फर्जी साइन करके सीएम विंडो के निस्तारण का मामला, राज्य चौकसी विभाग करेगा मामले की जांच
Dabwalinews.com
नाथूसरी चौपटा खंड के गांव रायपुर निवासी वरिष्ठ नागरिक मोहन लाल पुत्र मुखराम द्वारा दाखिल की गई सीएम विंडो का फर्जी साइन करके निस्तारण किए जाने मामले की जांच विजिलेंस के पास पहुंच गई है।सीएम विंडो की शिकायत को हल्के में लेने और सुनियोजित तरीके से उसका निपटान करने वालों की अब खैर नहीं है। मोहनलाल की शिकायत पर स्टेट विजिलेंस के महानिदेशक की ओर से जांच के आदेश दिए गए है। वर्णनीय है कि वरिष्ठ नागरिक मोहनलाल ने सीएम मनोहर लाल, गृहमंत्री अनिल विज व राज्यपाल को पत्र लिखकर सीएम विंडो का गलत ढंग से निस्तारण करने का आरोप लगाया था। शिकायत में बताया गया कि उसने गांव में हुए विकास कार्यों में गड़बड़ी की जांच करवाने को लेकर सीएम विंडो नंबर 079922/2020 में दर्ज करवाई थी। यह सीएम विंडो सीएम कार्यालय से डीसी कार्यालय, डीसी कार्यालय से डीडीपीओ और वहां से बीडीपीओ कार्यालय चौपटा पहुंची। शिकायत में कहा गया है कि सरपंच व बीडीपीओ कार्यालय के कर्मचारियों ने उसे सीएम विंडो वापस लेने के लिए दबाव बनाया। जब उसने सीएम विंडो वापस लेने से इंकार कर दिया तो 20 नवंबर 2020 को उसके फर्जी हस्ताक्षर करके झूठा व तथ्यहीन जवाब अपलोड कर दिया और सीएम विंडो की शिकायत फाइल कर दी। जिसमें उनकी ओर से लिखा गया है कि वे कोई कार्रवाई नहीं चाहते। शिकायतकत्र्ता ने सीएम विंडो की शिकायत संख्या 079922/2020 को रि-ओपन करने और सीएम विंडो पर फर्जी दस्तावेज अपलोड करने वालों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करने की मांग की थी। मामला राज्य चौकसी ब्यूरो हरियाणा के महानिदेशक के पास पहुंचा। उनकी ओर से चौकसी विभाग हरियाणा के मुख्य सचिव को पत्र लिखकर इसकी जांच करने के आदेश दिए है।
सीएम विंडो का बनाया मजाक!
स्टेट विजिलेंस द्वारा मामले की जांच किए जाने पर सीएम विंडो का मजाक बनाने वालों पर भी कार्रवाई की संभावना बन पाई है। शिकायत के अनुसार शिकायतकत्र्ता मोहन लाल के फर्जी हस्ताक्षर वाला ब्यान दर्ज किया गया। बल्कि उसके पुत्रों राजेश व आशाराम के बतौर गवाह फर्जी हस्ताक्षर किए गए है। चूंकि सीएम विंडो का निपटान सरकारी अधिकारियों की जिम्मेवारी होती है, ऐसे में यदि फर्जी हस्ताक्षर करके सीएम विंडो का निपटान दर्शाया जाता है। तब आमजन को न्याय कैसे मिलेगा?
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