'गुुरु' के प्रयासों से बचा 'शिक्षा का मंदिर'! डबवाली की कोर्ट ने खारिज किया केस ,स्कूल की जगह पर कब्जे का न्यायालय में किया विरोध


लगभग एक करोड़ की प्रोपर्टी पर जताया गया था हक
Dabwalinews.com
वर्तमान दौर में जब हरेक कर्मचारी अपनी ड्यूटी बजाने तक सीमित है, उस दौर में शिक्षा की अलख जगाने वाले शिक्षाविद् प्रो. करतार सिंह जनहित से जुड़े मामलों को उठाने में लगे है।उनकी ओर से समय-समय पर अव्यवस्था के खिलाफ आवाज बुलंद की जाती रही है। ताजा प्रकरण में उन्होंने गांव पन्नीवालामोटा स्थित राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय की बेशकीमती प्रोपर्टी पर कब्जा जमाने के मंसूबों पर पानी फेर दिया। इसी गांव के एक व्यक्ति ने डबवाली की अतिरिक्त सिविल जज की अदालत में केस दाखिल करके स्कूल द्वारा उसकी प्रोपर्टी पर कब्जा जमाने का केस दर्ज किया। मामले में स्कूल के प्रिंसिपल प्रो. करतार सिंह व दो अन्य शिक्षकों को पार्टी बनाया गया। हरिराम पुत्र गणपतराम निवासी पन्नीवालामोटा की ओर से अदालत में वाद दायर कर कहा गया कि स्कूल द्वारा उसकी प्रोपर्टी पर अवैध रूप से कब्जा जमाया गया है। अपनी बात को साबित करने के लिए उसकी ओर से भू-रिकार्ड भी पेश किया गया, इसके साथ ही गवाह भी पेश किए गए।
डबवाली की इस अदालत में चले इस केस में स्कूल के प्रिंसिपल प्रो. करतार सिंह ने किसी एडवोकेट की मदद लेने की बजाए स्वयं केस लड़ा और स्कूल का पक्ष रखा। उन्होंने कोर्ट को बताया कि केस दायर करने वाले की ओर से स्कूल की जमीन पर कब्जा करने का कई बार प्रयास किया गया। इस बारे में उनकी ओर से पुलिस में मामला भी दर्ज करवाया गया। उन्होंने केस में तथ्य रखें और मजबूती से अपना पक्ष रखा। मामले में गांव के सरपंच, नंबरदार सहित अन्य के बयान दर्ज हुए। पूरे मामले में केस दाखिल करने वाला हरिराम यह साबित नहीं कर पाया कि पन्नीवालामोटा सरकारी स्कूल द्वारा उसकी प्रोपर्टी पर किसी प्रकार का अवैध कब्जा किया गया है। जिसके बाद कोर्ट ने उसका केस खारिज कर दिया। स्कूल की जिस जगह पर दावा किया जा रहा था, उसकी कीमत लगभग एक करोड़ बताई जाती है। प्रो. करतार सिंह द्वारा अन्याय के खिलाफ आवाज बुलंद करने की न केवल छात्रों को शिक्षा ही दी जाती है, बल्कि समय आने पर उन्होंने बड़ी बुलंदी और साहस से इसका सामना किया तथा शिक्षा के मंदिर को बचाने में कामयाबी हासिल की।
'Temple of Education' saved by the efforts of 'Guru'! The court of Dabwali dismissed the case, protested in the court against the occupation of the school space








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