई। मामले को दबाने-छिपाने का भी प्रयास किया गया। तीन वर्ष बीत जाने पर भी 73 लाख रुपये से अधिक का जीएसटी गबन करने पर किसी भी अधिकारी अथवा कर्मचारी के खिलाफ मामला तक दर्ज नहीं किया गया है। जबकि इस बीच नगर परिषद में गबन की लगभग 45 लाख रुपये की राशि जमा करवाई जा चुकी है। यानि गबन सिद्ध हो चुका है।
एसडीएम सहित दर्जनभर को दिए गए थे नोटिस
जीएसटी गबन मामले में सिरसा के तत्कालीन एसडीएम परमजीत सिंह चहल सहित दर्जनभर लोगों को नोटिस देकर अपना पक्ष रखने के लिए कहा गया। जिन्हें नोटिस दिया गया, उनमें तत्कालीन प्रधान सुरेश कुक्कू, श्रीमती शीला सहगल के अलावा आधा दर्जन कार्यकारी अधिकारी (ईओ), अकाऊंट ऑफिसर व लेखाकार व अन्य कर्मचारी शामिल है। एसडीएम जयवीर यादव की अध्यक्षता में गठित जांच कमेटी की ओर से इन लोगों को नोटिस दिए गए थे।
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