नगर परिषद की शह पर नेहरू पार्क में हो रहा अवैध कब्जा!

श्री रामा क्लब चैरिटेबल ट्रस्ट द्वारा पार्क में करवाया जा रहा पक्का निर्माण
सिरसा। जिस नगर परिषद से अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई की उम्मीद की जाती है, उसी नगर परिषद की प्रोपर्टी पर यदि स्थायी निर्माण किया जाए तो इसे क्या कहिएगा? शहर के बीचोंबीच करोड़ों की प्रोपर्टी पर इन दिनों श्री रामा क्लब चेरिटेबल ट्रस्ट की ओर से पक्का निर्माण करवाया जा रहा है और सिरसा नगर परिषद प्रशासन आंखें मूंदे हुए है। अतिक्रमण पर गुर्राने वाले अधिकारी अवैध कब्जे पर मुंह सीले हुए है। शहर के बीचोंबीच एक समय तमाम राजनीतिक, सामाजिक, धार्मिक गतिविधियों का केंद्र रहा नेहरू पार्क आज अवैध कब्जे की भेंट चढ़ चुका है। नगर परिषद द्वारा जनता भवन रोड पर दो दर्जन दुकानें बनाकर किराए पर दी हुई है। जिसकी वजह से पार्क छिप गया। नेहरू पार्क के भीतर भी स्कूल और डिस्पेंसरी के नाम पर जगह अलॉट कर दी गई, जिसके कारण पार्क का दायरा सिमट गया। रही-सही कसर नगर परिषद के अधिकारियों ने पूरी कर दी। नेहरू पार्क में रामलीला का मंचन करने वाली संस्था श्री रामा क्लब चेरिटेबल ट्रस्ट की ओर से पहले पार्क की जगह पर अस्थायी रूप से कलाकारों के लिए ड्रेसिंग रूम तैयार किया गया। इसके बाद इसे पक्का बना दिया गया। शुरूआत में एक-दो कमरे तैयार किए गए, इसके बाद पक्का मंच तैयार कर दिया गया।श्री रामा क्लब चेरिटेबल ट्रस्ट के लोगों ने नगर परिषद के अधिकारियों व जिला प्रशासन से कथित सांठगांठ कर अवैध कब्जे का एरिया बढ़ा दिया। इसके साथ ही पार्क की जगह पर पक्का निर्माण भी खड़ा कर दिया गया। इस प्रकार सरेआम नगर परिषद की भूमि पर अवैध ढांचा खड़ा कर दिया गया। लेकिन नगर परिषद की ओर से कोई प्रतिक्रिया व्यक्त नहीं की गई। सब्जी मंडी के दुकानदारों को बरामदों पर अतिक्रमण के लिए नोटिस जारी करने वाली नगर परिषद ने अपनी ही भूमि पर किए गए अवैध निर्माण के मामले में आज तक चुप्पी साधी हुई है? यह क्या इशारा करती है? क्या सिरसा नगर परिषद की अवैध कब्जाधारियों से मिलीभगत है? अवैध निर्माण में किन अधिकारियों व नेताओं की शह है? आखिर नगर परिषद के नियम सबके लिए बराबर क्यों नहीं है? क्यों आम आदमी के साइनबोर्ड उठा लिए जाते है और असरदार लोगों के स्थायी कब्जे भी अनदेखे कर दिए जाते है?

सीएम विंडो से ही जागते है अधिकारी?

सिरसा नगर परिषद हो या सिरसा मार्केट कमेटी। सीएम विंडो के बाद ही इन विभागों के अधिकारियों की नींद खुलती है। कम से कम अतिक्रमण के मामले में तो दोनों ही विभागों की एक जैसी कार्यशैली है। शहर में जगह-जगह हुए अतिक्रमण का मामला हो या अनाज मंडी, एडिशनल मंडी, कपास मंडी अथवा सब्जी मंडी का। अधिकारियों द्वारा तब ही शिकायत पर संज्ञान लिया जाता है, जब मामला सीएम विंडो के माध्यम से उनके हलक में अटक जाता है। सीएम विंडो पर जवाबदेही तय होने पर ही अधिकारियों द्वारा कार्यवाही की खानापूर्ति की जाती है। मंडी में अनेक लोगों ने अतिक्रमण किया हुआ है, मगर मार्केट कमेटी प्रशासन द्वारा केवल उसी दुकानदार के खिलाफ कार्रवाई की जाती है, जिसकी सीएम विंडो पर शिकायत दर्ज होती है। इसी प्रकार नगर परिषद भी नाक के नीचे हुए अतिक्रमण को अनदेखा कर देती है, लेकिन जब मामला सीएम विंडो से पहुंचता है, तब कार्रवाई अमल में लाई जाती है। यानि बिना फटकार के कोई काम करने को तैयार नहीं है?

