सिटी थाना के बगल में स्थित बैंक को पांच माह से मामला दर्ज होने का इंतजार,लाखों रुपये की धोखाधड़ी की शिकायत की थी, रिमाइंडर पर भी पुलिस ने साधा मौन
सिरसा। पुलिस के आला अधिकारी भले ही चुस्त-दुरुस्त प्रशासन की कोशिश करें, मगर मातहत अधिकारियों की कार्यशैली जब-तब चौंका देती है।थाना शहर के बगल में सिंडिकेट बैंक (अब केनरा बैंक) है। इस बैंक के अधिकारियों की ओर से धोखाधड़ी के एक मामले की मार्च-2021 में शिकायत की गई। शहर पुलिस ने बैंक अधिकारियों द्वारा की गई शिकायत पर कुंडली मार ली। बैंक की ओर से 28 जुलाई को पुन: रिमाइंडर देकर एफआईआर दर्ज करने की गुहार लगाई गई है। ऐसे में सिरसा शहर पुलिस की कार्यशैली का अंदाजा लगाया जा सकता है। जानकारी के अनुसार सिंडिकेट बैंक के वरिष्ठ शाखा प्रबंधक की ओर से 10 मार्च 2021 को पुलिस अधीक्षक कार्यालय को पत्र लिखकर बैंक के साथ धोखाधड़ी करने वालों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करने की गुहार लगाई थी। शिकायत में बताया कि बैंक के पास जिस प्रोपर्टी को गिरवी रखकर लोन लिया गया था। उस प्रोपर्टी को नगर परिषद के रिकार्ड में धांधली करके आगे बेच डाला गया है, जिससे बैंक को लाखों रुपये की चपत लगी है। बैंक की ओर से इस बाबत तमाम दस्तावेज भी प्रस्तुत किए गए। मगर, पुलिस प्रशासन ने बैंक की इस शिकायत को अनसुना कर दिया। बैंक प्रशासन की ओर से 28 जुलाई 2021 को फिर से रिमाइंडर देकर फ्रॉड करने वालों के खिलाफ मामला दर्ज करने की मांग की है।
क्या था मामला
सिटी थाने के बगल में स्थित सिंडिकेट बैंक (अब केनरा बैंक) के वरिष्ठ शाखा प्रबंधक की ओर से पुलिस को दी गई शिकायत में बताया कि बी-ब्लॉक निवासी कृष्ण गोयल पुत्र हरीश चंद्र गोयल द्वारा स्वयं को मैसर्ज गोयल टे्रडिंग कंपनी का प्रोपटराइर बताया। उसने अपने बी-ब्लॉक स्थित मकान नंबर-232 को बैंक में रहन रखकर 25 लाख की सीसी लिमिट का लोन लिया। इसके साथ ही 12 लाख 87 हजार का हाऊसिंग लोन भी लिया। उसने तीसरा लोन 7 लाख रुपये अगेंस्ट प्रोपर्टी लिया। तीनों मामले में उसका मकान बैंक को रहन रखा गया था।
बैंक की ओर से शिकायत में बताया गया कि कृष्ण गोयल ने 7 लाख का लोन ब्याज सहित चुका दिया। जबकि सीसी लिमिट व हाऊसिंग लोन को चुकाया नहीं। सीसी लिमिट के लोन के 25 लाख 74 हजार 333 रुपये तथा हाऊसिंग लोन के 11 लाख 76 हजार 111 रुपये बकाया है। बैंक के वरिष्ठ शाखा प्रबंधक की ओर से दी गई शिकायत में बताया कि जब बैंक ने लोन दिया तब नगर परिषद के रिकार्ड में मकान बैंक को रहन रखा जाना इंद्राज करवाया था। इसके बावजूद कृष्ण गोयल व दीपक गोयल ने फर्जीबाड़ा करके बैंक में रहन मकान को आगे बेच दिया और बैंक के साथ धोखाधड़ी की है।
नगर परिषद की कार्यप्रणाली भी कटघरे में!
सिंडिकेट बैंक (अब केनरा बैंक) के शाखा प्रबंधक की ओर से धोखाधड़ी की शिकायत मामले में नगर परिषद की कार्यप्रणाली पर भी सवालिया निशान लग रहे है। चूंकि बैंक ने लाखों रुपये का लोन स्वीकृत करने से पहले तमाम औपचारिकताएं पूरी की। बैंक के हक में मकान को रहन रखवाया गया। नगर परिषद के रिकार्ड में मकान रहन रखा जाना इंद्राज करवाया। मगर बैंक के पास रहन प्रोपर्टी को आगे बेच डाला गया। बकायदा इसकी रजिस्ट्री भी करवा दी गई।
बैंक प्रबंधन की ओर से दी गई शिकायत में नगर परिषद के उन अधिकारियों व कर्मचारियों का भी जांच के घेरे में आना तय है, जिन्होंने बैंक के पास रहन प्रोपर्टी की एनओसी जारी की। सूत्र बताते है कि यह अकेला मामला नहीं है। नगर परिषद सिरसा में जिस प्रकार दलालों का वर्चस्व बना हुआ है, वहां कुछ भी करवाया जा सकता है।
बैंक प्रशासन भी सवालों के घेरे में
बैंक के साथ लाखों की धोखाधड़ी होती है। बैंक के पास रहन प्रोपर्टी को आगे बेच दिया जाता है। बैंक की ओर से मार्च-21 यानि पांच माह पहले शिकायत की जाती है। यदि पुलिस ने बैंक की शिकायत पर मामला दर्ज नहीं किया, तब बैंक इतने माह तक चुप्पी क्यों साधे रहा? बैंक की ओर से किस्त समय पर जमा न करवाने पर उपभोक्ताओं को बार-बार चेताया जाता है, नोटिस किया जाता है। मगर, लाखों की धोखाधड़ी के मामले में पुलिस विभाग को आखिर क्यों नहीं चेताया गया? बैंक के बगल में ही स्थित पुलिस थाने में अधिकारियों के समक्ष अपनी बात क्यों नहीं रखी गई? क्यों नहीं पुलिस के आला अधिकारियों से मिलकर अथवा पत्राचार के माध्यम से रिमांडर भेजे गए? आज के युग में तो ई-मेल के माध्यम से भी शिकायत भेजी जा सकती है? आखिर क्या वजह रही कि बैंक प्रबंधक लाखों की धांधली में मौन साधे रहा। यह बैंक की कार्यप्रणाली पर संदेह पैदा करता है। अब 28 जुलाई को रिमांडर देकर महज खानापूर्ति की गई प्रतीत होती है? सवाल यह भी है कि क्या लोन देते समय तमाम औपचारिकताओं को पूरा किया गया था? सवाल यह भी उठता है कि बैंक की ओर से नगर परिषद सिरसा के खिलाफ शिकायत क्यों नहीं की गई? अनेक सवाल अनुत्तरित है। पुलिस द्वारा कार्रवाई करने पर ही इन सवालों के जवाब मिल पाएंगे!
क्या था मामला
सिटी थाने के बगल में स्थित सिंडिकेट बैंक (अब केनरा बैंक) के वरिष्ठ शाखा प्रबंधक की ओर से पुलिस को दी गई शिकायत में बताया कि बी-ब्लॉक निवासी कृष्ण गोयल पुत्र हरीश चंद्र गोयल द्वारा स्वयं को मैसर्ज गोयल टे्रडिंग कंपनी का प्रोपटराइर बताया। उसने अपने बी-ब्लॉक स्थित मकान नंबर-232 को बैंक में रहन रखकर 25 लाख की सीसी लिमिट का लोन लिया। इसके साथ ही 12 लाख 87 हजार का हाऊसिंग लोन भी लिया। उसने तीसरा लोन 7 लाख रुपये अगेंस्ट प्रोपर्टी लिया। तीनों मामले में उसका मकान बैंक को रहन रखा गया था।
बैंक की ओर से शिकायत में बताया गया कि कृष्ण गोयल ने 7 लाख का लोन ब्याज सहित चुका दिया। जबकि सीसी लिमिट व हाऊसिंग लोन को चुकाया नहीं। सीसी लिमिट के लोन के 25 लाख 74 हजार 333 रुपये तथा हाऊसिंग लोन के 11 लाख 76 हजार 111 रुपये बकाया है। बैंक के वरिष्ठ शाखा प्रबंधक की ओर से दी गई शिकायत में बताया कि जब बैंक ने लोन दिया तब नगर परिषद के रिकार्ड में मकान बैंक को रहन रखा जाना इंद्राज करवाया था। इसके बावजूद कृष्ण गोयल व दीपक गोयल ने फर्जीबाड़ा करके बैंक में रहन मकान को आगे बेच दिया और बैंक के साथ धोखाधड़ी की है।
नगर परिषद की कार्यप्रणाली भी कटघरे में!