नेहरू पार्क को डकारने की तैयारी!

जनता भवन रोड स्थित नेहरू पार्क बेशकीमती है। इसके बगल में अनाज मंडी है। पूर्व में जनता अस्पताल है। पश्चिम में मुलतानी कालोनी है। शहरी आबादी के लिए बनाए गए इस पार्क में आसपास के लोगों की शाम बीता करती थी। सुबह व सायं की सैर करने वालों का यहां पर समय बीता करता था। लेकिन कुछ लोग पार्क की इस जगह पर गिद्ध दृष्टि जमाए हुए थे। इन्हीं की वजह से आज नेहरू पार्क अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहा है। नगर परिषद की इस प्रोपर्टी का एक हिस्सा कुछ वर्ष पहले एक संस्था को दिया गया। उक्त संस्था द्वारा स्कूल के संचालन और अस्पताल के लिए जगह आगे दे दी गई। इसके साथ ही उक्त संस्था द्वारा दर्जनभर दुकानों से प्राप्त होने वाले किराया भी वसूला जाता है। कुछ वर्ष पहले नेहरू पार्क की जगह में ही दुकानें बनाकर किराए पर दी गई। जिसके कारण जनताभवन रोड की ओर से पार्क दिखाई तक नहीं देता। नेहरू पार्क के भीतर इन दिनों श्री रामा क्लब चेरिटेबल ट्रस्ट द्वारा पक्का कब्जा जमाया जा रहा है। वहीं जनताभवन रोड की ओर की दुकानों के पीछे भी भोजन वितरण के लिए रसोई के नाम पर पक्का कब्जा जमाया गया है। इस प्रकार नेहरू पार्क को चारों ओर से कब्जाने की तैयारी की जा रही है। जिस प्रकार के हालात बने हुए है, उसकी वजह से आने वाले दिनों में नेहरू पार्क किन्हीं लोगों की प्राइवेट प्रोपर्टी भी घोषित हो सकती है? आज रामा क्लब द्वारा नेहरू पार्क की जगह पर कब्जा जमाया जा रहा है आने वाले दिनों में कोई अन्य व्यक्ति भी संस्था की आड़ में कब्जा जमाने आ पहुंचेगा? प्रभावशाली लोगों का संरक्षण प्राप्त उक्त व्यक्ति अथवा संस्था को तब कौन रोकेगा? जो शासन-प्रशासन आज नहीं रोक पा रहा, वह कल कैसे रोकेगा? आज जिन्हें संरक्षण प्राप्त है, वे कब्जा कर रहे है, कल को कोई दूसरा संरक्षण प्राप्त करके कब्जा करेगा? जिस प्रकार शासन-प्रशासन अवैध कब्जे के मामले में आंखें मूंदे हुए है, उसकी वजह से नेहरू पार्क का अस्तित्व खतरे में दिखाई दे रहा है।

अन्य संस्थाओं को भी अलॉट की जाए जगह!

सिरसा नगर परिषद द्वारा जिस प्रकार का रवैया अख्तियार किया हुआ है, जिस प्रकार शासन-प्रशासन नेहरू पार्क की बलि देने को उतारू है। उस लिहाज से तो शहर की अन्य संस्थाओं को भी नेहरू पार्क में जगह अलॉट कर देनी चाहिए। शहर में अकेली रामा क्लब ही रामलीला का मंचन नहीं करती। उसके समानांतर विष्णु क्लब भी रामलीला का मंचन और दशहरे का आयोजन करती है। इसी प्रकार दर्जनों ऐसी संस्थाएं है, जोकि जगह के अभाव में सड़क के किनारे अपना कार्य कर रही है। कोई रोटी बैंक चला रहा है तो कोई अन्य कार्य कर रहा है। सामाजिक व धार्मिक कार्यों में अग्रणी संस्थाओं को भी नेहरू पार्क में जगह दे देनी चाहिए? भाई कन्हैया आश्रम जैसी संस्था को जगह की खरीद पर लाखों रुपये खर्च करने पड़ते है, ऐसी संस्थाओं को जगह देने की पहल करनी चाहिए? चहेते लोगों और संस्थाओं को मनमर्जी से अवैध कब्जे की इजाजत किसी भी रूप में नहीं दी जा सकती? इसके लिए नियम-कायदे तय करने चाहिए। अतिक्रमणकारियों के साथ वैसा ही सलूक किया जाना चाहिए, जैसा अतिक्रमण कारी के साथ किया जाना चाहिए? ऐसे लोगों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई अमल में लाई जानी चाहिए।

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