सिंडिकेट बैंक (अब केनरा बैंक) के शाखा प्रबंधक की ओर से धोखाधड़ी की शिकायत मामले में नगर परिषद की कार्यप्रणाली पर भी सवालिया निशान लग रहे है। चूंकि बैंक ने लाखों रुपये का लोन स्वीकृत करने से पहले तमाम औपचारिकताएं पूरी की। बैंक के हक में मकान को रहन रखवाया गया। नगर परिषद के रिकार्ड में मकान रहन रखा जाना इंद्राज करवाया। मगर बैंक के पास रहन प्रोपर्टी को आगे बेच डाला गया। बकायदा इसकी रजिस्ट्री भी करवा दी गई।
बैंक प्रबंधन की ओर से दी गई शिकायत में नगर परिषद के उन अधिकारियों व कर्मचारियों का भी जांच के घेरे में आना तय है, जिन्होंने बैंक के पास रहन प्रोपर्टी की एनओसी जारी की। सूत्र बताते है कि यह अकेला मामला नहीं है। नगर परिषद सिरसा में जिस प्रकार दलालों का वर्चस्व बना हुआ है, वहां कुछ भी करवाया जा सकता है।
बैंक प्रशासन भी सवालों के घेरे में
बैंक के साथ लाखों की धोखाधड़ी होती है। बैंक के पास रहन प्रोपर्टी को आगे बेच दिया जाता है। बैंक की ओर से मार्च-21 यानि पांच माह पहले शिकायत की जाती है। यदि पुलिस ने बैंक की शिकायत पर मामला दर्ज नहीं किया, तब बैंक इतने माह तक चुप्पी क्यों साधे रहा? बैंक की ओर से किस्त समय पर जमा न करवाने पर उपभोक्ताओं को बार-बार चेताया जाता है, नोटिस किया जाता है। मगर, लाखों की धोखाधड़ी के मामले में पुलिस विभाग को आखिर क्यों नहीं चेताया गया? बैंक के बगल में ही स्थित पुलिस थाने में अधिकारियों के समक्ष अपनी बात क्यों नहीं रखी गई? क्यों नहीं पुलिस के आला अधिकारियों से मिलकर अथवा पत्राचार के माध्यम से रिमांडर भेजे गए? आज के युग में तो ई-मेल के माध्यम से भी शिकायत भेजी जा सकती है? आखिर क्या वजह रही कि बैंक प्रबंधक लाखों की धांधली में मौन साधे रहा। यह बैंक की कार्यप्रणाली पर संदेह पैदा करता है। अब 28 जुलाई को रिमांडर देकर महज खानापूर्ति की गई प्रतीत होती है? सवाल यह भी है कि क्या लोन देते समय तमाम औपचारिकताओं को पूरा किया गया था? सवाल यह भी उठता है कि बैंक की ओर से नगर परिषद सिरसा के खिलाफ शिकायत क्यों नहीं की गई? अनेक सवाल अनुत्तरित है। पुलिस द्वारा कार्रवाई करने पर ही इन सवालों के जवाब मिल पाएंगे!
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